70 वर्ष की आयु पूरी कर चुके रेलवे पेंशनर्स के लिए अच्छी खबर, अब निजी अस्पतालों में इलाज होगा आसान
रेलवे बोर्ड ने 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों के लिए निजी अस्पतालों में इलाज को सुगम बनाने को ...और पढ़ें

रेलवे बोर्ड ने बुजुर्ग रेलवे पेंशनर्स को निजी अस्पतालों में इलाज और आसान करेगा।
HighLights
रेलवे बोर्ड ने शुरू की राष्ट्रीय समीक्षा, रोकी जाएगी अस्पतालों की मनमानी
बोर्ड ने सभी रेलवे जोन से मांगी रिपोर्ट कि क्यों नहीं मिल पा रही है सुविधा?
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। देशभर के 70 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले लाखों सेवानिवृत्त रेल कर्मचारियों (पेंशनर्स) को घर के पास के निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा को और अधिक मजबूत व निर्बाध बनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने एक बड़ा कदम उठाया है। इनके लिए पैनल के निजी हॉस्पिटल में बिना रेलवे अस्पताल के चक्कर काटे सीधे ओपीडी परामर्श और जांच की सुविधा मिल रही है या नहीं, और इस राह में क्या अड़चनें आ रही हैं, इसकी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड ने तलब की है।
रेलवे बोर्ड ने देश के सभी जोनल रेलवे के प्रमुख मुख्य चिकित्सा निदेशकों और उत्पादन इकाइयों को पत्र जारी कर पांच बिंदुओं पर विस्तृत डेटा मांगा है। बोर्ड यह समीक्षा कर रहा है कि कितने वरिष्ठ पेंशनर्स ने 'उम्मीद' कार्ड के जरिए सीधे पैनल अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और पैथोलॉजी-रेडियोलाजी जांच का लाभ उठाया है।
निजी अस्पताल बुजुर्गों को बिना रेफरल सीधे इलाज देने में टालमटोल करते हैं या बिलिंग में पेंच फंसाते हैं। इसे लेकर बोर्ड ने पूछा है कि इस व्यवस्था पर अब तक कुल कितना खर्च आया है और दिल, किडनी, डायबिटीज जैसी गंभीर व पुरानी (क्रोनिक) बीमारियों के इलाज में रेफरल की व्यवस्था किस तरह काम कर रही है।
रेलवे बोर्ड की संयुक्त निदेशक (औद्योगिक स्वास्थ्य) डॉ. नीति कुमारी ने बताया कि देश भर के आंकड़ों और मैदानी फीडबैक के आधार पर रेलवे बोर्ड बुजुर्गों की चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व सरल बनाएगा। इससे निजी अस्पतालों के भुगतान में तेजी आएगी, देश के किसी भी कोने में रहने वाले बुजुर्ग रेलकर्मी को अस्पताल की कागजी औपचारिकताओं और लंबी कतारों के लिए परेशान न होना पड़े।
