झटकों के बीच भी बनाए रखेगा संतुलन सेल्फ-बैलेंसिंग स्कूटर रोबोट, IIIT Allahabad के शोधार्थियों ने विकसित की है तकनीक
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) प्रयागराज के शोधकर्ताओं ने एक सेल्फ-बैलेंसिंग द्विपाद स्कूटर रोबोट विकसित किया है। यह रोबोट दो पहियों पर चलते ...और पढ़ें

सेल्फ बैलेंसिंग द्विपाद स्कूटर रोबोट के साथ आइआइआइटी इलाहाबाद के डॉ. सूर्य प्रकाश और दल में शामिल छात्र। सौ. शोधकर्ता
HighLights
संस्थान के सेंटर आफ इंटेलीजेंट रोबोटिक्स के छात्र व की टीम का कारगर प्रयास
बैलेंसिंग क्षमता को और अधिक स्थिर तथा विश्वसनीय बनाने पर अनुसंधान जारी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। रोबोटिक्स की दुनिया तेजी से ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां मशीनें केवल तय निर्देशों का पालन नहीं करेंगी, वे इंसानों की तरह अपने आसपास के वातावरण के अनुसार खुद को ढाल भी सकेंगी। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइआइटी) शोधकर्ताओं ने एक ऐसा सेल्फ-बैलेंसिंग द्विपाद (बाइपेडल) स्कूटर रोबोट का प्रोटोटाइप विकसित किया है, जो दो पहियों पर खड़े होकर चलते समय अपना संतुलन स्वयं बनाए रखता है और अचानक लगने वाले झटकों या असमतल सतह पर भी गिरने से बच जाता है।
रोबोट स्कूटर पारंपरिक मशीनों से अलग : डॉ. सूर्य प्रकाश
यह अभिनव परियोजना संस्थान के सेंटर आफ इंटेलीजेंट रोबोटिक्स के छात्र स्मित और उनकी टीम ने डॉ. सूर्य प्रकाश के निर्देशन में विकसित की है। डॉ. सूर्य प्रकाश के अनुसार यह रोबोट स्कूटर पारंपरिक मशीनों से अलग है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसके पैर हैं, जो लगातार अपनी लंबाई और मुद्रा (पोश्चर) बदल सकते हैं। इसमें लगे पहिए की मदद से रोबोट की चाल एक जीवंत और बुद्धिमान एक्सोस्केलेटन जैसी प्रतीत होती है।
रोबोट का नियंत्रण एसटीएम-32 आधारित कंट्रोलर से
रोबोट को धक्का लगे या जमीन अचानक बदल जाए, तो यह तुरंत अपने पैरों और पहियों के माध्यम से बल का पुनर्वितरण कर झटके को अवशोषित करफिर से संतुलित हो जाता है। रोबोट का पूरा नियंत्रण एक एसटीएम-32 आधारित कंट्रोलर से होता है। इसके इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट (आइएमयू) सेंसर लगातार रोबोट की स्थिति, झुकाव और गति की जानकारी देते रहते हैं। इन आंकड़ों के आधार कंट्रोल एल्गोरिद्म हर पल संतुलन बनाए रखने का कार्य करता है।
ऐसे नियंत्रित होता है रोबोट
रोबोट के पैरों में विशेष मोटर लगाए गए हैं, जो पैरों की लंबाई और कोण को अत्यंत सटीकता से नियंत्रित करते हैं। वहीं इसके दोनों पहियों में डीसी मोटर और एन्कोडर लगे हैं, जो गति और दिशा का सटीक नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं। इन सभी प्रणालियों के समन्वय से रोबोट चलते समय लगातार अपने गुरुत्व केंद्र को समायोजित करता रहता है। डा. सूर्य प्रकाश के अनुसार इसका संतुलन समय 15 सेकेंड है। बैलेंसिंग क्षमता को और अधिक स्थिर तथा विश्वसनीय बनाने के लिए अलग-अलग सड़क परिस्थितियों, भार और गति पर व्यापक परीक्षण किए जा रहे हैं।
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झटकों को करता है अवशोषित
इस रोबोट की एक और बड़ी विशेषता इसकी झटकों को सहने की क्षमता है। चलते समय इसे अचानक धक्का लगे या रास्ते में कोई बाधा आने पर इसके पैर तुरंत अपनी स्थिति बदलकर पूरे शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव को कम कर देते हैं। इससे रोबोट संतुलित रहता है। यह क्षमता ही इसे पारंपरिक दो पहिया रोबोटों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाती है। शोधकर्ता के अनुसार तकनीक भविष्य के ह्यूमनाइड रोबोटों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऐसे रोबोट उद्योगों, अस्पतालों, गोदामों, आपदा राहत कार्यों और मानव सहायता से जुड़े अनेक क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। यह तकनीक आने वाले वर्षों में स्वायत्त रोबोट, स्मार्ट एक्सोस्केलेटन और अगली पीढ़ी के मानव-सहायक रोबोटों का आधार बनेगी।