प्रयागराज की चारों SOG भंग, ड्रग पकड़ने में यहां की पुलिस फेल; मुंबई क्राइम ब्रांच ने करोड़ों की MD Drug पकड़ी थी
प्रयागराज में मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा करोड़ों की एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद पुलिस आयुक्त ने जिले की ...और पढ़ें

मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा प्रयागराज में करोड़ों की एमडी ड्रग पकड़े जाने के बाद यहां की चारों एसओजी यूनिट को भंग कर दिया गया है।
HighLights
इस मामले में पुलिस अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं
तीन सितंबर की रात कार्रवाई से पुलिसकर्मियों में खलबली
मुखबिर संग सभी तंत्र हुए फेल, 8 माह से चल रही थी फैक्ट्री
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। जनपद में पहली बार तीन सितंबर की देर रात एक ऐसी कार्रवाई हुई, जिसने पुलिसकर्मियों में खलबली मचा दी है। पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया ने जिले की चारों एसओजी को भंग कर दिया। इसके पीछे कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन तीन सितंबर को मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा मांडा के कोसड़ा कला गांव में करोड़ों की पकड़ी गई एमडी ड्रग को लेकर कार्रवाई की चर्चा है।
पुलिस आयुक्त ने की बड़ी कार्रवाई
पुलिस आयुक्त ने तीन सितंबर देर रात को सेंट्रल, नगर, गंगानगर व यमुनानगर की एसओजी को भंग कर दिया। सेंट्रल एसओजी में प्रभारी समेत 11, नगर में प्रभारी समेत 14, गंगानगर में प्रभारी समेत दस व यमुनानगर में प्रभारी समेत नौ पुलिसकर्मी तैनात थे। इन सभी को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने पुलिस उपायुक्त को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए।
चारों एसओजी टीमों को भंग करने का कारण स्पष्ट नहीं
अचानक इन चारों टीमों को भंग किन कारणों से किया गया, यह स्पष्ट नहीं किया गया, लेकिन चर्चा रही कि मांडा के कोसड़ा कला गांव में चल रही एमडी ड्रग फैक्ट्री के बारे में किसी प्रकार की जानकारी न होना इन टीमों की असफलता रही। जनवरी से यह फैक्ट्री संचालित हो रही थी और इन चारों टीमों को इसकी भनक तक नहीं लगी। मुंबई क्राइम ब्रांच ने इसका राजफाश किया।
कई और पर गिरेगी कार्रवाई की गाज
कोसड़ा कला गांव में पकड़ी गई एमडी ड्रग फैक्ट्री की गाज अभी और पुलिसकर्मियों पर गिरेगी। सूत्रों की मानें तो इसके लिए पुलिस अधिकारी सूची तैयार कर रहे हैं। इसकी जद में मांडा के साथ ही आसपास के थानों में तैनात पुलिसकर्मी भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
मुंबई पुलिस का गुडवर्क, सवालों के घेरे में जिले की पुलिस
यमुनापार में मांडा के कोसड़ा कला गांव में एक-दो दिन से नहीं बल्कि आठ माह से एमडी ड्रग फैक्ट्री का संचालन हो रहा था। वह भी कोई छिपकर नहीं बल्कि खुले आसमान के नीचे। आश्चय्र की बात यह थी कि मांडा थाने के साथ ही संबंधित चौकी और बीट सिपाहियों को भी इसकी भनक तक नहीं लगी। ड्रग यह तैयार होता रहा और इसकी सप्लाई भी बेधड़क होती रही। मुंबई क्राइम ब्रांच अगर इसका राजफाश न करती तो यह फैक्ट्री आगे भी बदस्तूर संचालित होती रहती। जिले की पुलिस की एक तौर पर यह बड़ी विफलता है। वह यहां सोती रही और मुंबई पुलिस एक बड़ा गुडवर्क करके चली गई। साथ ही यहां की पुलिस की कार्यप्रणाली को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया।
पुलिस को क्यों इसकी भनक नहीं लगी?
एमडी ड्रग फैक्ट्री गांव से बाहर चल रही थी। तस्करों ने बकायदा शेड बनवा रखा था। उसके भीतर ड्रग बनाने के उपकरण रखे थे। ऐसा नहीं था कि पुलिसकर्मी कभी उधर नहीं जाते थे, वह जाते थे और शेड को देखते भी थे, लेकिन कभी उन्होंने यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर वीरान में यह शेड किसने और किसलिए बनवाया है। अब एमडी ड्रग फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद उनको क्यों इसकी भनक नहीं लगी, इसका जवाब उनके पास नहीं है। वजह यह है कि उनके सभी तंत्र ध्वस्त हो चुके हैं। सूचना तंत्र विफल साबित हुआ है। अपराधियों को दूर-दूर से पकड़कर लाने वाली एसओजी और जिले की पुलिस के नाक के नीचे इसका बड़ा खेल चल रहा था और उसको इसकी आहट तक न मिलना पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहा है।
