Allahabad University पिछले 10 वर्षों में आइएएस, आइपीएएस और पीसीएस बने छात्रों का तैयार करेगा डेटाबेस
इलाहाबाद विश्वविद्यालय पिछले 10 वर्षों में सिविल सेवा परीक्षाओं में सफल हुए अपने पूर्व छात्रों का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार करेगा। यह पहल विश्वविद्यालय ...और पढ़ें

इलाहाबाद विश्वविद्यालय।
HighLights
सिविल सेवा में विश्वविद्यालय का गौरव पुनर्स्थापित करने की एल्युमिनाई एसोसिएशन करेगा पहल
यूपी लोक सेवा आयोग की पीसीएस-2024 परीक्षा में विश्वविद्यालय के 70 छात्रों ने सफलता हासिल की
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय एक बार फिर अपनी पुरानी अकादमिक विरासत और सिविल सेवा में रहे वर्चस्व को नई पहचान देने की तैयारी में जुट गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब पिछले 10 वर्षों में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफल हुए अपने पूर्व छात्रों का विस्तृत डेटाबेस तैयार करेगा।
विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण कदम
इस पहल को विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हाल ही में घोषित परिणामों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया।
यूपीपीसीएस परीक्षा 2024 में 70 छात्र सफल
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस-2024 परीक्षा में विश्वविद्यालय के 70 छात्रों ने सफलता हासिल की, जबकि संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में आठ छात्रों ने चयन पाकर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया। यह संख्या इसलिए सामने आ सकी क्योंकि इस बार विश्वविद्यालय ने स्वयं डेटा संकलित करने का प्रयास किया।
व्यवस्थित रिकार्ड नहीं था
अब तक विश्वविद्यालय के पास ऐसा कोई व्यवस्थित रिकार्ड उपलब्ध नहीं था, जिससे यह पता चल सके कि बीते वर्षों में कितने छात्र प्रशासनिक सेवाओं में पहुंचे। परिणामस्वरूप अनेक प्रतिभाशाली पूर्व छात्र सफलता हासिल करने के बावजूद विश्वविद्यालय की आधिकारिक उपलब्धियों का हिस्सा नहीं बन सके।
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इवि को सिविल सेवा की नर्सरी कहा जाता था
विश्वविद्यालय के शिक्षकों और अधिकारियों का मानना है कि दो दशक पहले तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय को सिविल सेवा की नर्सरी कहा जाता था। यहां के छात्र न केवल पीसीएस और आइएएस जैसी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में चयनित होते थे, बल्कि देशभर के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी पहचान भी बनाते थे। समय के साथ यह परंपरा कमजोर नहीं हुई, लेकिन उसका व्यवस्थित दस्तावेजीकरण नहीं हो सका।
विशेष पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होगी
अब विश्वविद्यालय प्रशासन इस स्थिति को बदलना चाहता है। इसके लिए जल्द ही एक विशेष पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिसमें पूर्व छात्रों से उनकी शैक्षणिक जानकारी, चयन वर्ष, सेवा और वर्तमान पद का विवरण मांगा जाएगा। माना जा रहा है कि आनलाइन पोर्टल और विभागीय समन्वय के माध्यम से यह डेटा एकत्र किया जाएगा।
विश्वविद्यालय की योजना
इलाहाबाद विश्वविद्यालय एल्युमिनाई एसोसिएशन के सचिव प्रो. कुमार वीरेंद्र कहते हैं कि यह पहल केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि इससे वर्तमान छात्रों को भी प्रेरणा मिलेगी। सफल पूर्व छात्रों के अनुभव, मार्गदर्शन और उपलब्धियां नए अभ्यर्थियों के लिए प्रेरक शक्ति बन सकती हैं। विश्वविद्यालय भविष्य में ऐसे पूर्व छात्रों को आमंत्रित कर विशेष व्याख्यान और मार्गदर्शन सत्र आयोजित करने की भी योजना बना सकता है।
छात्रों में नया उत्साह पैदा करेगी
उन्होंने कहा कि प्रयागराज की शैक्षणिक संस्कृति में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एक अलग पहचान रही है। हिंदी साहित्य, राजनीति, न्यायपालिका और प्रशासनिक सेवाओं में यहां के छात्रों का योगदान लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा अपने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने की यह पहल नई पीढ़ी के छात्रों के भीतर भी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति नया उत्साह पैदा करेगी।