कौशांबी का अथसराय रेलवे स्टेशन बनेगा अत्याधुनिक ‘गुड्स शेड हब’, देश भर में महकेगा इलाहाबादी अमरूद व दोआबा का केला
कौशांबी का अथसराय रेलवे स्टेशन अत्याधुनिक 'गुड्स शेड हब' बनेगा, जिससे प्रयागराज के अमरूद और कौशांबी के केले जैसे कृषि ...और पढ़ें

कौशांबी अथसराय रेलवे हब: किसानों के लिए वरदान साबित होगा। जागरण आर्काइव
HighLights
किसानों के लिए वरदान होगी रेलवे की पहल, खेत से देश के बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच होगी
उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) की इस कृषि प्रधान बेल्ट को सीधे नेशनल फ्रेट नेटवर्क से जोड़ने की पहल
अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। प्रयागराज के सुर्खा अमरूद की मिठास और कौशांबी के जी-नाइन केले का स्वाद अब सिर्फ स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने इस कृषि प्रधान बेल्ट को सीधे नेशनल फ्रेट नेटवर्क से जोड़ने की पहल की है। इसके लिए कौशांबी के अथसराय रेलवे स्टेशन को एक अत्याधुनिक ‘गुड्स शेड हब’ के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
सिराथू में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू
सिराथू तहसील के हिसामपुर माढ़ो गांव में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह परियोजना इस क्षेत्र के किसानों के लिए सिर्फ एक रेलवे साइडिंग ही नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि का नया गेटवे साबित होगी।
ट्रांसपोर्टेशन खर्च में 60 से 70% की बचत
अब तक किसानों और आढ़तियों की सबसे बड़ी मजबूरी सड़क मार्ग (ट्रक) पर निर्भरता रही है। ट्रक से लंबी दूरी का माल भेजने पर डीजल, टोल टैक्स और बिचौलियों के कारण लागत आसमान छू जाती है।
सड़क मार्ग से माल ढुलाई खर्च: आज 100 से 150 किमी दूर लखनऊ या वाराणसी तक एक टन माल ट्रक से ले जाने में लगभग 1,200 से 1,500 रुपये का खर्च आता है।
रेल मार्ग का किराया: रेलवे फ्रेट (गुड्स शेड/ किसान पार्सल) के जरिए उतने ही खर्च (1,200 से 1,500 रुपये) में किसान अपना एक टन उत्पाद प्रयागराज/कौशांबी से 1,000 से 1,500 किमी दूर मुंबई, दिल्ली, सिलीगुड़ी या गुवाहाटी तक पहुंचा सकेंगे।
प्रति किलो भाड़े का फर्क: जहां ट्रक से लंबी दूरी का भाड़ा सात से 10 रुपये प्रति किलो बैठता है, वहीं रेलवे गुड्स शेड और पार्सल वैन के जरिए यह घटकर मात्र 2.50 से चार प्रति किलो रह जाता है।
अनुमानित रेलवे माल-भाड़ा: एक नजर में
गंतव्य- अनुमानित दूरी (किमी) - सड़क मार्ग भाड़ा- रेलवे गुड्स शेड भाड़ा- बचत (प्रति क्विंटल)
-दिल्ली/एनसीआर - 650 - 350 - 450 रुपये - 130 - 180रुपये - 250 रुपये
कोलकाता/हावड़ा - 800 - 450 - 550 रुपये - 160 - 220 रुपये - 300 रुपये
मुंबई/गुजरात - 1,400 - 700 - 900 रुपये - 250 - 350 रुपये - 500 रुपये
गुवाहाटी (पूर्वोत्तर) - 1,250 - 750 – 950 रुपये - 240 – 340 रुपये - 550 रुपये
खराब होने का डर नहीं, सीधे पहुंचेंगे ताजे फल
केला, अमरूद, टमाटर और हरी मिर्च जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों के साथ समय सबसे बड़ा दुश्मन होता है।
सड़क पर जाम, गाड़ियों के पलटने या रास्ते में देरी से कई बार 20 से 30% फसल रास्ते में ही सड़ जाती थी।
अथसराय गुड्स शेड पर आधुनिक शेड, वेंटिलेटेड स्टोरेज और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था होगी।
सुपरफास्ट मालगाड़ियों और विशेष किसान पार्सल ट्रेनों के जरिए माल 24 से 36 घंटे के भीतर बिना किसी नुकसान के मेट्रो शहरों के सुपरमार्केट्स में पहुंच जाएगा।
नगदी फसल व पारंपरिक अनाजों को खुला मंच
यह हब सिर्फ फलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे इलाके के कृषि स्वरूप को बदल देगा:
पारंपरिक फसलें: धान, गेहूं, सरसों और आलू की थोक रेक लोड होकर सीधे दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत भेजी जा सकेंगी।
सब्जियां व मसाले: कौशांबी और कछारी इलाकों के टमाटर, बैंगन, फूलगोभी, हरी मिर्च और अदरक की बड़े स्तर पर लोडिंग होगी।
खाद और बीज की सुलभता: गुड्स शेड केवल माल बाहर भेजने का ही नहीं, बल्कि बाहर से सस्ती डीएपी, यूरिया और बीज की सीधी रैक मंगाने का भी केंद्र बनेगा, जिससे इलाके में खाद की किल्लत पूरी तरह खत्म होगी।
बिचौलियों की छुट्टी, किसानों को सीधा मुनाफा
अब तक स्थानीय आढ़तिए किसानों से यह कहकर औने-पौने दाम पर फसल खरीद लेते थे कि "आगे भाड़ा बहुत ज्यादा है और माल खराब होने का रिस्क है।" अथसराय हब बनने के बाद किसान समूह और छोटे व्यापारी सीधे अपनी बोगी या रैक बुक कर सकेंगे। इससे बिचौलियों का नेटवर्क टूटेगा और फसल का सही मूल्यांकन सीधे किसान के बैंक खाते में दिखेगा।
इलाके में आएगा रोजगार और लाजिस्टिक्स का बूम
अथसराय और आसपास का पूरा ग्रामीण इलाका एक बड़े कमर्शियल सेंटर के रूप में उभरेगा:
हिसामपुर माढ़ो और आसपास के गांवों में लोडिंग-अनलोडिंग, पैकेजिंग, ग्रेडिंग और बारकोडिंग के काम में हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
निजी वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट ढाबे और वाहन मरम्मत केंद्रों की स्थापना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भारी उछाल आएगा।
अधिग्रहण के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू होगा
उत्तर मध्य रेलवे की गति शक्ति यूनिट और कौशांबी जिला प्रशासन इस प्रोजेक्ट को मिशन मोड पर आगे बढ़ा रहे हैं। जमीन अधिग्रहण पूरा होते ही इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू होगा, जो प्रयागराज और कौशांबी की धरती को देश के बड़े एग्री-एक्सपोर्ट कारिडोर से हमेशा के लिए जोड़ देगा।
