Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल ने मानी खून चढ़ाने में गलती, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुआवजे का दिया आदेश

    By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Fri, 06 Feb 2026 12:49 PM (IST)

    प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्वीकार किया कि गलत खून चढ़ाने से महिला की मौत हुई। अदालत ने राज्य सरकार को मुआवजा तय करने क ...और पढ़ें

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो। 

    HighLights

    1. इलाहाबाद हाई कोर्ट का राज्य सरकार को निर्देश, कहा कि बताएं- कितना मुआवजा तय हो

    2. मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को निर्देश, भविष्य में पुनरावृत्ति नहीं होने देने के लिए कमेटी बनाएं

    3. उच्च न्यायालय के अधिवक्ता की मां की मृत्यु को लेकर दायर याचिका की सुनवाई

    विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सौरभ सिंह सोमवंशी की मां की मृत्यु को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान मोतीलाल नेहरू मेडिकल से संबद्ध स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन हास्पिटल) ने गलती स्वीकार कर ली है। यह बात मान ली है कि गलत खून चढ़ाया गया था। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ के समक्ष यह स्वीकारोक्ति की गई है। अपर महाधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने सरकार का तथा याची अधिवक्ता का पक्ष सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन. सिंह ने रखा।

    अस्पताल प्रशासन के अपर महाधिवक्ता ने स्वीकारा

    याची के अधिवक्ता ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से ही एक महिला की मौत हुई है। इलाज न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में चल रहा था। वहां गलत ब्लड चढ़ाए जाने पर किडनी फेल होने की वजह से नेफ्रोलॉजी में शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन की ओर से अपर महाधिवक्ता ने यह बात स्वीकार की कि गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ाने के कारण मृत्यु हुई है।

    कोर्ट ने कहा- मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य की विफलता

    कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य का यह कर्तव्य था कि वह सुनिश्चित करें कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के अधिकारों की रक्षा हो लेकिन यह घटना उनकी विफलता को दर्शाती है। कहा कि अपर महाधिवक्ता और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मिलकर मुआवजे की राशि तय करें। साथ ही ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का निर्देश दिया।

    लापरवाही की वजह से किसी मरीज की न हो मौत

    संविधान के अनुच्छेद 21 का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन को ऐसा प्रबंध करना चाहिए कि भविष्य में सुविधाओं की कमी न हो और स्टाफ की लापरवाही की वजह से किसी मरीज की मौत न हो। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता को देय मुआवजा राशि की जानकारी लेकर बताने को कहा है। इस प्रकरण में अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को दोपहर दो बजे से होगी।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें- PCS Interview 2024 : पीसीएस वर्ष 2024 के साक्षात्कार की तिथियां घोषित, यूपीपीएससी ने रोल नंबर-वार शेड्यूल जारी किया

    यह भी पढ़ें- UPPSC Assistant Registrar Exam 2024 : सहायक कुलसचिव लिखित परीक्षा परिणाम घोषित, 138 अभ्यर्थी देंगे साक्षात्कार