इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में विफलता पर प्रमुख सचिव और डीएम को तलब किया
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जिला स्तरीय अधिकारी जानबूझकर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना लागू नहीं कर रहे हैं, जिससे यह एक गंभीर प्रशासनिक ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की फाइल फोटो।
HighLights
प्रमुख सचिव व डीएम कौशांबी मांगी गई जानकारी के साथ 27 मई को तलब
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रमुख सचिव (राजस्व) से पूछे हैं चार महत्वपूर्ण सवाल
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जिला स्तर के अधिकारी जानबूझकर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना लागू नहीं कर रहे हैं। यांत्रिक व तकनीकी कारणों से किसान परिवार पर आई विपत्ति में राहत देने से इन्कार कर देते हैं। जब कोर्ट, जिलाधिकारी को अपने आदेश का औचित्य बताने के लिए कहता है तो वह बचाव के बजाय भुगतान कर देते हैं। यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है। इस कारण कल्याणकारी योजना को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा। यह सिस्टम की विफलता है।
प्रमुख सचिव (राजस्व) व डीएम कौशांबी तलब
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव तथा न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने सुनीता देवी की याचिका की सुनवाई करते हुए प्रमुख सचिव (राजस्व) को 27 मई को जिलाधिकारी कौशांबी के साथ तलब किया है। इसी दिन अगली सुनवाई होगी।
'अधिकारी मानवीय दृष्टिकोण लेकर काम नहीं करते'
कोर्ट ने कहा, योजना को लेकर बड़ी संख्या में याचिकाएं हर दिन दाखिल हो रही हैं। राज्य सरकार ने कमाऊ सदस्य की मौत पर अचानक संकट में आए किसान परिवार की मदद की कल्याणकारी योजना लागू की है, लेकिन जिले स्तर के अधिकारियों के रवैये के कारण योजना का उद्देश्य विफल हो रही है। अधिकारी मानवीय दृष्टिकोण लेकर काम नहीं करते। यह व्यक्तिगत गलती नहीं सिस्टम की विफलता कहीं जाएगी। याची के लिए अधिवक्ता राजेश मौर्य व एके निर्मल ने बहस की।
प्रमुख सचिव से कोर्ट ने पूछे हैं ये सवाल
1. प्रदेश में कृषक कल्याण योजना के तहत दावे के निपटारे व निगरानी का क्या कोई सिस्टम है?
2. जिलाधिकारी द्वारा बार- बार तकनीकी या दाखिले में देरी पर दावा निरस्त करने का क्या कारण है?
3. सभी जिलाधिकारी एक जैसा काम करें इसके लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
4. विपत्ति में आए परिवार को राहत से इन्कार पर सुधारात्मक उपाय क्या हैं?
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