Amrit Sarovar : झाड़ियाें के जंगल में अमृत सरोवर गुम, प्रयागराज में जल संरक्षण की उम्मीदें तार-तार
प्रयागराज में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए अमृत सरोवर बदहाली का शिकार हैं, जहां वे झाड़ियों से घिरे और सूखे पड़े हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण ज ...और पढ़ें

प्रयागराज में यमुनापार के नारीबारी स्थित अमृत सरोवर का यह है हाल। जागरण
HighLights
बहादुरपुर, सहसों और बारा क्षेत्र में भी खूब हुई अनदेखी
जिम्मेदारों की लापरवाही से पानी में गया लाखों का बजट
जागरण टीम, प्रयागराज। रिंग रोड के ओवरब्रिज के किनारे गहराई में उगी सरपत व दूसरी कटीली झाड़ियाें का जंगल। लग रहा था मानो मिट्टी निकालने से बना कोई गड्ढा हो, लेकिन यह अमृत सरोवर निकला। सहसो ब्लाक के जगबंधनपुर गांव स्थित इस अमृत सरोवर की बदहाली ग्रामीणों को अखर रही है। रिंग रोड ने इसका आकार पहले ही घटा दिया था। रही-सही कसर जिम्मेदारों ने अनदेखी करके पूरी कर दी। यह अमृत सरोवर महज एक उदाहरण मात्र है।
इन क्षेत्रों में किस हाल में हैं अमृत सरोवर?
बहादुरपुर, सहसों और बारा क्षेत्र में दुर्गति के शिकार हुए अमृत सरोवर भरे पड़े हैं। यह वह तालाब हैं, जो एक से डेढ़ दशक पहले पानी से लबालब रहते थे। गर्मी के दिनों में बेसहारा पशुओं, वन्य जीवों व पक्षियों की प्यास बुझाते थे। अब खुद एक-एक बूंद पानी को तरस रहे हैं। कुछ सरोवरों में पानी है भी तो वहां कटीली झाड़ियों व गंदगी ने कब्जा जमा रखा है। अफसरों की थोड़ी सी सक्रियता इन्हें नया जीवन दिला सकती है, लेकिन जिम्मेदार हैं कि ध्यान ही नहीं देते।
लोगों की प्यास बुझाने वाला तालाब सूखा
बारा के नारीबारी स्थित अमृत सरोवर की स्थिति दयनीय है। इस सरोवर में नाली की पाइप जोड़ दी गई है। घरों का गंदा पानी आता है। करीब 23 लाख रुपये का बजट इस पर खर्च हुआ था। स्ट्रीट लाइट, फेंसिंग आदि काम हुए ही नहीं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि चार दशक पहले इसी सरोवर से लोगों के घरों में खाना पकता था। आज सरोवर खुद प्यासा है।
बदहाली की नहीं चिंता, पौधारोपण की तैयारी
बारा क्षेत्र के सड़वा खुटुरिया में लाखों रुपये की लागत से बना अमृत सरोवर बदहाल है। पानी की जगह घास-फूस उगी हुई है। जल संरक्षण की उम्मीदें तार-तार हो गईं हैं। लोग बताते है कि बारिश कम होती है। जो बारिश होती भी है तो उसका पानी सरोवर तक पहुंचता नहीं। इसकी फिक्र किसी को नहीं, लेकिन पौधारोपण की तैयारी कर रहे हैं।
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उखड़ी इंटरलाकिंग, झाड़ियों का अंबार
बहादुरपुर के सिंगरामऊ गांव के अमृत सरोवर की अनदेखी ग्रामीणों की चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोग बताते है कि कई साल पहले इस तालाब का चयन अमृत सरोवर के रूप में हुआ था। काम शुरू तो हुआ, लेकिन पूरा नहीं कराया गया। इंटरलाकिंग अधूरी पड़ी है। इसे संवारने की जरूरत है, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैँ।
क्या कहते हैं लोग?
गांव के सरोवर के जीर्णोद्धार की जरूरत है। इससे गांव में लोगों के लिए सुबह-शाम बैठने व टहलने के लिए एक उचित स्थान उपलब्ध होगा।
- वीरेंद्र सिंह, जगबंधनपुर
अमृत सरोवर में न तो परियोजना से जुड़ा बोर्ड बचा है और न ही इंटरलाकिंग। देखरेख के अभाव में अमृत सरोवर बदहाली का शिकार हो गया है।
- राजेश यादव, सिंगरामऊ
जल संरक्षण के जिस उद्देश्य से अमृत सरोवरों के निर्माण की पहल की गई थी, वह अधूरी रह गई है। इनके निर्माण में सिर्फ सरकारी बजट खर्च किया गया। फायदा कुछ नहीं मिला।
- रामपाल यादव, नारीबारी
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