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    रेलयात्री ध्यान दें : चित्रकूट से सीधे जुड़ेगा प्रतापगढ़ व लखनऊ, कानपुर में नहीं बदलनी पड़ेगी ट्रेन, कोच भी दोगुने

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sun, 09 Aug 2026 01:53 PM (GMT+05:30)

    भारतीय रेलवे ने कानपुर-चित्रकूट और कानपुर-प्रतापगढ़ ट्रेनों का विलय कर 'मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़-चित्रकूटधाम कर्वी एक्सप्रेस' शुरू की है। अब चित् ...और पढ़ें

    चित्रकूट से प्रतापगढ़ होते हुए लखनऊ के लिए सीधी ट्रेन सेवा की यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

    चित्रकूट से प्रतापगढ़ होते हुए लखनऊ के लिए सीधी ट्रेन सेवा की यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

    HighLights

    1. 'मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़-चित्रकूट धाम कर्वी एक्सप्रेस' ट्रेन बिना रुके सीधे दौड़ेगी

    2. चित्रकूट-अवध-कानपुर रेल कॉरिडोर पर अब 12 नहीं, पूरे 24 डिब्बों के साथ दौड़ेगी ट्रे

    3. बुंदेलखंड से अवध तक खुशी की लहर, यात्रियों को मिलने जा रही बहुत बड़ी सौगात

    अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। बुंदेलखंड और अवध के लाखों यात्रियों, तीर्थयात्रियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए भारतीय रेलवे ने एक ऐसा बड़ा तोहफा दिया है, जिसकी मांग सालों से की जा रही थी। अब भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट से मां बेल्हा देवी की पवित्र नगरी प्रतापगढ़ और प्रदेश की राजधानी लखनऊ जाना न केवल बेहद आसान हो जाएगा, बल्कि सफर भी बेहद आरामदायक होने वाला है।

    दो अलग-अलग एक्सप्रेस ट्रेनों के विलय को हरी झंडी

    रेल मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कानपुर-चित्रकूट और कानपुर-प्रतापगढ़ के बीच चलने वाली दो अलग-अलग एक्सप्रेस ट्रेनों के विलय को हरी झंडी दे दी है। इस एक फैसले ने तीन बड़े शहरों और उनके बीच पड़ने वाले दर्जनों कस्बों के लाखों लोगों की राह आसान कर दी है।

    कानपुर में न उतरना पड़ेगा, न बदलनी होगी ट्रेन

    अक्सर चित्रकूट, बांदा या अतर्रा से लखनऊ और प्रतापगढ़ जाने वाले यात्रियों को कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर उतरकर घंटों दूसरी ट्रेन का इंतजार करना पड़ता था। भारी-भरकम सामान और छोटे बच्चों को लेकर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर भागना किसी सिरदर्द से कम नहीं था। हालांकि अब नई विलय की गई ट्रेन 14123/14124 'मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़-चित्रकूटधाम कर्वी एक्सप्रेस' के रूप में बिना रुके सीधे दौड़ेगी।

    यात्रियों को क्या होंगे फायदे?

    सीधा संपर्क : चित्रकूटधाम कर्वी से चलकर यह ट्रेन बांदा, घाटमपुर, कानपुर सेंट्रल, उन्नाव, लखनऊ और रायबरेली होते हुए सीधे प्रतापगढ़ पहुंचेगी।

    समय और पैसे की बचत : यात्रियों को अब बीच रास्ते में ट्रेन बदलने का झंझट नहीं रहेगा। टिकट का खर्च भी बचेगा और सफर का समय भी।

    हर वर्ग को फायदा : चाहे कामधंधे के सिलसिले में लखनऊ जाने वाले व्यापारी हों, इलाज के लिए निकलने वाले बुजुर्ग हों, या पढ़ाई के लिए सफर करने वाले युवा, हर किसी के लिए यह ट्रेन अब 'लाइफलाइन' बनेगी।

    भीड़ से मिलेगी मुक्ति : 12 नहीं, पूरे 24 कोच की होगी ट्रेन, दोगुनी सीटें होंगी उपलब्ध अक्सर त्योहारों के सीजन में या आम दिनों में भी इस रूट की ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती थी। सीट न मिलने के कारण यात्रियों को खड़े-खड़े या गलियारे में बैठकर लंबा सफर तय करना पड़ता था। रेलवे ने इस दर्द को समझा है और यात्रियों को बहुत बड़ी राहत दी है।

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    दोगुनी हुई क्षमता : पहले जहां इन ट्रेनों में सिर्फ 12 कोच (डिब्बे) हुआ करते थे, वहीं अब विलय के बाद यह ट्रेन 24 कोच के साथ पटरी पर उतरेगी।

    सीट मिलने की गारंटी : कोचों की संख्या दोगुनी होने से जनरल और स्लीपर क्लास की सीटों में जबरदस्त इजाफा होगा, जिससे कानपुर-प्रतापगढ़ और कानपुर-चित्रकूट रेलखंड पर होने वाली भारी भीड़भाड़ से मुक्ति मिलेगी।

    किफायती और आरामदायक सफर : आम जनता को जेब पर बिना अतिरिक्त बोझ डाले अब आरक्षित और आरामदायक सीट मिल सकेगी।

    इन स्टेशनों के लोगों की खुली किस्मत : आपके शहर में भी रुकेगी यह एक्सप्रेस रेलवे ने यह सुनिश्चित किया है कि इस विलय से छोटे-बड़े किसी भी स्टेशन के यात्रियों का नुकसान न हो। यह नई ट्रेन मार्ग के सभी प्रमुख और लोकप्रिय स्टेशनों पर अपनी सेवाएं पूर्ववत देती रहेगी।

    यह ट्रेन सीधे इन स्टेशनों को जोड़ेगी 

    प्रतापगढ़ व आसपास : मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, चिलबिला, मां चंद्रिका देवी धाम अंतू।

    अमेठी व रायबरेली रूट : अमेठी, गौरीगंज, काशिमपुर, जायस, फुरसतगंज, रायबरेली, हरचंदपुर, बछरावां, निगोहां।

    राजधानी व कानपुर मंडल : लखनऊ, मानक नगर, उन्नाव, कानपुर सेंट्रल, भीमसेन, कठारा रोड, पनारा, घाटमपुर।

    बुंदेलखंड रूट : हमीरपुर रोड, यमुना साउथ बैंक, भरुआ सुमेरपुर, रागौल, बांदा, अतर्रा और चित्रकूटधाम कर्वी।

    धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को लगेंगे पंख

    चित्रकूट में कामदगिरि की परिक्रमा करनी हो, बांदा का प्रसिद्ध नवाब टैंक देखना हो, या प्रतापगढ़ में मां बेल्हा देवी और मां चंद्रिका देवी के दर्शन करने हों, यह ट्रेन धार्मिक आस्था को एक सूत्र में पिरोने का काम करेगी। बुंदेलखंड के विकास में यह ट्रेन एक मील का पत्थर साबित होगी। उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय रेलवे के इस संयुक्त प्रयास से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि अवध और बुंदेलखंड के बीच व्यापारिक रिश्ते भी और अधिक मजबूत होंगे। तो बस, अब अपना बैग तैयार कीजिए, क्योंकि चित्रकूट से प्रतापगढ़ का यह सफर अब और भी सुहाना होने जा रहा है!

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