Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    इलाहाबाद HC के जज यशवंत वर्मा का इस्तीफा, घर में 'जले हुए नोट' मिलने के बाद से विवादों से घिरे थे

    Updated: Fri, 10 Apr 2026 12:31 PM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया है। वे अपने आवास पर कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी मिलने क ...और पढ़ें

    HighLights

    1. जस्टिस यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से इस्तीफा दिया।

    2. नकदी मिलने के विवादों के कारण जांच का सामना कर रहे थे।

    3. राष्ट्रपति को भेजा अपना त्यागपत्र, विवादों से घिरा कार्यकाल।

    डिजिटल डेस्क, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को भेज दिया है।

    जस्टिस वर्मा मार्च 2025 में अपने आवास पर कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी पाए जाने के बाद से ही विवादों के घेरे में थे।

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, जस्टिस यशवंत वर्मा को हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय से वापस उनके मूल कैडर इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था।

    यह तबादला उनके आवास पर मिली संदिग्ध नकदी से जुड़े विवादों और शिकायतों के बाद किया गया था।

    उन्होंने 5 अप्रैल, 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में दोबारा शपथ ली थी, लेकिन उनके खिलाफ चल रही जांच ने उनका पीछा नहीं छोड़ा।

    यह भी पढ़ें- जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच पैनल में बदलाव, कैश कांड मामले में होगी आरोपों की जांच 

    images (1)

    आवास से मिली थीं नोटों की गड्डियां

    जस्टिस वर्मा जब दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश थे, तब 14 मार्च 2025 को देर शाम उनके दिल्ली के सरकारी आवास में आग लग गई थी और आग बुझाने पहुंचे अग्निशमन दस्ते को उनके घर के स्टोर रूम में भारी मात्रा में जले हुए नोटों की गड्डियां मिली थीं।

    घटना के वक्त जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे, वे मध्य प्रदेश में थे। उनका स्थानांतरण इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया। यहां भी उनका जमकर विरोध हुआ था। इसका परिणाम यह हुआ था, उन्हें केसों की सुनवाई से अलग रखा गया था।

    हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने विरोध किया था। फ़िलहाल आरोपों के संबंध में एक आंतरिक जांच लंबित बताई जाती है। इस मामले के सामने आने के बाद ही न्यायमूर्ति को इस्तीफा देने की सलाह दी गई थी। महाभियोग के माध्यम से हटाए जाने पर सभी सुविधाओं से वंचित होना पड़ता। अब पूर्व न्यायमूर्ति को मिलने वाली सुविधाएं पेंशन अनुमन्य होंगी। वकालत भी कर सकेंगे।

    यह भी पढ़ें- फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला, लोकसभा और राज्यसभा महासचिव को नोटिस जारी

    justice-yashwant-varma-supreme-court-1765902218057_v

    मामला सामने आने पर सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा के घर नगदी मिलने की मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय आंतरिक जांच कमेटी गठित की थी और कमेटी ने रिपोर्ट में पहली निगाह में आरोपों में दम पाया था। 

    खबरें और भी

    चीफ जस्टिस खन्ना ने इस्तीफा देने को कहा था

    चीफ जस्टिस खन्ना ने रिपोर्ट आने के बाद जस्टिस वर्मा से इस्तीफा देने को कहा था, लेकिन जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा नहीं दिया था। हालांकि उनका न्यायिक कामकाज वापस ले लिया गया था और उनका दिल्ली से इलाहाबाद हाई कोर्ट स्थानांतरण कर दिया गया।

    जस्टिस खन्ना ने आंतरिक जांच रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी थी। इसके बाद लोकसभा के 146 सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा था। जिसे स्वीकार करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने जांच कमेटी गठित की थी। 

    यह भी पढ़ें- जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज, महाभियोग और संसदीय जांच का रास्ता साफ

    यह भी पढ़ें- 'मेरे खिलाफ महाभियोग क्यों?' संसदीय समिति के सामने बोले जस्टिस यशवंत वर्मा