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    Sawan के पहले सोमवार पर सुकर्मा योग में पूजन से मिलेगा शुभ फल, व्रती किन बातों का करें पालन, शिवलिंग पर क्या न चढ़ाएं?

    By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sun, 02 Aug 2026 02:07 PM (GMT+05:30)

    श्रावण के पहले सोमवार को सुकर्मा योग में शिव पूजन का विशेष महत्व है, जिससे मनोवांछित फल मिलते हैं। व्रती ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर शिवलिंग पर बेलपत् ...और पढ़ें

    सावन के पहले सोमवार पर पूजन में कुछ सामग्री वर्जित होती है।

    सावन के पहले सोमवार पर पूजन में कुछ सामग्री वर्जित होती है।

    HighLights

    1. शिवालयों में जुटेंगे श्रद्धालु, घरों में भी किए जाएंगे अनुष्ठान

    2. शिवभक्त कांवरियों का जत्था प्रयागराज पहुंचने लगा है

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। देवाधिदेव महादेव भगवान शिव का प्रिय मास (महीना) श्रावण यानी सावन और उसमें भी दिन सोमवार खास होता है। श्रावण के पहले सोमवार पर तीन अगस्त के दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, सुकर्मा योग का अद्भुत संयोग है। सुकर्मा योग शुभ और मंगलकारी होता है। इसमें भगवान शिव की स्तुति करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए श्रद्धालु शिवालयों में मत्था टेकेंगे।

    शिव मंदिरों में शाम को होगा शृंगार  

    श्री मनकामेश्वर महादेव, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, दशाश्वमेध महादेव, शिवकोटि, सोमेश्वरनाथ, तक्षकतीर्थ बड़ा शिवालय, पंचमुखी महादेव, पांडेश्वरनाथ महादेव, लोकनाथ महादेव सहित हर शिवालय में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी। दिनभर जलाभिषेक के बाद शाम को शिवलिंग का शृंगार किया जाएगा।

    संगम में डूबकी लगाकर करेंगे अनुष्ठान 

    शिव स्तुति के लिए श्रावण के सोमवार का विशेष महत्व होता है। गंगा व संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर श्रद्धालु शिवालय व घरों में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप आदि का अनुष्ठान करते हैं। पहले सोमवार पर स्नान व शिवालय में जलाभिषेक करने के लिए शिवभक्त कांवरियों का जत्था आज रविवार को तीर्थराज प्रयाग पहुंचने लगा है।

    भगवान शिव से मनोकामना पूर्ति की करेंगे याचना 

    दारागंज, अलोपीबाग, कीडगंज, बैरहना में बने आश्रमों में कांवरियों ने आसरा लिया। सोमवार की सुबह स्नान के बाद वह शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे।वहीं, काफी श्रद्धालु ''हर-हर बम-बम.., हर हर महादेव..'' का उद्घोष करते हुए बाबा विश्वनाथ का अभिषेक करने काशी और बाबा बैजनाथ धाम जाएंगे। वहीं, तीर्थराज के हर शिवालय में भोर से श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग जाएगी। भोलेबाबा के शिवलिंग पर दूध-जल, बेलपत्र, भांग, धतुरा अर्पित करके मनोकामना पूर्ति की याचना करेंगे। 

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    व्रती इन बातों का करें पालन

    पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार श्रावण के सोमवार के दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर शिवालय में जाकर शिवलिंग का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के बाद पुनः स्वच्छ जल अर्पित करके शिवलिंग पर बेलपत्र अवश्य चढ़ाएं। बेलपत्र तीन पत्तियों वाला, साफ और बिना टूटा होना चाहिए। इसके अलावा धतूरा, आक का फूल, भांग, सफेद चंदन, सफेद पुष्प, अक्षत, जनेऊ, मौसमी फल और मिष्ठान अर्पित कर सकते हैं। पूजा के दौरान मन में ऊं नमः शिवाय का जाप करते रहें। शिव चालीसा अथवा रुद्राष्टक का पाठ विशेष फलदायी होता है।  

    शिवलिंग पर यह न चढ़ाएं 

    शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, केतकी का फूल, तुलसी दल और नारियल का पानी अर्पित नहीं करना चाहिए। शिव पूजा में इनका उपयोग नहीं किया जाता। श्रावण के सोमवार पर शिव पूजा से ग्रह दोषों की शांति, मानसिक तनाव में कमी और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

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