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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 30, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Earthquake Alert System: पूर्वोत्तर भारत के लिए भूकंप अलर्ट प्रणाली बना रहा MNNIT, मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर से होगा बचाव

    Updated: Sun, 30 Mar 2025 02:44 PM (IST)

    पूर्वोत्तर भारत भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। इसरो ने MNNIT-IISER मोहाली के वैज्ञानिकों को भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने के ल ...और पढ़ें

    भूकंप से बचने के लिए बनाया जाएगा यंत्र। जागरण
    भूकंप से बचने के लिए बनाया जाएगा यंत्र। जागरण

    HighLights

    1. इसरो ने भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने के लिए MNNIT-IISER को सौंपी परियोजना
    2. शोध से पता चलेगा कि किन इलाकों में भूकंप का खतरा ज्यादा

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। पूर्वोत्तर भारत भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। वहां भूगर्भीय हलचल जिससे भूकंप का खतरा बना रहता है। ऐसे में अगर धरती के नीचे हलचल शुरू होते ही हमें इसका संकेत मिल जाए, तो हम समय रहते खुद को सुरक्षित कर सकते हैं।

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब इस सवाल का जवाब ढूंढने के बेहद करीब है! इसरो ने विज्ञानियों को एक नई वैज्ञानिक परियोजना को मंजूरी दी है, जिससे पूर्वोत्तर भारत में भूकंप के खतरे को पहले से पहचानकर जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इस खास प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआइटी) के डा. राम जी द्विवेदी और (आइआइएसईआर) पुणे के डा. चंद्रकांत ओझा।

    मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में भूगणित केंद्र के प्रभारी डॉ रंजीत द्विवेदी कहते हैं कि इस परियोजना में दो उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। पहला ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम जो जीपीएस की तरह काम करती है और धरती की मामूली से मामूली हरकत को रिकॉर्ड करती है। दूसरी मल्टी-टेम्पोरल सैटेलाइट एसएआर इंटरफेरोमेट्री (एमटी-इनसार), जिससे उपग्रह से ली गई तस्वीरों की तुलना कर यह देखा जाता है कि जमीन कितनी हिली है और कहां खतरा बढ़ सकता है।

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    डा. राम जी द्विवेदी, मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान।


    डॉ राम जी द्विवेदी कहते हैं कि अगर जमीन में असामान्य हलचल शुरू होती है, तो वैज्ञानिक इसे पहले से पकड़ सकते हैं और लोगों को अलर्ट कर सकते हैं। इस रिसर्च से यह पता चलेगा कि किन इलाकों में भूकंप का खतरा ज्यादा है, जिससे वहां मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया जा सकेगा। विज्ञानियों ने साझा शोध से इस प्रणाली के विकास में कदम बढ़ा दिया है।

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    परियोजना की सफलता से ना केवल पूर्वोत्तर में भूकंप पूर्व अलर्ट किया जा सकेगा, साथ ही यह भारत के अन्य भूकंप-प्रभावित इलाकों में भी लागू की जा सकती है, जिससे लाखों लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी। इसरो की यह पहल विज्ञान और आम जनता दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

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    राम जी कहते हैं कि तकनीक विकसित की जा रही है और यह भूकंप का सटीक पूर्वानुमान कर सकेगी और इससे समय रहते अलर्ट होने से जनहानि को कम किया जा सकेगा।

    आइआइएसईआर पुणे के डा. चंद्रकांत ओझा। सौ. शोधकर्ता


    राहत एजेंसियों को तुरंत मिलेगा अलर्ट

    सरकार और राहत एजेंसियों को पहले से जानकारी मिल जाएगी, जिससे वे भूकंप के प्रभाव को कम करने की रणनीति बना सकेंगी।भूकंप से पहले चेतावनी मिल जाए, तो प्रशासन सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने और राहत सामग्री की व्यवस्था करने में तेजी ला सकता है।