इलाहाबाद विश्वविद्यालय को पंत छात्रावास खाली कराने में छूटा पसीना, साढ़े सात घंटे की कवायद के बाद 7 कमरे ही कब्जे में आए
इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन पंत छात्रावास को मरम्मत के लिए खाली कराने पहुंचा, जिसका छात्रों ने विरोध किया। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन हॉस्टल बंद ...और पढ़ें

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास को खाली कराने को लेकर आक्रोशित छात्रों को समझाते पुलिस अधिकारी। जागरण
HighLights
अंतेवासियों का आरोप- विश्वविद्यालय प्रशासन सभी छात्रों को बाहर कर हॉस्टल बंद करना चाहता है
छात्रावास का बिजली-पानी कनेक्शन काटा गया, विश्वविद्यालय प्रशासन अंतेवासियों को अवैध बताया
एसीपी ने छात्रों से वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, प्रॉक्टर को बुलाने की मांग की गई
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास को खाली कराने के लिए पूरे दिन कवायद चली। नोंकझोक के साथ कई बार हाथापाई की नौबत आई लेकिन किसी तरह का बल प्रयोग नहीं किया गया। शनिवार को चले इस वाशआउट अभियान में सात कमरे खाली कराए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से सुबह 10 बजे अभियान शुरू किया। अंतेवासियों ने निरंतर विरोध दर्ज कराया और नारेबाजी की। इस बीच छात्रावास की बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया गया। शाम करीब साढ़े पांच बजे तक छात्रावास खाली कराने की प्रक्रिया चलती रही।
सितंबर 2025 के बाद से यहां रहने वाले अवैध बताए गए
कार्यवाहक चीफ प्राक्टर डॉ. अतुल नारायण सिंह के अनुसार पंत छात्रावास को खाली कराने की प्रक्रिया दिसंबर 2025 से चल रही है। सितंबर 2025 के बाद से यहां जो लोग भी रह रहे हैं वे अवैध हैं, क्योंकि उसके बाद से छात्रावास आवंटित नहीं किया गया। 80 कमरों वाले छात्रावास में अभी करीब तीन सौ लोग रह रहे हैं। इस अवैध कब्जे के कारण हर महीने लाखों रुपये का बिजली खर्च का भार आ रहा है।

विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई
वाशआउट अभियान के लिए सिटी मजिस्ट्रेट विनय सिंह, एसपी कर्नलगंज राजकुमार सिंह, डॉ. अतुल नारायण सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रो. सूर्यभान सिंह, पुलिस बल और विश्वविद्यालय के सुरक्षा गार्डों की मौजूदगी रही। प्रारंभ में सात कमरे खाली करा लिए गए। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने अंतेवासियों को चेतावनी भरे अंदाज में बताया कि किसी भी छात्र को अब कमरे आवंटित नहीं हैं। ऐसे में सभी को कमरे खाली करना होगा। ऐसा न करने पर सभी के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
छात्र बोले- सितंबर 2026 तक उनका कब्जा वैध
पंत छात्रावास एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों को आवंटित किया जाता है। यहां रहकर छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। सत्र 2023-24 में सितंबर में कमरों का आवंटन हुआ था। अधिवक्ता अरविंद कुमार सरोज का कहना है कि 18 जुलाई को विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन ने कमरों को खाली कराने का जो प्रयास किया वह गलत है।
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एडीएम के हस्तक्षेप पर रोकी कार्रवाई
कुछ कमरों के ताले भी तोड़े गए। विरोध और अधिकारियों से बातचीत के बाद एडीएम के हस्तक्षेप से कार्रवाई रोक दी गई। छात्रों का यह भी कहना है कि 13 सितंबर 2024 को कमरों पर कब्जा मिला था उस हिसाब से सितंबर 2026 तक वह यहां रह सकते हैं।