Indian Railways : दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर 160-200 K/H की स्पीड से चलेंगी ट्रेनें, तारों में दौड़ेगा 25,000 वोल्ट करंट
दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर ट्रेनें अब 160-200 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी, जिससे यात्रा का समय 3-4 घंटे कम हो जाएगा। 10 अगस्त 2026 से 25,000 वोल्ट की ...और पढ़ें

दिल्ली-हावड़ा रूट पर ट्रेनों को हाई स्पीड में चलाने की रेलवे ने तैयारी कर ली है।
HighLights
हाई स्पीड ट्रेन चलाने के लिए तारों पर दौड़ेगी 23 हजार वोट करंट
दिल्ली से प्रयागराज पहुंचने में भी दो घंटे कम करने की पूरी तैयारी
अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। देश की सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलमार्गाें में से एक 'दिल्ली-हावड़ा मुख्य मार्ग' पर सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए आने वाला समय बड़ी सौगात लेकर आ रहा है। भारतीय रेल ने इस पूरे रेल खंड पर ट्रेनों की गति में ऐतिहासिक वृद्धि करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है।
ट्रेनें 160 K/H की रफ्तार से चलाने की तैयारी पूरी
दिल्ली से हावड़ा के बीच रेलगाड़ियों की गति को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाते हुए 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में इस मार्ग पर गाड़ियों को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की तैयारी पूरी की जा चुकी है, जिसे आगे बढ़ाकर पहले 180 और फिर अंतिम रूप से 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाया जाएगा।
विद्युत तार आधुनिक प्रणाली में परिवर्तित
गति बढ़ाने के इस महाअभियान के तहत बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को सुदृढ़ करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। इसी कड़ी में उत्तर मध्य रेल (एनसीआर) के प्रयागराज मंडल के अंतर्गत आने वाले विभिन्न रेल खंडों में उच्च क्षमता वाले नए उप-केंद्रों (स्विचिंग स्टेशनों) और विद्युत तारों के संजाल को पूरी तरह से आधुनिक प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया है।
10 अगस्त से उच्च क्षमता वाली विद्युत धारा होगी प्रवाहित
उत्तर मध्य रेल प्रशासन ने इस परियोजना को अमलीजामा पहनाते हुए आम जनता, रेल यात्रियों और रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण सार्वजनिक अधिसूचना जारी की है। रेलवे द्वारा दी गई आधिकारिक सूचना के अनुसार, 10 अगस्त 2026 से प्रयागराज मंडल के अंतर्गत आने वाले प्रमुख रेल खंडों मेजा रोड, भीरपुर, सैयद सरावां और शुजातपुर में नवनिर्मित स्विचिंग स्टेशनों को पूरी तरह से चालू कर दिया जाएगा।
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तारों को 25 हजार वोल्ट से ऊर्जावान किया जाएगा
इन नए उप-केंद्रों के चालू होते ही रेलवे की ऊपरी विद्युत तारों (ओवरहेड ट्रैक्शन वायर - OHE) में 25,000 वोल्ट (50 हर्ट्ज़ एसी) की अत्यंत शक्तिशाली विद्युत धारा प्रवाहित की जाएगी। 10 अगस्त को या उसके बाद किसी भी समय इन सभी लाइनों को ऊर्जावान (एनर्जाइज) कर दिया जाएगा।
ट्रेनों के परिचालन और स्पीड के फायदे
ट्रेनों के तकनीकी और तकनीकी-परिचालन के दृष्टिकोण से यह नया 2x25 केवी हाई-टेंशन विद्युत सिस्टम एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगा।
निर्बाध पावर सप्लाई: उच्च क्षमता वाली विद्युत धारा मिलने से ट्रेनों के इंजन (लोकोमोटिव) को बिना किसी रुकावट के पूरी ताकत मिलेगी।
त्वरित पिकअप और स्पीड: पावर में उतार-चढ़ाव खत्म होने से ट्रेनें कुछ ही सेकंड में अपनी अधिकतम रफ्तार पकड़ सकेंगी।
भारी मालगाड़ियों को गति: यात्री ट्रेनों के साथ-साथ भारी मालगाड़ियाँ भी बिना पटरियों पर दबाव डाले तेज गति से निकल सकेंगी, जिससे माल ढुलाई का समय भी घटेगा।
रूट की क्षमता में बढ़ोतरी: ट्रेनों के जल्दी गंतव्य तक पहुँचने से पटरियाँ जल्दी खाली होंगी, जिससे इस व्यस्त रूट पर और अधिक नई ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।
टाइमिंग का गणित: कितने घंटे होगी बचत?
