गंगा चढ़ी-जंगल सिमटे और गांव तक पहुंचा तेंदुआ, प्रयागराज में गंगापार के ग्रामीण क्षेत्रों में सालभर में 10 बार आ चुके
प्रयागराज के झूंसी क्षेत्र के मलखानपुर में एक सितंबर को देर रात तेंदुआ सीसीटीवी में कैद हुआ, जिससे ग्रामीणों में ...और पढ़ें

सरायइनायत के धनैचा-मलखानपुर में एक सितंबर की देर रात विचरण करता तेंदुआ।
HighLights
एक सितंबर की देर रात मलखानपुर में दिखा
सीसीटीवी में कैद हुई तेंदुए की चहलकदमी
सूर्य प्रकाश तिवारी, प्रयागराज। गंगापार के झूंसी में तेंदुए की यह सिर्फ एक और दस्तक नहीं है। यह उस बदलते भूगोल की तस्वीर है, जहां जंगल लगातार पीछे हट रहे हैं और जंगली जानवरों के रास्ते इंसानी बस्तियों तक आ रहे हैं। सरायइनायत के धनैचा-मलखानपुर में एक सितंबर की देर रात तेंदुआ घर के बाहर चहलकदमी करता कैमरे में कैद हुआ तो सुबह गांव की नींद दहशत में खुली।
एक तेंदुआ पकड़ा जा चुका है, एक की मौत
एक साल में गंगापार क्षेत्र में तेंदुए के दिखने की यह करीब 10वीं घटना है। इसी खौफ के बीच एक तेंदुआ पकड़ा जा चुका है, जबकि एक की मौत भी हो चुकी है। इस बार गंगा में आई बाढ़ ने करछना-छतनाग के बीच बसे टापू और उसके करीब तीन-चार किलोमीटर लंबे नदी किनारे को भी जलमग्न कर दिया है। ऐसे में आशंका है कि सुरक्षित ठिकाने की तलाश में तेंदुआ वहां से आबादी की ओर आया हो। दूसरी संभावना करीब 100 किलोमीटर दूर सीधी के जंगलों से इनके आवागमन की है।
तेंदुआ फिर दिखा तो दहशत में लोग
सरायइनायत के धनैचा मलखानपुर में आशुतोष मेमोरियल स्कूल के पास एक सितंबर की रात करीब 11 बजे तेंदुआ देखा गया। कुत्ते भौंकने लगे तो ग्रामीण घरों से निकल आए। खोजबीन होने लगी तो तेंदुआ दिखा। इससे दहशत फैल गई। संदीप यादव सहित अन्य लोगों ने लाठी लेकर दौड़ाया तो तेंदुआ झाड़ियों से होते हुए खेतों की तरफ भाग गया।
गंगापार में कई बार दिख चुका है तेंदुआ
संदीप यादव के भाई संजय यादव के घर में लगे सीसीटीवी में तेंदुआ दिखा। इससे धनैचा, मलखानपुर, कतवारूपुर, सुदनीपुर, बरईपुर, कोटवा, लीलापुर सहित अन्य गांव में दहशत है। बुधवार को वन विभाग के कर्मचारियों ने पहुंच कर तेंदुए को खोजना शुरू कर दिया। गंगापार के ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुआ दिखने की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
के जंगलों में तेंदुए ज्यादातर रहते हैं
बीते एक साल में सुदनीकला, मलखानपुर, झूंसी, छतनाग के आसपास तेंदुआ देखा गया। 10 जनवरी को छिवैया में एक तेंदुआ पकड़ा गया था। एक अप्रैल को मेजा तहरील क्षेत्र के दिघिया गांव के पास तेंदुआ की लाश मिली थी। वन विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश के जंगलों में तेंदुए ज्यादातर रहते हैं। यमुनापार के कोरांव, शंकरगढ़ के जंगल, मध्य प्रदेश से जुड़े हुए हैं।
किस रास्ते से आते हैं?
कसवारूपुर के पास गंगा नदी पार करते ही करछना शुरू हो जाता है, जहां से शंकरगढ़ करीब है। तेंदुए इसी रास्ते से आ रहे हैं क्योंकि, झूंसी से मप्र के जंगलों की दूरी करीब 100 किमी है। तेंदुआ प्रतिदिन लगभग 30 से 40 किमी तक जा सकता है। ऐसे उसके लिए यहां तक आना कठिन नहीं है।
इंसानों ने तोड़ दिया प्रकृति का बनाया चक्र
बरेली इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट से वन्य जीव विशेषज्ञ बताते हैं कि इंसानों ने प्रकृति से खिलवाड़ किया है। जंगल लगातार काटे जा रहे हैं। वन्य जीवों के रहने का प्राकृतिक स्थान घट रहा है। जबकि संरक्षण के कारण कई वन्य जीवाें का प्रजनन बढ़ा है। उनकी संख्या बढ़ रही है। तेंदुआ भी इनमें से एक है। नए ठिकाने व भोजन की तलाश में जंगली जानवर बाहर आ रहे हैं।
अनुमान है कि तेंदुए मध्य प्रदेश से आ रहे हैं। फिलहाल धनैचा में तेंदुआ दिखने की जानकारी मिली है। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है। टीमें लगाई गईं हैं। निगरानी बढ़ाई गई है।
- लक्ष्मीकांत दुबे, रेंजर, वन विभाग
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