अराजक खनन-मूक व्यवस्था : प्रयागराज से कौशांबी तक बेतहाशा खनन, उजड़ रहा यमुना का पारिस्थितिकी तंत्र
प्रयागराज और कौशांबी में यमुना नदी में अंधाधुंध खनन से जलीय जीवन खतरे में है। रेत के खनन से मछलियों व कछुओं के आवास नष्ट हो रहे हैं, जिससे मछुआरों की ...और पढ़ें

प्रयागराज में करेलाबाग एंटक वेल के सामने यमुना नदी में किया जा रहा बालू का अवैध खनन। जागरण
HighLights
व्यापक स्तर पर खनन से नदी के किनारे के इलाकों में रेड जोन में पहुंच गया भूगर्भ जल स्तर
मछुआरों से लेकर मछली कारोबार तक से जुड़े लोगों के सामने पेट पालने का संकट हुआ खड़ा
यमुना की धारा में चल रहा अधाधुंध बालू खनन अब जलीय जीवन के अस्तित्व पर सीधा हमला बन गया है। नदी के भीतर से तेजी से हटती रेत ने मछलियों, कछुओं और अन्य जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास को तबाह करना शुरू कर दिया है। जो रेत कभी इन जीवों के लिए आश्रय और प्रजनन का सुरक्षित आधार थी, वही अब गहरे गड्ढों और अस्थिर तल में बदलकर उनके जीवन के लिए खतरा बन गई है।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रयागराज से कौशांबी तक करीब 32 किलोमीटर की पड़ताल में सामने आया है कि नियमों को दरकिनार कर यमुना नदी की बीच धारा तक मशीनें उतारी जा रही हैं। इससे न सिर्फ जलधारा का संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि पानी में आक्सीजन और पोषक तत्वों का प्रवाह भी बाधित हो रहा है, जो जलीय जीवन की मूल आवश्यकता है। मछलियों की घटती संख्या ने मछुआरों की आजीविका पर चोट की है, वहीं कछुओं जैसे संवेदनशील जीवों का अस्तित्व संकट में है।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह अराजक दोहन नहीं रुका, तो यमुना का पूरा जैविक तंत्र ढह सकता है। दरअसल, नदी का पारिस्थितिकी तंत्र रेत, पानी, जलीय जीवों, वनस्पतियों और सूक्ष्म जीवों के संतुलन पर टिका होता है। रेत के अत्यधिक खनन से यह संतुलन टूटता है आवास नष्ट होते हैं, खाद्य श्रृंखला बिखरती है और जैव विविधता पर गहरा प्रहार होता है।
चौंकाने वाले आंकड़े
- 455 हजार से ज्यादा परिवार जुड़ा है नदी की मछली निकालने और इसके कारोबार से
- 40 से अधिक स्थानों पर गंगा, यमुना, टोंस व बेलन नदियों में हो रहा है अवैध खनन
- 13 ब्लाकों के 116 गांव व शहर के दो दर्जन मोहल्ले का भूगर्भ जलस्तर रेड जोन में
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जलीय जीवों पर संकट, मछुआरों की आजीविका प्रभावित
यमुना में बालू के बेतहाशा अवैध खनन से नदी का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। इससे एक तरफ जहां जलीय जंतुओं पर इसका प्रभाव पड़ रहा है, वहीं मछुआरों, जाल बनाने वाले तथा मछली व्यापारियों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। यमुना में मछली निकालने से लेकर उसके व्यापार तक में हजारों लोग जुड़े हैं। नियमों को ताक पर रखकर लगातार बालू के अवैध खनन से पर्यावरण को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। विशेष रूप से भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे खिसकता जा रहा है, जो भविष्य में खतरे की घंटी है।
अवैध बालू खनन से भूगर्भ जलस्तर नीचे गिर रहा
यमुना से बड़े पैमाने पर अवैध बालू के खनन से सबसे ज्यादा भूगर्भ जलस्तर पर प्रभाव पड़ रहा है। नदी से अधाधुंध बालू निकालने से किनारे के गांवों का भूगर्भ जलस्तर नीचे खिसकता जा रहा है। यमुनापार के प्रतापपुर, लालापुर, जसरा, चाका व भगवतपुर ब्लाक क्षेत्र के साथ शहर के दो दर्जन मोहल्लों में भूगर्भ जलस्तर रेड जोन में पहुंच गया है। कुल लगभग 116 गांवों में यमुना के दोहन का असर पड़ा है।
जलीय जीव-जंतुओं तेजी से समाप्त हो रहे
दिन-रात अवैध खनन के चलते यमुनापार में प्रतापपुर से लेकर शहर के गऊघाट तक जलीय जीव-जंतु बहुतायत में प्रभावित हैं। लाखों घन फीट रोज बालू निकालने और इसमें लगाई गई मशीनरी के चलते इन जलीय जीव-जंतुओं तेजी से समाप्त होने लगे। हिल्सा जैसी महंगी मछलियों की प्रजाति तो बिल्कुल ही खत्म हो गई। गेगरा और बैकरी-बैकरा भी हिल्सा की राह पर है। टेंगरा मछली भी नहीं दिखाई दे रही है। खनन के चलते ही डाल्फिन भी इस क्षेत्र में नहीं बची। पहले यमुना में कछुआ और घड़ियाल भी खूब दिखाई देते थे लेकिन खनन माफिया ने उन्हें भी कहीं का नहीं छोड़ा।
क्या कहते हैं जिलाधिकारी प्रयागराज?