जब रेलगाड़ियां 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी, तो समय की बचत का आंकड़ा चौंकाने वाला होगा।
दिल्ली से प्रयागराज/वाराणसी: वंदे भारत, राजधानी और अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों का सफर लगभग 1.5 से 2 घंटे तक कम हो जाएगा।
दिल्ली से हावड़ा (कोलकाता): 1400 किलोमीटर से अधिक लंबे इस मार्ग पर कुल यात्रा समय में करीब 3 से 4 घंटे तक की भारी कटौती होगी।
लेट-लतीफी से मुक्ति: यदि कोई ट्रेन पीछे से थोड़ी देरी से भी चल रही होगी, तो उच्च गति क्षमता के कारण चालक (लोको पायलट) रास्ते में ही उस देरी की भरपाई (टाइम कवर) आसानी से कर सकेंगे।
यात्रियों को लाभ मिलेगा
सुगम और आरामदायक सफर: नए आधुनिक रेल पटरियों और सुदृढ़ ओवरहेड वायरों के कारण ट्रेनों में झटके (जर्क) बहुत कम लगेंगे, जिससे लंबी दूरी की यात्रा बेहद आरामदायक होगी।
एक ही दिन में आना-जाना संभव: समय की बचत होने से कारोबारी, छात्र और नौकरीपेशा लोग दिल्ली से प्रयागराज या कानपुर जैसे शहरों की यात्रा एक ही दिन में पूरी कर वापस लौट सकेंगे।
सुरक्षित रेल यात्रा: पटरियों की बाड़बंदी (फेंसिंग) और आधुनिक सिग्नलिंग से दुर्घटनाओं की संभावना शून्य के बराबर हो जाएगी, जिससे यात्री निश्चिंत होकर सफर कर सकेंगे।24 घंटे 'सक्रिय' रहेंगी लाइनें, रेलवे ने दी सख्त चेतावनी
रेलवे के उप मुख्य विद्युत इंजीनियर (परियोजना) द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना में स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी गई है कि 10 अगस्त 2026 की तिथि से ही इन सभी ओवरहेड ट्रैक्शन लाइनों को चौबीसों घंटे 'सक्रिय' (लाइव) माना जाएगा।
उत्तर मध्य रेल के आम नागरिकों को कड़े दिशा-निर्देश
अनधिकृत प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध: कोई भी आम नागरिक, ग्रामीण या अनधिकृत व्यक्ति रेलवे पटरी, नए स्विचिंग स्टेशन परिसर या विद्युत तारों के आसपास जाने का प्रयास न करे।
समीप कार्य करने पर रोक: विद्युत तारों के आसपास बिना रेलवे की पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य, खुदाई या झाड़ियों की सफाई करने पर सख्त मनाही रहेगी।
प्राणघातक हो सकता है संपर्क: 25,000 वोल्ट की यह हाई-टेंशन विद्युत रेखा अत्यधिक संवेदनशील और शक्तिशाली होती है। इसके संपर्क में आना या इसके बहुत करीब जाना भी जीवन के लिए प्राणघातक सिद्ध हो सकता है।
सुरक्षित रेल संचालन में जनता के सहयोग की अपील
उत्तर मध्य रेल के सीपीआरओ डा. शिवम शर्मा ने सभी स्थानीय निवासियों, पशुपालकों और रेलवे पटरियों के निकटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे स्वयं भी सतर्क रहें और अपने बच्चों तथा मवेशियों को रेल लाइनों से दूर रखें। पटरियों को पार करने के लिए केवल अधिकृत समपार फाटकों (लेवल क्रासिंग), ओवरब्रिज या अंडरपास का ही उपयोग करें।