प्रयागराज में संपत्ति की खरीद-फरोख्त के रिकार्ड की जांच होगी, बीते वर्षों में बैनामों में मिलीं खामियों के बाद सख्ती
प्रयागराज में संपत्ति की खरीद-फरोख्त के पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू हो गई है, क्योंकि बीते वर्षों में बैनामों में कई खामियां मिली हैं। जिलाधिकारी समेत ...और पढ़ें

प्रयागराज में अनियमितता रोकने के लिए रजिस्ट्री कार्यालयों से संबंधित विवरण जुटाए जाएंगे।
HighLights
संपत्ति सौदों की पैमाइश जिलाधिकारी के साथ ही एडीएम भी करेंगे, की जाएगी जांच
एआइजी स्टांप और उप निबंधक बैनामों की हर माह जांच करेंगे, खंगाले जाएगे रिकार्ड
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। बीते वर्षों के दौरान बैनामों में मिलीं खामियों को देखते हुए संपत्ति की खरीद-फरोख्त के रिकार्ड की जांच होगी। वित्तीय वर्ष 2021-22 से अब तक हुए संपत्ति सौदों के रिकार्ड की पड़ताल की जाएगी। इसके लिए स्टांप एवं निबंधन विभाग की विशेष टीम लगाई जा रही है। वहीं हाल-फिलहाल में हुए बैनामों की जांच डीएम, एडीएम वित्त, एआइजी स्टांप व उप निबंधक करेंगे।
अधिकारी संपत्ति का औचक निरीक्षण
संपत्तियों की रजिस्ट्री में बड़े पैमाने पर स्टांप चोरी के प्रकरण सामने आने पर यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब हर माह डीएम को पांच, एडीएम वित्त एवं राजस्व को 25, एआइजी स्टांप को 50 तथा प्रत्येक उप निबंधकों को 10-10 बैनामों की जांच करनी है। ये अधिकारी संबंधित संपत्ति का औचक निरीक्षण भी करेंगे, जहां निरीक्षण की वीडियोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।
विवरण के बाद जांच शुरू होगी
पहले जिले के रजिस्ट्री कार्यालयों से संबंधित विवरण जुटाए जाएंगे, जिसके बाद जांच शुरू होगी। अनियमितता मिलने पर लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। जमीन के बैनामे के समय संपत्ति के मूल्य के आधार पर टीडीएस देयता निर्धारित होती है। इसके लिए पैन कार्ड नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। कई संपत्ति के सौदों में इस बीच औपचारिकताओं का पालन नहीं किया जा रहा है। इसी लापरवाही को देखते हुए तहसीलों के रजिस्ट्री कार्यालयों का सर्वे भी कराया जाएगा।
संपत्ति सौदों के पुराने रिकार्ड की जांच शुरू
प्रयागराज में स्टांप चोरी के कई प्रकरण 10 वर्षों से लंबित हैं, जिनके निस्तारण के भी निर्देश दिए गए हैं। एआइजी स्टांप राकेश चंद्रा ने बताया कि संपत्ति सौदों के पुराने रिकार्ड की जांच शुरू हो गई है। संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में स्टांप कम लगाने पर नोटिस देकर अतिरिक्त स्टांप की वसूली की जाएगी। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों में वाद भी दायर कराया जाएगा।