स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में नया मोड़, इलाहाबाद HC में याचिका दाखिल कर उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा बताया
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण के झूठे आरोपों पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उस ...और पढ़ें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद। जागरण आर्काइव
HighLights
शाहजहांपुर निवासी रमाशंकर दीक्षित ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की
हाई कोर्ट ने आरोप से संबंधित याचिका पर राज्य सरकार व अन्य से मांगी रिपोर्ट
आशुतोष ब्रह्मचारी को पक्षकार बनाने का निर्देश, 16 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जेजे मुनीर व इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण का झूठा आरोप लगाए जाने के लिए दबाव डालने के आरोपों पर उप्र सरकार व अन्य से रिपोर्ट मांगी है। शाहजहांपुर निवासी रमाशंकर दीक्षित ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाए हैं।
मामले की सुनवाई की अगली तारीख 16 जुलाई नियत
कोर्ट ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 16 जुलाई नियत की है। साथ ही आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पांडेय को प्रतिवादी (पक्षकार) के रूप में सम्मिलित करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देशित किया है कि वह आदेश की प्रति बरेली परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर तथा थाना प्रभारी सदर बाजार शाहजहापुर को क्रमशः बरेली एवं शाहजहांपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों के माध्यम से भिजवाएं।
याची का आरोप, झूठा आरोप लगाने को दबाव बनाया
याची ने आरोप लगाया है कि 18 फरवरी 2026 को तीन अज्ञात व्यक्तियों ने संपर्क कर उन्हें धन का प्रलोभन दिया तथा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध उनकी दो नाबालिग पुत्रियों के यौन शोषण का झूठा आरोप लगाने के लिए दबाव बनाया। प्रस्ताव ठुकराने के बाद उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां दी गईं तथा घर की रेकी भी कराई गई।
याची ने सुरक्षा प्रदान करने की मांग की
याची के अनुसार शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की, लेकिन सुरक्षा में लगाए गए कुछ पुलिसकर्मियों ने भी उन पर बयान बदलने का दबाव बनाया। याची ने अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने के लिए आवश्यक विधिक संरक्षण प्रदान करने की मांग की है।