जिलाधिकारी प्रयागराज मनीष कुमार वर्मा का कहना है कि गंगा और यमुना समेत अन्य नदियों में अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई शुरू कराई गई है। टास्क फोर्स गठित कर छापेमारी कराई जा रही है। कार्रवाई में कई ट्रकों व डंपरों को पकड़ा गया है। किनारे पर भंडारित बालू को नदी में फेंका गया। वहीं, दो पट्टाधारकों का 50 लाख रुपये का चालान काटा गया है। आगे भी इस तरह का अभियान चलता रहेगा।
इन स्थानों पर होता है बालू का अवध खनन
यमुना में मड़ौका, मोहब्बतगंज, बसवार, अमिलिया, पालपुर, बीकर, देवरिया, मोहिनी का पूरा, कंजासा, कैनुआ, बिरवल, जगदीशपुर, मानपुर, कचरा, पचवर, मझियारी, अमिलिया, सेमरी व प्रतापपुर में नदी के अंदर से बालू का अवैध खनन किया जाता है। वहीं गंगा में लवायन, मवैया, मनैया, रवनिका, डीहा, सेमरहा, गड़ैला, दुमदुमा, परानीपुर में भारी पैमाने पर अवैध खनन होता है।
गंगा-यमुना में मछलियों की बदली तस्वीर
धारा के बीच में बालू खनन के चलते गंगा-यमुना और उससे जुड़े जलक्षेत्रों में मछलियों की प्रजातियों को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तेजी से बढ़ने वाली विदेशी और अनुकूलनशील प्रजातियां जैसे तिलापिया और कामन कार्प की संख्या में कमी आई है। तिलापिया को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली मछलियों में गिना जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह कम समय में बड़ा आकार ले लेती है और विभिन्न प्रकार की जलवायु एवं जल स्थितियों में आसानी से जीवित रह सकती है।
जैव विविधता पर असर पड़ा
इसी तरह कामन कार्प भी ऐसी प्रजाति है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रहने की क्षमता रखती है। पानी में आक्सीजन की कमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और बदलती जल गुणवत्ता जैसी परिस्थितियों में भी यह आसानी से जीवित रहती है। इन प्रजातियों के कम होने से स्थानीय जैव विविधता पर असर पड़ा और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका भी प्रभावित हुई। विशेषज्ञों के अनुसार केंद्रीय अंतरस्थलीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सिफरी) द्वारा किए गए री-स्टाकिंग और रैंचिंग कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में इन देसी प्रजातियों की अंगुलिकाओं (फिंगरलिंग्स) को गंगा और अन्य जल निकायों में छोड़ना पड़ा है।
प्रवासी मछली हिल्सा का प्राकृतिक मार्ग बाधित
गंगा और यमुना में भीषण बालू खनन के चलते प्रवासी मछली हिल्सा का प्राकृतिक मार्ग बाधित हो गया, जिसके कारण इसका गंगा के ऊपरी हिस्सों तक पहुंचना लगभग बंद हो गया। सिफरी प्रयागराज के विज्ञानी डा.डीएन झा के अनुसार हिल्सा एक प्रवासी प्रजाति है, जो समुद्र के खारे पानी से निकलकर प्रजनन के लिए मीठे पानी की नदियों में लंबी यात्रा करती है। पहले यह मछली बंगाल की खाड़ी से गंगा के रास्ते होते हुए प्रयागराज और इससे ऊपर तक जाती थी। मत्स्य वैज्ञानिकों का कहना है कि बैराज ही नहीं बल्कि प्रदूषण, औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज का बहाव और नदी में लगातार बढ़ रहे अवैध खनन भी इस प्रजाति के लिए बड़ी चुनौती बने।
