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    प्रधानाचार्य भर्ती के अभ्यर्थियों की नई मांग : शिक्षक भर्ती मुकदमों के निस्तारण के लिए समय सीमा हो, अलग बने व्यवस्था

    By Awadhesh Pandey Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sun, 09 Aug 2026 03:44 PM (GMT+05:30)

    शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए अलग व्यवस्था और समय सीमा निर्धारित करने की मांग की है। वर्षों से लंबित 69,000 शिक्षक औ ...और पढ़ें

    डॉ. हरिप्रकाश यादव, डॉ. संतोष कुमार शुक्ल व डॉ.. शैलेश कुमार पाण्डेय।

    डॉ. हरिप्रकाश यादव, डॉ. संतोष कुमार शुक्ल व डॉ.. शैलेश कुमार पाण्डेय।

    HighLights

    1. बाल न्यायालय, राजस्व न्यायालय तो शिक्षक भर्ती मुकदमों के लिए अलग न्यायालय क्यों नहीं

    2. HC व सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों का दबाव, 69000 शिक्षक भर्ती, प्रधानाचार्य भर्ती विलंबित

    अवधेश पाण्डेय, जागरण, प्रयागराज। बेसिक शिक्षा की वर्ष 2019 की 69,000 पदों की शिक्षक भर्ती, एडेड माध्यमिक विद्यालयों की वर्ष 2013 की प्रधानाचार्य भर्ती हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन अन्य मुकदमों के दबाव में ऐसी फंसी कि याची अभ्यर्थी मुकदमा लड़ते-लड़ते थक चुके हैं। बेसिक की भर्ती आरक्षण विसंगति के चलते सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो प्रधानाचार्य भर्ती पिछले दिनों यथास्थिति (स्टेटस-को) का आदेश हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच से हटने के बाद अब जारी पैनल पर एडवाइजरी जारी होने की प्रतीक्षा में अटकी है।

    ऐसे प्रभावित अभ्यर्थियों एवं शिक्षक संगठनों ने मांग उठाई है कि भर्तियों से संबंधित मुकदमों की सुनवाई के लिए अलग न्यायालय बने और निस्तारण के लिए समय सीमा उसी तरह निश्चित की जाए, जिस तरह पेपर लीक रोधी विधेयक-2026 में व्यवस्था दी गई है।

    नीट पेपर लीक के बाद पेपर लीक रोधी विधेयक-2026 बनाया गया। इसमें स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने, दो माह में जांच और आरोपपत्र की तिथि से तीन में माह में ट्रायल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके विपरीत भर्ती परीक्षाओं को लेकर अदालतों में विचाराधीन मुकदमे वर्षों से लंबित हैं। स्थिति यह है कि वर्ष 2013 की 632 पदों की प्रधानाचार्य भर्ती में 500 से ज्यादा चयनित प्रधानाचार्य हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से यथास्थिति (स्टेटस-को) का आदेश पिछले दिनों तक प्रभावी रहने के अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके हैं।

    पिछले दिनों यथास्थिति का आदेश कोर्ट से हटने के बाद अब चयनितों को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से जारी पैनल पर एडवाइजरी जारी होने की प्रतीक्षा है। असिस्टेंट प्रोफेसर की बीएड विषय की 2022 की विज्ञापन संख्या 51 की भर्ती लेकर दाखिल याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन होने से चयन प्रक्रिया ठप है।

    शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अलग न्यायालय बनाया जाना चाहिए, ताकि लंबित मामलों की निस्तारण जल्द हो। जब बाल न्यायालय, राजस्व न्यायालय, श्रम न्यायालय की व्यवस्था है तो शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए भी अलग व्यवस्था होनी चाहिए।
    - डॉ. शैलेश कुमार पाण्डेय, वर्ष 2013 की प्रधानाचार्य भर्ती में चार मंडलों प्रथम वरीयता पर चयनित।

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) की बैठक में शिक्षक भर्ती से जुड़े मुकदमों के निस्तारण को लेकर अलग व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी। समय से भर्तियां पूरी कराए जाने के लिए अलग कोर्ट बनाकर सुनवाई किया जाना आवश्यक है। इससे अभ्यर्थियों को लंबी लड़ाई नहीं लड़नी पड़ेगी।
    - डॉ. हरिप्रकाश यादव, प्रधानाचार्य एवं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रांतीय संरक्षक

    एक भर्ती के बाद दूसरी भर्ती आने में 12 वर्ष से ज्यादा का समय लगना प्रतियोगियों के हित में नही है। यदि सुनवाई को लेकर अलग व्यवस्था होती तो वर्ष 2013 की भर्ती अब तक पूर्ण हो गई होती। अब चयन आयोग को चाहिए कि इस भर्ती के जारी पैनल पर एडवाइजरी करे, ताकि भर्ती पूरी हो सके।
    - डॉ. संतोष शुक्ल, प्रधानाचार्य एवं महामंत्री राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ।

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