रेलवे कर्मियों के बच्चों की पढ़ाई अब और आसान होगी, हॉस्टल सब्सिडी में हुआ बड़ा इजाफा; राशि बढ़कर हुई कितनी?
रेल मंत्रालय ने रेलवे कर्मचारियों के बच्चों के लिए हॉस्टल सब्सिडी बढ़ाकर 8,437.50 रुपये प्रति माह कर दी है। यह सुविधा महंगाई भत्ता 50% पार होने के कार ...और पढ़ें

रेलवे कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई व हॉस्टल खर्च के लिए प्रति माह 8,437 रुपये मिलेंगे।
HighLights
रेल मंत्रालय ने चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस, हॉस्टल सब्सिडी योजना सुविधाएं दी
इस योजना का लाभ केवल नियमित व सेवारत रेलवे कर्मियों के दो बच्चों के लिए ही
अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। रेलवे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा और उनके उज्जवल भविष्य के लिए रेल मंत्रालय की ओर से कई महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जिनमें चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस के साथ हॉस्टल सब्सिडी की योजना बेहद खास है। इस व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया गया है।
योजना की राशि में बड़ा बदलाव हुआ
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन रेलकर्मियों को वित्तीय राहत प्रदान करना है, जिनके बच्चे अपने घर और माता-पिता से दूर रहकर किसी आवासीय विद्यालय या हॉस्टल में पढ़ाई कर रहे हैं। वर्तमान समय में इस योजना के तहत मिलने वाली राशि में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, क्योंकि देश में महंगाई भत्ता बढ़कर 50 प्रतिशत के स्तर को पार कर चुका है।
यह राशि निर्धारित दर के अनुसार ही मिलेगी
नियमों के अनुसार जैसे ही महंगाई भत्ता इस सीमा को छूता है, वैसे ही भत्तों की दरों में भी स्वतः ही बढ़ोतरी हो जाती है। इसी क्रम में अब हॉस्टल सब्सिडी की दरों को संशोधित कर 8,437.50 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा निर्धारित कर दिया गया है। इस वित्तीय लाभ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह राशि कर्मचारी को सीधे तौर पर निर्धारित दर के अनुसार ही देय होती है, चाहे हॉस्टल का वास्तविक खर्च इस तयशुदा रकम से कम हो या अधिक।
नियम व शर्तें भी जान लें
रेलवे प्रशासन इस बात पर विशेष ध्यान देता है कि यह लाभ केवल नियमित और सेवारत रेलवे कर्मचारियों को ही प्रदान किया जाए और एक कर्मचारी अधिकतम अपने दो बच्चों की पढ़ाई के लिए ही इस राशि का दावा करने का पात्र माना जाता है।
खबरें और भी
नर्सरी से 12वीं तक योजना का मिलेगा लाभ
शैक्षणिक योग्यताओं और कक्षाओं के दायरे की बात करें तो यह सब्सिडी नर्सरी यानी पहली कक्षा से पूर्व की तीन प्रारंभिक कक्षाओं से लेकर कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई के लिए पूरी तरह मान्य है। इसके साथ ही कुछ विशेष और तकनीकी मामलों में यदि बच्चा 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से आइटीआइ, पॉलिटेक्निक या इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लेता है, तो ऐसे तकनीकी पाठ्यक्रमों के प्रथम दो वर्षों के लिए भी कर्मचारी हॉस्टल सब्सिडी का दावा करने का हकदार होता है।
कर्मचारी को एक स्व-घोषणा पत्र भी देना होगा
इस प्रक्रिया का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों को कुछ बेहद आवश्यक और प्रामाणिक दस्तावेज अपने संबंधित विभाग में प्रस्तुत करने होते हैं। इन दस्तावेजों में मुख्य रूप से निर्धारित प्रारूप में भरा गया आवेदन पत्र, संबंधित विद्यालय या शैक्षणिक संस्थान द्वारा जारी किया गया प्रामाणिक प्रमाण पत्र और छात्र के हॉस्टल में रहने की पुष्टि करने वाला हॉस्टल वार्डन या प्रबंधन का वैध सर्टिफिकेट शामिल है। इसके अतिरिक्त कर्मचारी को एक स्व-घोषणा पत्र भी देना होता है जिसमें बच्चों की संख्या और हॉस्टल में रहने की सही अवधि का स्पष्ट उल्लेख किया जाता है।
दो लाभ एक साथ नहीं ले सकते
योजना से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण नियमों को समझना भी हर रेलकर्मी के लिए जरूरी है, जैसे कि कोई भी कर्मचारी एक ही बच्चे के लिए चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस और हॉस्टल सब्सिडी दोनों का लाभ एक साथ नहीं ले सकता है। यदि बच्चा हॉस्टल में रहकर पढ़ रहा है तो उसे केवल हॉस्टल सब्सिडी की पात्रता ही मिलेगी।
वर्ष में एक ही बार मिलेगी राशि
इस राशि का दावा सामान्यतः प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष की समाप्ति पर साल में एक बार किया जाता है। इसके अलावा दिव्यांग बच्चों के संदर्भ में रेलवे बोर्ड ने विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके लिए शिक्षा भत्ते की दरें सामान्य से अलग और काफी अधिक निर्धारित की हैं ताकि उनके विकास में कोई बाधा न आए।