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    प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर मंसूराबाद बाईपास बारिश में धंसा, हाल ही में हुआ था निर्माण; गुणवत्ता पर उठे सवाल

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sat, 11 Jul 2026 05:00 PM (IST)

    प्रयागराज-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंसूराबाद बाईपास का एक हिस्सा बारिश में धंस गया, जिससे हाल ही में हुए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ गए हैं। इससे ...और पढ़ें

    प्रयागराज के शृंगवेरपुर धाम क्षेत्र में क्षतिग्रस्त प्रयागराज-लखनऊ हाईवे बाईपास से गुजरते वाहन। जागरण

    प्रयागराज के शृंगवेरपुर धाम क्षेत्र में क्षतिग्रस्त प्रयागराज-लखनऊ हाईवे बाईपास से गुजरते वाहन। जागरण 

    HighLights

    1. 100 मीटर से अधिक दायरे में धंंसा डिवाइडर और सड़क

    2. वाहन चालकों की परेशानी, दुर्घटना की भी जताई आशंका

    संसू, जागरण, शृंगवेरपुर धाम (प्रयागराज)। गंगापार में शृंगवेरपुर धाम अंतर्गत ग्राम पंचायत मंसूराबाद से होकर गुजरने वाले प्रयागराज-लखनऊ राष्ट्रीय राज्यमार्ग पर बना मंसूराबाद बाईपास बरसात के मौसम की शुरूआत में ही धंसने लगा है। बारिश से 10 जुलाई को 100 मीटर से अधिक दूरी में बाईपास का डिवाइडर और सड़क धंस गई। 

    बारिश में सड़क का एक हिस्सा धंसा 

    हाल ही में तैयार कराए गए इस बाईपास का निर्माण अब गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में आ गई है। सड़क धंसने से जहां आवागमन प्रभावित हुआ है, वहीं राहगीरों के लिए यह मार्ग जोखिम भरा बन गया है। फतेहपुर कायस्थान विद्युत उपकेंद्र के बगल से गुजरने वाले नाले पर ऊंचाई देकर बाईपास का निर्माण कराया गया था। सड़क को सहारा देने के लिए दोनों ओर डिवाइउर बनाया गया था, लेकिन बरसात में डिवाइडर भरभरा कर गिर गया। बारिश के बाद सड़क का एक हिस्सा धंस गया।

    निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने की थी शिकायत 

    स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। परिणामस्वरूप, करोड़ों रुपये की लागत से बना यह मार्ग कुछ ही समय में जर्जर होने लगा है।

    हादसे की बढ़ी आशंका 

    ग्रामीणों ने बताया कि मार्ग पर बड़े वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है, जिससे धंसे हुए हिस्से पर हादसे की आशंका बढ़ गई है। रात में यह मार्ग और अधिक खतरनाक हो जाता है, क्योंकि क्षतिग्रस्त हिस्से की उचित बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत तक नहीं लगाए गए हैं। क्षेत्रीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, साथ ही क्षतिग्रस्त मार्ग के तत्काल पुनर्निर्माण की आवश्यकता जताई है।

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    इसकी देखरेख का जिम्मा किसके पास? 

    राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना प्रबंधक के पीए रजत का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं है। इस बाईपास की देखरेख एनएचएआइ की ओर से नहीं किया जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड- 1 लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रवींद्रपाल सिंह का कहना है कि इसकी देखरेख एनएच नहीं करता है। आखिर इसकी देखरेख का जिम्मा किसके पास है बड़ा सवाल उठ रहा है।

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