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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 18, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    UP News: यूपी में 22 हजार कांस्टेबलों को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने योगी सरकार को द‍िए ये न‍िर्देश

    By Jagran NewsEdited By: Vinay Saxena
    Updated: Wed, 18 Oct 2023 07:18 PM (GMT+05:30)

    कांस्टेबलों की भर्ती सपा शासनकाल में हुई थी जबकि बसपा के शासनकाल में इन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। लंबी लड़ाई के बाद 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने इन्हे ...और पढ़ें

    यूपी में 22 हजार कांस्टेबलों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत।
    यूपी में 22 हजार कांस्टेबलों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत।

    HighLights

    1. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2005-06 में भर्ती 22 हजार कांस्टेबलों को बड़ी राहत दी है
    2. उप्र सरकार से सभी सेवाजनित लाभ पर दो माह में निर्णय लेने को कहा
    3. सपा सरकार में हुई थी भर्ती, बसपा सरकार में हटा दिए गए थे
    4. 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था सेवा में बहाली का आदेश

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2005-06 में भर्ती 22 हजार कांस्टेबलों को बड़ी राहत दी है। उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह दो महीने में इन्हें सभी सेवाजनित लाभ देने पर निर्णय करे। कांस्टेबलों की भर्ती सपा शासनकाल में हुई थी, जबकि बसपा के शासनकाल में इन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। लंबी लड़ाई के बाद 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें बहाल करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने 2006 से इनकी सेवा में निरंतरता मानी है। कोर्ट ने मथुरा, गौतमबुद्धनगर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, जिलों में तैनात हेड कांस्टेबलों तथा कांस्टेबलों की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए बुधवार को इस संबंध में आदेश पारित किया।

    हाई कोर्ट ने 2006 से सेवा निरंतरता मानते हुए कांस्टेबलों को वेतन वृद्धि, पदोन्नति, समेत सभी सेवा परिलाभ देने के बारे में सरकार को निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अलग-अलग याचिकाओं में मांग की गई थी कि 17 फरवरी, 2022 के शासनादेश के अनुपालन में 2005-2006 बैच के आरक्षी सिविल पुलिस, आरक्षी पीएसी, सहायक परिचालक रेडियो विभाग के कांस्टेबलों को वर्ष 2006 से सेवा में निरंतर मानते हुए उन्हें पेंशन, उपादान, वार्षिक वेतन वृद्धि, तथा पदोन्नति का लाभ व एसीपी का लाभ अनुमन्य कराया जाए।

    याची कांस्टेबलों की तरफ से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि सभी याची कांस्टेबलों की भर्ती वर्ष 2005-06 में सपा शासनकाल के दौरान हुई थी। बसपा शासनकाल आने पर इन्हें गलत आधार पर नौकरी से निकाल दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद इन्हें सेवा में 2009 में बहाल किया गया। कहा गया कि सभी याची कांस्टेबल 2006 से नौकरी में हैं।

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    सुप्रीम कोर्ट ने दीपक कुमार केस में यह आदेश पारित किया है कि 2005-06 के आरक्षियों की नियुक्तियां उनकी नियुक्ति दिनांक से सेवा में निरंतर मानी जाएंगी तथा वे सभी कांस्टेबल सभी प्रकार का सेवा लाभ पाने के लिए अनुमन्य होंगे। याचिका में कहा गया था कि नियुक्ति दिनांक से सभी कांस्टेबल 16 वर्ष की सेवा पूर्ण कर द्वितीय प्रमोशनल पे स्केल यानी दारोगा के पद का वेतनमान प्रशिक्षण की अवधि को जोड़ते हुए पाने के हकदार हैं, लेक‍िन इन्हें अभी तक इसका कोई लाभ नहीं दिया जा रहा है।

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    हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कांस्टेबलों की याचिका पर अपर पुलिस महानिदेशक (भवन व कल्याण) डीजीपी हेड क्वार्टर लखनऊ, सुप्रीम कोर्ट के दीपक कुमार केस में पारित आदेश के क्रम में जारी शासनादेश दिनांक 17 फरवरी, 2022 के अनुपालन में याची कांस्टेबलों की सेवा को निरंतर मानते हुए उनके पेंशन, उपादान, वार्षिक वृद्धि, पदोन्नति व एसीपी का लाभ प्रदान करने के संबंध में दो महीने के अंदर उचित आदेश पारित करें।