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    CBSE के सातवीं से नवीं कक्षा के विद्यार्थियों को राहत, 10वीं में इन्हें नहीं देनी होगी तीसरी भाषा की परीक्षा

    By Amlendu Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sat, 11 Jul 2026 02:44 PM (IST)

    सीबीएसई ने त्रिभाषा नीति पर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिससे कक्षा 7 से 9 के विद्यार्थियों को 10वीं में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। ...और पढ़ें

    सीबीएसई ने त्रिभाषा नीति को और स्पष्ट किया है।

    सीबीएसई ने त्रिभाषा नीति को और स्पष्ट किया है।

    HighLights

    1. पूर्ववत दो भाषाओं की पढ़ाई करेंगे वर्तमान में कक्षा 10 के विद्यार्थी

    2. कक्षा नौ के विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का चयन कर पढ़ाई करना है

    3. सीबीएसई ने त्रिभाषा नीति को और स्पष्ट करते हुए दिशानिर्देश जारी किए

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सीबीएसई ने त्रिभाषा नीति को और स्पष्ट करते हुए दिशानिर्देश जारी किए हैं। वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को नई भाषा नीति का पालन नहीं करना है। अभी जो विद्यार्थी कक्षा सात, आठ और नौ में हैं, वे जब 10वीं में जाएंगे तो तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।

    स्कूलों को निर्देश 

    वर्तमान में कक्षा सात, आठ और नौ के जिन विद्यार्थियों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे उन्हीं दो विदेशी भाषाओं का अध्ययन जारी रखेंगे। उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा जोड़नी होगी। स्कूलों को निर्देशित किया गया है कि कक्षा स्तर के अनुसार अध्ययन सामग्री छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराई जाए।

    तीन में दो भाषाएं भारतीय 

    एनपीएस पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य संजय श्रीवास्तव कहते हैँ कि सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति में तीन भाषाओं के अध्ययन की बात कही है। इसमें दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। इस कदम से विद्यार्थियों को अलग-अलग भाषाओं में दक्ष बनाया जा सकेगा। सीखने और विकास की प्रक्रिया भी संतुलित होगी। माध्यमिक स्तर अर्थात नवीं और 10वीं में तीसरी भाषा का समावेश, मध्य स्तर अर्थात कक्षा छह से आठ तक भाषा समझ का विस्तार करने का प्रयास हो रहा है।

    विद्यालयों में भाषा नीति का क्रियान्वयन शुरू 

    शैक्षणिक सत्र 2026–27 से विद्यालयों में भाषा नीति के क्रियान्वयन के लिए कार्य शुरू हो चुका है। कक्षा 10 अर्थात सत्र 2026–27 के विद्यार्थियों को पूर्ववत दो भाषाओं की व्यवस्था के अनुसार पढ़ाई करनी है। उन्हें तीसरी भाषा का चुनाव नहीं करना है। कक्षा नौ अर्थात सत्र 2026–27 के विद्यार्थी तीन भाषाओं का चयन कर पढ़ाई करेंगे। उन्हें हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओड़िया, असमिया आदि में से कोई दो भाषा का चुनाव और गैर भारतीय भाषाओं जैसे अंग्रेज़ी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी, स्पेनिश आदि में से एक भाषा की पढ़ाई करनी है। 

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    इसे तीसरी भाषा के रूप में चुन सकते हैं

    यदि कोई विद्यार्थी पहले से दो भारतीय भाषाएंं पढ़ रहा है तो तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी, फ्रेंच आदि का चुनाव कर सकता है। यदि एक भारतीय भाषा व एक विदेशी भाषा पढ़ रहे हैं तो कोई भारतीय भाषा चुननी होगी। यदि कोई विद्यार्थी पहले से दो विदेशी भाषा पढ़ रहा है तो उसे सत्र 2026–27 में एक बार की विशेष छूट के तहत दोनों विदेशी भाषाओं का अध्ययन जारी रख सकते हैं लेकिन तीसरी भाषा भारतीय होना आवश्यक है।

    आंतरिक स्तर पर तीसरी भाषा का मूल्यांकन

    सत्र 2026–27 के कक्षा नौ के विद्यार्थियों को ध्यान रखना होगा कि तीसरी भाषा का मूल्यांकन विद्यालय द्वारा एसाइनमेंट आदि के तौर पर आंतरिक सतर पर होगा। जब यह बैच 2027–28 में अर्थात कक्षा दस में पहुंचेगा, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। यही वजह है कि सीबीएसई व एनसीईआरटी ने तीसरी भाषा के अध्ययन के लिए कक्षा स्तर के अनुरूप अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सत्र 2026–27 में कक्षा सात और आठ के जो विद्यार्थी हैं वे जब नौवीं और दसवीं में पहुंचेंगे तब तीन भाषाओं का अध्ययन करेंगे। उनमें दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।

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