कौशांबी में मोड़ी यमुना की धारा
अवैध खनन से न सिर्फ नदियों की धारा बदल जाती हैं और पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा रहता है। इसके बाद भी जिले के कई घाटों पर अवैध खनन निर्बाध रूप से हो रहा है। कहीं शिकायत मिली तो जिम्मेदार अधिकारी छापेमारी कर अपना दायित्व पूरा कर लेते हैं, लेकिन उनके जाते ही फिर से अवैध खनन का खेल चालू हो जाता है।
पट्टा से अधिक स्थानों पर हो रहा खनन
खनन विभाग ने जिले में आठ घाटों पर बालू खनन का पट्टा दिया है। जबकि खनन डेढ़ दर्जन से अधिक स्थानों पर हो रहा है। उमरवल, ब्यूर, छेकवा समेत कई स्थान ऐसे हैं, जहां दिन के अलावा रातों में भी कालिंदी की बीच जलधारा में मशीनों से खनन कराया जाता है। नंदा का पूरा में यमुना में दो धारा होने के कारण मिट्टी और पत्थर के जरिए पुल बनाकर एक धारा को अवरुद्ध कर दिया गया और दूसरी धारा में खनन किया जा रहा है।
अन्य घाटों पर भी अवैध खनन हो रहा
अवैध खनन का गोरखधंधा अन्य घाटों पर भी ऐसा ही चल रहा है। इन घाटों से लाखों घन फीट बालू का अवैध खनन प्रतिदिन हो रहा है। अधिकारी हैं कि इन अवैध खनन की तरफ से अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। इसका प्रभाव जलीव जीवों मछली, कछुआ के जीवन पर भी पड़ रहा है।
क्या बोले कौशांबी के खनन अधिकारी?
विशेषज्ञ के अनुसार, मछलियां नदियों के पानी को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। इन जलीय जीवों के न रहने से उस क्षेत्र का पानी भी दूषित हो जाया करता है। जल जीव संपदा बढ़ाने और पानी की शुद्धता के लिए ही मत्स्य विभाग द्वारा पिछले वर्ष यमुना नदी के अलग-अलग खंडों में करीब 57 हजार मत्स्य अंगुलिकाएं डाली गई थीं। जिला खनन अधिकारी सीपी जायसवाल का कहना है कि मछलियों पर खनन का असर नहीं पड़ता है।
कौशांबी के इन स्थानों पर होता है खनन
महेवाघाट, दलेलागंज, पभोसा, कटैया, मल्हीपुर, केवट का पुरवा (नंदा का पुरवा), ऐगवां (महिला) और भवनसुरी घाटों पर खनन का पट्टा दिया गया है। उमरवल, ब्यूर, छेकवा, हिसामबाद, गोपसहसा, पाली उपरहार आदि घाटों पर कहीं अवैध खनन तो कहीं नावों के जरिए बालू का अवैध परिवहन किया जाता है।
चायल, मूरतगंज ब्लाक डार्कजोन में पहुंचे
बड़े पैमाने पर अवैध खनन के कारण नदी के किनारे स्थित चायल, मूरतगंज ब्लाक डार्कजोन में शामिल हैं। मंझनपुर ब्लाक के भी डार्क जोन में इस बार आने के संकेत मिले हैं। यहां ससुर खदेरी नदी में भी खनन होता है। जिले में करीब आठ से 10 हजार मछुआ समाज के लोग मत्स्य पालन पर निर्भर हैं।
कौशांबी के डीएम बोले- शिकायत पर कार्रवाई होती है
कौशांबी के डीएम डॉ. अमित पाल का कहना है कि जिले में जहां भी अवैध खनन की शिकायत मिलती है। वहां कार्रवाई की जाती है। उमरवल में पिछले दिनों खनन इंस्पेक्टर द्वारा रास्ता भी खोदवा दिया गया था। निरंतर कार्रवाई की जाती है। इसकी वजह से राजस्व की वसूली में भी प्रगति है।