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    प्रयागराज में दशकों से बंद मेजा, मऊआइमा व बांदा कताई मिल के बहुरेंगे दिन, उद्योग लगेंगे तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

    By Gyanendra Singh Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Thu, 05 Mar 2026 05:47 PM (IST)

    प्रयागराज में दशकों से बंद मेजा, मऊआइमा और बांदा कताई मिलों में फिर से उद्योग स्थापित होंगे। तीनों मिलों की जमीन यूपीसीडा को दी गई है, जहां औद्योगिक प ...और पढ़ें

    प्रयागराज में बंद कताई मिल। जागरण आर्काइव

    प्रयागराज में बंद कताई मिल। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. तीनों मिलों की जमीन हो चुकी है यूपीसीडा के नाम, अब विकसित किए जाएंगे प्लाट

    2. तीन बड़े औद्योगिक पार्क के विकास से स्थानीय स्तर पर बढ़ सकेंगे रोजगार के अवसर

    3. यमुनापार इलाके में स्थित मेजा कताई मिल की जमीन का होगा सीमांकन, कमेटी गठित

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। यमुनापार में दशकों से बंद मेजा कताई मिल परिसर भी अब गुलजार होगा। यहां उद्योगों की स्थापना के लिए कवायद तेज हो गई है। मिल की जमीन के सीमांकन के लिए डीएम मनीष कुमार वर्मा ने एसडीएम मेजा को निर्देश दिए हैं। डीएम ने इसके लिए यूपीसीडा, जिला प्रशासन और वन विभाग की कमेटी गठित कर दिया है।

    दशकों से बंद पड़ी हैं कताई मिलें 

    जनपद में मेजा व मऊआइमा कताई मिल तथा बांदा की कताई मिल दशकों से बंद पड़ी हैं। इनकी वीरानी दूर करने के लिए मिलों की जमीन पर नए उद्योगों की स्थापना की जाएगी। इन मिलों की जमीन उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) को दे दी गई है, जो औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित कर यहां नई फैक्ट्रियों की स्थापना कराएगा।

    इन मिलों में लगभग 550 फैक्ट्रियां स्थापित होंगी  

    अनुमान लगाया गया है कि इन मिलों में लगभग 550 फैक्ट्रियां स्थापित कराई जा सकेंगी, जिनमें पांच हजार करोड़ रुपये के करीब का निवेश हो सकेगा। यूपीसीडा अब इन मिलों की भूमि को विकसित कराकर उद्योगों के लिए प्लाट आवंटित करेगा। सबसे ज्यादा जमीन 175 एकड़ मेजा कताई मिल के पास है।

    मऊआइमा मिल की 83 एकड़ भूमि यूपीसीडा के नाम 

    इसी तरह मऊआइमा मिल की 83 एकड़ व बांदा मिल की 100 एकड़ जमीन भी यूपीसीडा के नाम कर दी गई है। इसमें 2100, 3500, 10 हजार वर्ग मीटर के प्लाट काटे जाएंगे। कुछ प्लाट दो और पांच एकड़ के भी हैं जिनमें बड़े उद्योग लगाए जा सकेंगे। प्रयागराज के यमुनापार में मेजा कताई मिल तथा गंगापार में मऊआइमा कताई मिल की सभी मशीनें निकाली जा चुकी हैं। इनके भवनों को भी ध्वस्त करा दिया गया है।

    खबरें और भी

    खास-खास

    - 175 एकड़ जमीन मेजा कताई मिल के पास, 83 एकड़ मऊआइमा में व 100 एकड़ बांदा में

    - 5 हजार करोड़ का होगा निवेश, 550 फैक्ट्रियां लगाई जा सकेंगी इन बंद कताई मिलों में

    मेजा व मऊआइमा कताई मिल बंद हैं

    मेजा कताई मिल एक दशक से ज्यादा समय से बंद पड़ी है। मिल के बंद होने से मशीनों में जंग लग गई थी। बिल्डिंग जर्जर हो चुकी थी। जितने कर्मचारी थे वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले चुके हैं। लगभग डेढ़ दशक से ज्यादा समय से मऊआइमा कताई मिल भी बंद है।

    यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक कहते हैं...

    यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी चर्चित गौड़, डीएम मनीष कुमार वर्मा की बैठक में कमेटी गठित कर दी गई है। मेजा कताई मिल की जमीन का सीमांकन तहसील प्रशासन जल्द ही कराएगा, जिसके बाद उद्योगों के प्लाट चिन्हित किए जाएंगे।

    नए उद्योग स्थापना के प्रयास तेज

    जनपद में नए उद्योगों की स्थापना के लिए प्रयास तेज किए गए हैं। सरस्वती हाईटेक सिटी, बंद पड़ीं मेजा व मऊआइमा की कताई मिलों तथा गंगा एक्सप्रेस परियोजना के पास सोरांव में औद्योगिक गलियारा के विकसित कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है।

    - मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी प्रयागराज

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