नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को गर्भ समापन की मिली अनुमति, प्रयागराज जिला न्यायालय का अहम फैसला
प्रयागराज जिला न्यायालय ने 16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि महिला को अपने शरीर और प्रजनन संबंधी मामलों में निर्ण ...और पढ़ें

प्रयागराज जिला न्यायालय ने दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग को गर्भ समापन की अनुमति दी है।
HighLights
कोर्ट ने कहा- महिला को अपने शरीर के बारे में निर्णय लेने का अधिकार
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता लगभग सात सप्ताह की गर्भवती थी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। जिला न्यायालय ने 16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को गर्भ समापन की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि किशोरी को अपने शरीर और प्रजनन संबंधी मामलों में निर्णय लेने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का अभिन्न अंग है।
न्यायालय के समक्ष विशेष लोक अभियोजक पाक्सो सविता पाठक ने मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके अनुसार पीड़िता लगभग सात सप्ताह की गर्भवती थी। जिला महिला चिकित्सालय के रेडियोलाजी एवं अल्ट्रासाउंड विभाग द्वारा 19 मार्च 2026 को किए गए अल्ट्रासाउंड परीक्षण में जुड़वा (ट्विन) गर्भ की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट में दोनों भ्रूण जीवित पाए गए।
मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू कनौजिया ने कहा कि किसी महिला का अपने शरीर के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार, विशेष रूप से प्रजनन संबंधी मामलों में, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। अदालत ने कहा कि नाबालिगों और अवांछित गर्भावस्था के मामलों में इस अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध नहीं लगाए जा सकते, अन्यथा यह अधिकार निरर्थक हो जाएगा।
जिला न्यायालय ने इस मामले में कहा कि पीड़िता के परिवारवालों ने गर्भ की जानकारी विवेचक को नौ मई 2026 को ही दे दी थी। इसके बाद भी उनकी ओर से गर्भ समापन को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई।