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    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित करीब 906 समूहों को बजट का इंतजार, कैसे स्वावलंबी बने महिलाएं?

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Mon, 02 Feb 2026 04:37 PM (IST)

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित 906 समूहों को बजट का इंतजार है। पहले शासन की स्वीकृति में देरी हुई, अब एसएनए स्पर्ष पोर्टल की गड़बड़ी स ...और पढ़ें

    प्रयागराज के 906 स्वयं सहायता समूहों को बजट का इंतजार है।

    प्रयागराज के 906 स्वयं सहायता समूहों को बजट का इंतजार है।

    HighLights

    1. आरएफ के तहत 30 हजार और सीआइएफ के तहत दिए जाते हैं 1.50 लाख रुपये

    2. शासन से मंजूरी मिली तो एसएनए स्पर्ष पोर्टल की गड़बड़ी रुकावट बन गई है

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित करीब 906 स्वयं सहायता समूहों को बजट नहीं मिला है। पहले तो इन्हें शासन की स्वीकृति का इंतजार था। अब मंजूरी मिली तो एसएनए स्पर्ष पोर्टल की गड़बड़ी इसमें रुकावट बन गई है। पोर्टल के काम न करने के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा है।

    समूहों को आरएफ के तहत रुपये मिलने हैं

    गांवों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए यह मिशन चलाया जा रहा है। इसके तहत गठित होने वाले महिलाओं के हर स्वयं सहायता समूहों को रिवाल्विंग फंड (आरएफ) व सामुदायिक निवेश फंड (सीआइएफ) मिलता है। आरएफ में 30 हजार तो सीआइएफ में 1.50 लाख रुपये दिए जाते हैं, ताकि समूह से जुड़ी महिलाओं की पैसों की छोटी-मोटी जरूरत पूरी हो सके। लगभग 456 स्वयं सहायता समूहों को आरएफ के तहत करीब 1.36 करोड़ रुपये मिलने हैं।

    शासन से स्वीकृति पर भी भुगतान नहीं 

    इसी तरह 450 समूहों को 6.75 करोड़ रुपये का भुगतान होना है। कई महीने पहले इनके प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। पहले तो वहां से स्वीकृति में काफी लेटलतीफी हुई। अब स्वीकृति मिली है तो भी भुगतान नहीं हो पा रहा है। जबकि, समूहों से जुड़ी महिलाएं लगातार बजट की मांग कर रही हैं। उपायुक्त एनआरएलएम अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि पोर्टल के काम न करने की वजह से भुगतान समूहों के खाते में नहीं आ पा रहा है। उम्मीद है कि जल्द भुगतान हो जाएगा।

    अब सीधे रिजर्व बैंक से आना है बजट

    विभागीय अधिकारी बताते हैं कि पहले समूहों का बजट प्रदेश स्तर पर आता था। फिर, वहां से समूहों को भुगतान होता था। यह पैसा समूहों के बैंक एकाउंट में आता था। अब इसमें कुछ बदलाव हुए हैं। शासन से स्वीकृति आदि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद समूहों का बजट रिजर्व बैंक से सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचेगा।

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