प्रयागराज जंक्शन पर 40 मिनट खड़ी रही बुंदेलखंड एक्सप्रेस, फिर भी 'प्यासे' रह गए डिब्बे, यात्रियों ने किया हंगामा व नारेबाजी
प्रयागराज जंक्शन पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस 40 मिनट तक खड़ी रही, फिर भी डिब्बों में पानी नहीं भरा गया। कई डिब्बों में पानी खत्म होने से यात्रियों की दैनिक ...और पढ़ें

प्रयागराज जंक्शन की फाइल फोटो। जागरण आर्काइव
HighLights
ग्वालियर से बनारस जा रही ट्रेन यात्रियों की परेशानी, लापरवाही का लगाया आरोप
कई डिब्बों में पानी पूरी तरह खत्म हो चुका था, दैनिक क्रिया भी हुई प्रभावित
कोच एस-1 में यात्रा कर रहे एक यात्री ने आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भारतीय रेलवे जहां एक ओर आधुनिकता और 'अमृत काल' की सुविधाओं का दम भर रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यात्रियों का बुरा हाल है। ताजा मामला प्रयागराज जंक्शन का है। यहां रेल प्रशासन की घोर संवेदनहीनता के कारण ग्वालियर से बनारस जा रही ट्रेन संख्या 11107 बुंदेलखंड एक्सप्रेस के यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी।
डिब्बों में पानी न होने से यात्री हुए परेशान
शनिवार की सुबह जब ट्रेन प्रयागराज जंक्शन पहुंची, तो यात्रियों को उम्मीद थी कि यहां पानी की समस्या दूर हो जाएगी। कोच एस-1 (S1) सहित कई डिब्बों में पानी पूरी तरह खत्म हो चुका था। सुबह का समय होने के कारण स्थिति और भी विकट थी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को नित्यक्रिया और मुंह धोने तक के लिए एक बूंद पानी नहीं था।
प्रयागराज जंक्शन पर वाटर फिलिंग नहीं की गई
हैरानी की बात यह रही कि ट्रेन जंक्शन पर पूरे 40 मिनट तक खड़ी रही। यात्रियों का आरोप था कि नियमानुसार इस दौरान वाटर फिलिंग (पानी भरने) की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन रेलवे का अमला गहरी नींद में सोया रहा। न कोचों में पानी भरा गया और न ही गंदगी से बजबजाते शौचालयों की सफाई की गई।
व्यवस्था पर उठते सवाल
कोच एस-1 में यात्रा कर रहे यात्री विपिन कुमार दुबे ने आधिकारिक शिकायत दर्ज कराते हुए रेलवे की कार्यसंस्कृति पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने बताया कि जिम्मेदार कर्मचारी अपनी ड्यूटी के प्रति पूरी तरह बेपरवाह नजर आए। जब यात्री डिब्बों से उतरकर मदद की गुहार लगा रहे थे, तब अधिकारी और कर्मचारी मूकदर्शक बने रहे।
खबरें और भी
यह घटना गंभीर सवाल खड़ा करती है
- क्या प्रयागराज जैसे प्रमुख जंक्शन पर भी वाटरिंग सिस्टम फेल हो चुका है?
- 40 मिनट का लंबा ठहराव होने के बावजूद तकनीकी टीम और सफाईकर्मी कहाँ थे?
- यात्रियों के हंगामे के बावजूद ट्रेन को बिना पानी भरे ही आगे रवाना करना क्या यात्रियों की सुरक्षा और गरिमा के साथ खिलवाड़ नहीं है?
बेअसर रहा यात्रियों का आक्रोश
सुविधाओं के अभाव से त्रस्त यात्रियों ने स्टेशन पर जमकर हंगामा काटा और रेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। यात्रियों का आरोप था कि उन्हें 'उपभोक्ता' नहीं बल्कि 'बोझ' समझा जा रहा है। विडंबना देखिए कि इतना सब होने के बाद भी सिस्टम नहीं जागा और ट्रेन को बिना पानी भरे ही उसके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया।
क्या रेल मंत्रालय किसकी तय करता है जवाबदेही
यात्रियों का कहना था कि यह लापरवाही केवल एक ट्रेन की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की है जो कागजों पर तो 'हाई-टेक' होने का दावा करती है, लेकिन हकीकत के धरातल पर यात्रियों को बुनियादी जरूरतों के लिए भी रुला देती है। अब देखना यह है कि क्या रेल मंत्रालय इस मामले में किसी पर जवाबदेही तय करता है या यह खबर भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।