पहली गलती में सुधार का मौका, दोहराने पर आठ और तीसरी बार 20 गुना जुर्माना; विधिक माप विज्ञान विभाग के नियमों में बड़ा बदलाव
विधिक माप विज्ञान विभाग के नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है, जिसमें पैकेट कम्युनिटी रूल के उल्लंघन पर पहली गलती पर चेतावनी और दोहराने पर भारी जुर्माना लगे ...और पढ़ें

बाट-माप के नए नियम जान लें, बार-बार नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना लगेगा।
HighLights
विधिक माप विज्ञान विभाग में जन विश्वास अधिनियम लागू होने से बदल जाएगी व्यवस्थाएं
नई व्यवस्था को केंद्र सरकार से मिल चुकी है हरी झंडी, प्रदेश स्तर पर बन रही गाइडलाइन
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। विधिक माप विज्ञान विभाग के नियमों में भारी बदलाव होने जा रहे हैं। पैकेट कम्युनिटी रूल (पीसीआर) के उल्लंघन की पहली गलती पकड़ी गई तो कंपनी को सिर्फ चेतावनी मिलेगी। सुधार का अवसर देते हुए न जुर्माना लगाया जाएगा और न ही वाद दायर होगा। यदि वही गलती दोहरा दी गई तो आठ गुना तक जुर्माना लगेगा। तीसरी बार फिर वही गलती मिलने पर 20 गुना तक जुर्माने का दंड उत्पाद निर्माता कंपनियों को झेलना पड़ सकता है।
पैकिंग उत्पादों के रैपर पर ब्योरा दर्ज होना जरूरी
पैकेट कम्युनिटी रूल (पीसीआर) के तहत पैकिंग वाले उत्पादों के रैपर पर मैक्सिमम रिटेल प्राइस (एमआरपी), नेट वेट, बैच नंबर, कंपनी का नाम और पता आदि ब्योरा दर्ज होना आवश्यक है। इसके बगैर कोई भी कंपनी अपने उत्पाद बाजार में नहीं ला सकती। केंद्र सरकार के जन विश्वास अधिनियम के तहत यह व्यवस्था दी गई हैं।
राज्य स्तर पर इसकी गाइडलाइन तैयार की जा रही
उद्यमियों और उपभोक्ताओं की सहूलियतों के लिए केंद्र सरकार ने इसमें संशोधन किया था, जिसे अब प्रदेश स्तर से जनपदों में लागू करने की तैयारी है। राज्य स्तर पर इसकी गाइडलाइन तैयार की जा रही है। विधिक माप विज्ञान विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक संजय कुमार सरोज ने बताया कि अभी तक पीसीआर के मानकों का उल्लंघन मिलने पर कंपनी का चालान किया जाता था। इसमें 25 से 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाता था।
गलतियों पर कितना लगेगा जुर्माना?
नए नियमों के अमल के बाद पहली गलती पर कंपनी को कमियों से अवगत कराया जाएगा। उन्हें दूर कराने का मौका दिया जाएगा। दूसरी बार उसी गलती के मिलने पर दो लाख रुपये और तीसरी बार में पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।
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व्यवस्था में और पारदर्शिता लाएगा नया पोर्टल
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन की ओर से एक नया पोर्टल भी बनवाया जा रहा है। विभाग की ओर से की जाने वाली कार्रवाईयों का पूरा ब्योरा इसमें अपलोड किया जाएगा। इससे निगरानी की व्यवस्था और मजबूत होगी। कंपनियों पर पूर्व में हुई कार्रवाईयों को भी देखा जा सकेगा।
शहर बदलने के बाद भी नहीं बचेंगी कंपनियां
राष्ट्रीय स्तर की तमाम कंपनियां ऐसी हैं, जिनका व्यापार अलग-अलग प्रदेश, जिले और शहरों तक फैला है। यदि प्रयागराज में ऐसी किसी कंपनी के उत्पाद में कमी मिली तो पहली गलती होने के कारण यहां उसे छूट मिल गई। यही गलती किसी दूसरे जिले या शहर में सामने आई, तो कंपनी जुर्माने के दायरे में आ जाएगी।