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    सावन में मनकामेश्वर महादेव मंदिर में पूजन-दर्शन के नियम : पैकेट दूध-प्लास्टिक गिलास पर प्रतिबंध, धोती-साड़ी में कर सकेंगे अभिषेक

    By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Mon, 13 Jul 2026 05:26 PM (GMT+05:30)

    प्रयागराज के श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दौरान नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके तहत पॉलीथिन और प्लास्टिक के गिलास में दूध चढ़ाने पर प्रतिबंध ...और पढ़ें

    प्रयागराज में सावन महोत्सव की तैयारियों पर पुजारियों संग चर्चा करते श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्रीधरानंद ब्रह्मचारी। जागरण

    प्रयागराज में सावन महोत्सव की तैयारियों पर पुजारियों संग चर्चा करते श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्रीधरानंद ब्रह्मचारी। जागरण

    HighLights

    1. कटी-फटी जींस पहनने वालों को नहीं मिलेगा गर्भगृह में प्रवेश

    2. प्रयागराज के इस शिव मंदिर में शास्त्रीय परंपरा का होगा पालन

    3. सीसीटीवी से व स्वयंसेवक श्रद्धालुओं के पूजन सामग्री पर रहेगी नजर

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। तीर्थराज प्रयाग के प्रमुख शिवालय श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु पालीथिन के पैकेट से दूध नहीं चढ़ा पाएंगे। न प्लास्टिक के गिलास में दूध ले जा सकेंगे। शास्त्रीय परंपरा का पालन करने के लिए मंदिर प्रबंधन ने दोनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। आम श्रद्धालु हो अथवा कोई प्रभावशाली व्यक्ति, यह नियम सबके ऊपर लागू होगा।

    सीसीटीवी संग स्वयंसेवक रखेंगे नजर 

    पैकेट अथवा प्लास्टिक की गिलास में दूध लेकर जाने वाले को गेट पर रोक दिया जाएगा। सीसीटीवी कैमरे से हर श्रद्धालु पर नजर रखी जाएगी। साथ ही हर द्वार पर पांच से सात स्वयंसेवक तैनात रहकर सबकी पूजन सामग्री पर नजर रखेंगे।

    30 जुलाई से 28 अगस्त तक सावन मास  

    जप-तप, त्याग और समर्पण से महादेव शिव को प्रसन्न करने का कालखंड सावन का महीना 30 जुलाई से आरंभ होकर 28 अगस्त तक रहेगा। शिव को प्रसन्न करने को सनातन धर्मावलंबी अभिषेक व अनुष्ठान कराते हैं। श्रीमनकामेश्वर व ऋणमुक्तेश्वर महादेव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक कराने वालों का तांता लगा रहता है। शिवलिंग पर पालीथिन व प्लास्टिक की गिलास में दूध लेकर आते हैं। शिवलिंग में दूध चढ़ाने के बाद उसे मंदिर परिसर में फेंक देते हैं।

    शिव का पूजन शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप हो : श्रीधरानंद 

    सावन महोत्सव की तैयारियों को लेकर 12 जुलाई को आयोजित बैठक में इस पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। अध्यक्षता कर रहे मंदिर के महंत व द्वारका शारदा पीठ के प्रतिनिधि श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने पुजारियों और प्रबंधन देखने वाले लोगों से स्पष्ट कहा, भगवान शिव का पूजन शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप होना चाहिए। पैकेट और प्लास्टिक की गिलास में दूध लेकर किसी को मंदिर में प्रवेश न दिया जाए।

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    नियम का विरोध करने वाले पुलिस के हवाले होंगे 

    उन्होंने कहा कि हर श्रद्धालु शालीन कपड़े में मंदिर आएं। कटी-फटी जींस व टी-शर्ट पहनने वालों को गर्भगृह में घुसने से रोक दिया जाय। पुरुष को धोती और महिलाओं को साड़ी पहनाकर ही अभिषेक कराया जाए। इस नियम का विरोध करने वालों को पुलिस के हवाले किया जाएगा। बैठक में आचार्य गंगा प्रसाद शुक्ल, राहुल त्रिपाठी, सुशील त्रिपाठी, आयुष तिवारी, भीम शंकर पाठक, कृष्ण मोहन त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। 

    प्लास्टिक अपवित्र, बनते हैं पाप के भागीदार

    श्रीधरानंद ने कहा, प्लास्टिक अप्रवित्र होती है। पैकेट व प्लास्टिक के गिलास से शिवलिंग पर दूध चढ़ाना शास्त्रीय परंपरा के विपरीत है। ऐसा करने वाले पुण्य के बजाय पाप के भागीदार बनते हैं। श्रद्धालुओं के हित में उसमें रोक लगाई गई है। शास्त्रों के अनुसार, पीतल अथवा चांदी के बर्तन से शिवलिंग पर दूध-जल चढ़ाना चाहिए। भगवान शिव को चांदी के बर्तन में दूध का अभिषेक करना उपयोगी होता है। चांदी का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से है, इसलिए चांदी धातु के प्रयोग से कुंडली में चंद्रमा और शुक्र ग्रह मजबूत होते हैं।

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