जोड़ने की भाषा बनाने से होगा संस्कृत का कल्याण, राज्य स्तरीय सप्ताह समापन समारोह में विद्वानों ने किया मनन
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की पहल पर प्रयागराज में प्रथम राज्य स्तरीय संस्कृत सप्ताह का समापन हुआ। ...और पढ़ें

प्रयागराज में आयोजित समारोह में उपस्थित शिक्षा विभाग के अधिकारी व संस्कृत विद्यालयों के विद्यार्थी। जागरण
HighLights
संस्कृत के ज्ञान से हमें अपने देश की समृद्ध विरासत सहज ही मिली है : पार्थ सारथी सेन शर्मा
अपर मुख्य सचिव बेसिक/माध्यमिक (एसीएस) ने संस्कृत विद्वानों एवं शिक्षकों का किया सम्मान
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। अपर मुख्य सचिव (एसीएस)बेसिक/माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के नवाचार के चलते संस्कृत को विद्यालय की चहारदीवारी से बाहर लाकर मंच प्रदान किया गया। संस्कृत के प्रचार-प्रसार, संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से पहली बार राज्य स्तरीय संस्कृत सप्ताह आयोजित किया गया।
इसमें हुई प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को समापन समारोह में मुख्य अतिथि एसीएस ने सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि कहा कि संस्कृत के ज्ञान से हमें अपने देश की समृद्ध विरासत सहज ही मिली है। बोले कि अब संस्कृत को जोड़ने वाली भाषा बनाने के लिए मिलकर काम करना होगा, तभी यह जन-जन की भाषा बनेगी। विश्व के कई नामी विश्वविद्यालयों में संस्कृत विभाग हैं, जहां संस्कृत पर शोध हो रहे हैं। इस तरह के प्रयास भारत में भी करने की जरूरत है, जिससे यह संरक्षित होने के साथ रोजगार का भी माध्यम बने।
विशिष्ट अतिथि एवं सेवानिवृत्त आइएएस एसके पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत के क्षेत्र में रोजगार के नवीन अवसर सृजित कर इसके अध्ययन एवं संवर्धन को और गति दी जा सकती है। विशेष अतिथि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि किसी भी भाषा का वास्तविक संवर्धन उसके अध्ययन-अध्यापन की उत्कृष्टता से ही संभव है। यदि किसी भाषा को पढ़ने वाले न रहें तो वह अवनति की ओर चली जाती है। संस्कृत में नया साहित्य आधुनिक समय की जरूरत के साथ रचा जाए, तो पढ़ने वाले भी मिलेंगे और यह फूलेगी-फलेगी भी।
अध्यक्षता कर रहे बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो गिरीशचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि भारत केवल एक भू-खंड नहीं, बल्कि दर्शन, दृष्टि और विचार है। भारत की इस विशिष्ट दृष्टि और जीवन-दर्शन को समझने का मार्ग संस्कृत से होकर जाता है। समारोह के आयोजक उप शिक्षा निदेशक (संस्कृत) डॉ. ब्रजेश मिश्र ने स्वागत भाषण के साथ कहा कि एसीएस की अभिनव पहल पर संस्कृत भाषा को अक्षुण्य रखने के उद्देश्य से विशेष सप्ताह आयोजित किया गया।
सचिव संस्कृत शिक्षा परिषद ओम प्रकाश त्रिपाठी ने तकनीक एवं एआई के युग में संस्कृत को संस्कार का आधार बताते हुए आभार व्यक्त किया। निरीक्षक संस्कृत पाठशालाएं उत्तर प्रदेश पवन कुमार श्रीवास्तव के प्रयास से आयोजित संस्कृत मेला का एसीएस ने निरीक्षण कर सराहना की। आयोजन का संस्कृत में संचालन जीआइसी में प्रवक्ता सालिकराम त्रिपाठी ने किया।
संस्कृत में हुई प्रतियोगिताएं व समारोह का संचालन भी
राज्य स्तरीय संस्कृत सप्ताह के समापन अवसर पर सोमवार को जिला पंचायत सभागार में समारोह आयोजित किया गया। इसमें विशेष यह रहा कि समारोह का आयोजन संस्कृत भाषा में किया गया। कार्यक्रम स्थल पर संदेश भी संस्कृत भाषा में लिखे गए थे। संस्कृत विद्यार्थियों ने स्वस्ति वाचन से लेकर स्वागत गीत तक संस्कृत में गाए। संस्कृत मेला में अपर मुख्य सचिव ने ऋषि मुनि की वेषभूषा में खड़े बच्चों ने आकर्षित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से बात भी की। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी विशेष रूप से सम्मिलित हुए।
इन शिक्षकों को मिला सम्मान
संस्कृत एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. सुरेन्द्र पाल सिंह (विभागाध्यक्ष सीएमपी महाविद्यालय), अरविंद शास्त्री (सतुवा बाबा संस्कृत विद्यालय वाराणसी), डा. विनोद कुमार मिश्र, डा. सालिकराम त्रिपाठी (जीआइसी), डा अरुणेश मिश्र (विभागाध्यक्ष ईसीसी), यशवंत कुमार द्विवेदी, डा राजेश मिश्र ‘धीर’ (आचार्य एवं विभागाध्यक्ष श्रीहर्ष सावित्री संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय), डा मुकेश त्रिपाठी, डा तेज प्रकाश चतुर्वेदी, डा ब्रह्मानंद शुक्ल एवं घनश्याम द्विवेदी को सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित
राज्य स्तरीय संस्कृत सप्ताह में आयोजित मेला एवं प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कृत किया गया। गीता पाठ में संस्कार को प्रथम, जबकि आयुष को द्वतीय स्थान का पुरस्कार, गीत प्रतियोगिता में उत्सव त्रिपाठी प्रथम स्थान एवं ओम तिवारी को द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर अपर मुख्य सचिव ने सम्मानित किया। अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता में अनमोल नें प्रथम एवं विवेकानंद नें द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
