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प्रयागराज में मल्टीस्पेशयलिटी अस्पताल के निर्माण में देरी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट नाराज, कार्रवाई का दिया निर्देश

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Updated: Sat, 22 Aug 2026 12:46 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज में मल्टीस्पेशयलिटी अस्पताल के निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. प्रमुख सचिव (नियोजन विकास) को त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश हाई कोर्ट ने दिया

  2. एकलपीठ ने कहा- जनता के हित से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को नहीं अटकाया जाना चाहिए

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक मल्टीस्पेशयलिटी अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि जनता के हित से जुड़े इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को सरकारी आदेशों और नौकरशाही की औपचारिकता में नहीं अटकाया जाना चाहिए।

अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी 

अदालत ने प्रमुख सचिव (नियोजन विकास) को स्वयं इस मामले में ध्यान देने और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने की प्रक्रिया छोटा करते हुए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रकरण में अगली सुनवाई पहली सितंबर को होगी। अदालत में प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार आवासों के खाली होने के बाद डीपीआर की मंजूरी और ठेकेदार के चयन में लगभग छह महीने का समय लगने का अनुमान जताया गया था। इस पर पीठ ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि प्रयागराज को ऐसे अस्पताल की तत्काल आवश्यकता है। छह महीने की लंबी अवधि का प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है। 

डीएम बोले- परिसर खाली कराने को हलफनामा 

सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया उपस्थित थे। जिलाधिकारी ने बताया कि सरकारी आवासों में अधिकांश को खाली करा लिया गया है। शेष बचे आवंटियों से एक सप्ताह के भीतर परिसर खाली करने का हलफनामा लिया गया है।

कोर्ट ने यूपी सिडको की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के चिल्ड्रेन विंग में हो रहे निर्माण में हो रही देरी पर कोर्ट ने यूपी सिडको की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। प्रोजेक्ट पिछले सात सालों से अधूरा है। इस संबंध में सिडको के प्रबंध निदेशक द्वारा अदालत में दिए गए आश्वासनों का पालन न होने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। पीठ ने प्रबंध निदेशक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि खुली अदालत में दिए गए बयान के बावजूद समय सीमा के भीतर काम पूरा क्यों नहीं किया गया।

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