एसआरएन अस्पताल में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट के घायल तड़पते रहे, चीखते रहे लोग; पुलिस बोली...आदेश आने दो
प्रयागराज की मनौरी पटाखा फैक्ट्री में धमाके के बाद पुलिस-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ...और पढ़ें

एसआरएन अस्पताल में बैठे अरविंद कुमार।
HighLights
मनौरी की पटाखा फैक्ट्री में धमाके बाद पुलिस-प्रशासन का दिखा लापरवाही वाला रवैया
प्रत्यक्षदर्शियों व पीड़ितों के परिजनों ने कहा, चारपाई पर लोडर से लेकर पहुंचाया अस्पताल
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। घटना को करीब एक घंटे हो चुके थे। हर तरफ धुआं-धुआं था। मलबे में दबे कुछ लोग तड़प रहे थे। कुछ तो मरणासन्न थे। घायलों को बचाने के लिए ग्रामीण मदद मांगते रहे। चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन वहां मौजूद पुलिस आदेश का इंतजार कर रही थी। यह आरोप है कि बमरौली निवासी अरविंद कुमार ने।
प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में मिले अरविंद कुमार के आंसू थम नहीं रहे थे। उन्होंने बताया कि मनौरी में मंजीत सिंह के यहां उनका ननिहाल है। पटाखा फैक्ट्री धमाके में मंजीत का घर भी ध्वस्त हो गया। बच्चों व महिलाओं सहित कई लोग दब गए। जिस वक्त घटना हुई उस समय वह बमरौली में थे।

सूचना मिलते ही 20 मिनट के अंदर मनौरी पहुंच गए। वहां पहले से ही पुलिस मौजूद थी। एंबुलेंस भी बुला ली गई थीं, लेकिन ग्रामीण ही मलबे में दबे लोगों को निकाल रहे थे। पहुंचने के बाद उन्होंने भी पीड़ितों को बचाना शुरू कर दिया।

अरविंद का आरोप है कि वहां पर मौजूद पुलिस कर्मियों से मदद मांगी, लेकिन कोई आगे नहीं आया। जैसे-तैसे ग्रामीणों ने सविता, उर्वशी, प्रांजलि सहित कुछ लोगों को मलबे से निकाला। इसके बाद जब अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली।
ग्रामीणों ने चारपाई पर घायलों को लिटाया। एक लोडर में घायलों को चारपाई सहित लेकर एसआरएन अस्पताल पहुंचे। अरविंद ने राहत के कार्य में लगे पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
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