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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की, कहा- एकल मामले में भी Gangster Act की कार्रवाई संभव

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 06 Feb 2026 01:12 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एकल मामले में भी लागू हो ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैंग्स्टर एक्ट मामले में अपील खारिज कर दी है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैंग्स्टर एक्ट मामले में अपील खारिज कर दी है। 

HighLights

  1. गाजियाबाद निवासी अपीलार्थी की अपील कोर्ट ने खारिज की

  2. अभियुक्त पर सिंहानी गेट थाने में गैंग्स्टर एक्ट के तहत केस दर्ज है

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैंग्स्टर एक्ट को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कहा है कि गैंग्स्टर एक्ट के प्रावधान एकल मामले में भी लागू किए जा सकते हैं। अपराध का इतिहास अनिवार्य नहीं है। शर्त यह है कि प्राधिकारी ने संतुष्टि के बाद आदेश जारी किया हो। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने गाजियाबाद निवासी ज्योति सूरी की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है।

याची ने बीएनएसएस की धारा 528 के अंतर्गत सज्जन सूरी और अन्य के खिलाफ दर्ज केस की पूरी प्रक्रिया, चार्जशीट और संज्ञान आदेश रद करने की मांग की थी। अभियुक्त के खिलाफ सिंहानी गेट थाने में 23 सितंबर, 2024 को गैंग्स्टर एक्ट के तहत केस दर्ज है। इससे पहले 21 सितंबर, 2024 को गैंग चार्ट तैयार किया गया था, जिसमें एक मामले में शामिल दिखाया गया था।

अभियुक्त की तरफ से वकील ने कहा है कि गैंग चार्ट में केवल एक मामले का उल्लेख है और उसमें भी जमानत मिली है। इतना ही नहीं रूल 5 (3) (ए) का पालन नहीं किया गया है, क्योंकि कोई संयुक्त बैठक नहीं हुई है। गैंग चार्ट को मूल मामले की जांच पूरी हुए बिना मंजूरी नहीं दी जा सकती थी।

राज्य सरकार और पीड़ित के वकील ने कहा कि गैंग चार्ट संयुक्त बैठक में तैयार किया गया था और संबंधित अधिकारियों ने उचित चर्चा के बाद मंजूर किया था। गैंग चार्ट को 21 सितंबर, 2024 को पुलिस कमिश्नर ने मंजूर किया था, इसलिए इसमें कोई अवैधता या अनियमितता नहीं है। यह मूल मामले की जांच पूरी होने के बाद मंजूर किया गया था। आधार मामले की जांच 20 सितंबर, 2024 को पूरी हुई थी और यह तथ्य गैंग चार्ट में उल्लेखित है।

अदालत ने कहा, गैंग्स्टर एक्ट और रूल्स के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं हुआ है। रूल 10 (1) के अनुसार चार्जशीट की प्रमाणित प्रति की आवश्यकता नहीं है, बल्कि जांच अधिकारी द्वारा तैयार चार्जशीट संलग्न करनी होती है। जांच अधिकारी ने 20 सितंबर, 2024 को चार्जशीट तैयार की थी और गैंग चार्ट 21 सितंबर, 2024 को तैयार किया गया था और यह रूल 5 (3) (सी) का पालन माना जाना चाहिए। नियमों में यह नहीं है कि चार्जशीट की प्रमाणित प्रति कोर्ट द्वारा जारी की जानी चाहिए, बल्कि यह कहा गया है कि चार्जशीट की प्रति संलग्न होनी चाहिए।

कोर्ट ने शरद गुप्ता मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि गैंग्स्टर एक्ट की परिभाषा में एक या अधिक व्यक्ति शामिल हो सकते हैं जो अपराध करते हैं और इसका उद्देश्य अनुचित लाभ कमाना होता है।

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