आजम खान की बढ़ी सजा ने बदला रामपुर का सियासी समीकरण, 2027 में सपा के लिए गढ़ बचाना मुश्किल!
आजम खान की सजा बढ़कर 10 साल होने से उनकी रिहाई और चुनाव लड़ने की राह मुश्किल हो गई है। इससे सपा के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव में रामपुर में अपनी सीट ...और पढ़ें

आजम खान
HighLights
दो पैन कार्ड मामले में सात साल की सजा बढ़कर हो गई 10 साल
परिस्थितियों का सबसे अधिक फायदा उठा सकती है भाजपा
जागरण संवाददाता, रामपुर। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के लिए आजम खान के बिना जिले में सीट बचाना चुनौती बन सकता है। आजम खान अपने बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला के साथ दो पैन कार्ड मामले में रामपुर जेल में बंद हैं। अब आजम खान की सात साल की सजा भी बढ़कर 10 साल हो गई है। ऐसे में उनके जेल में होने का फायदा दूसरे दल उठाएंगे। सबसे अधिक फायदा भाजपा को हो सकता है।
पश्चिम बंगाल की जीत ने भरा जोश
पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत ने भाजपाइयों में जोश भर दिया है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है। रामपुर की सभी सीट जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। वर्तमान में तीन विधानसभा सीट (शहर, बिलासपुर और मिलक) पर ही भाजपा का कब्जा है।
एक सीट पर है सपा का कब्जा
इसमें आजम खान की सुरक्षित मानी जाने वाली शहर विधानसभा सीट को वर्ष 2022 के उप चुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना ने जीता था। स्वार-टांडा विधानसभा सीट की बात करें तो यह भी वर्तमान में भाजपा की गठबंधन वाली अपना दल के पास है। मात्र एक विधानसभा सीट चमरौआ पर अभी सपा का कब्जा है।
शहर सीट है आजम खान का गढ़
इस सीट पर आजम खान के बेहद करीबी नसीर खान विधायक हैं। हालांकि अब वृद्ध हो चुके हैं। वह अगला चुनाव लड़ेंगे, यह कहना मुश्किल है।
आगामी चुनाव में यदि आजम खान और अब्दुल्ला अगर खुद चुनाव लड़ते या फिर शहर विधानसभा सीट और स्वार विधानसभा सीट बचने की उम्मीद की जा सकती थी, क्योंकि शहर विधानसभा सीट आजम खां का गढ़ रही है। यहां से वह 10 बार विधायक रहे हैं।
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टिकट काे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
एक बार लोकसभा चुनाव भी जीत चुके हैं। स्वार-टांडा विधानसभा सीट से भी बेटे को दो बार जिता चुके थे। मौजूदा हालात में सजा बढ़ने के कारण उनका जेल से जल्द बाहर आना मुश्किल है। वैसे भी सजा के कारण आजम खान और अब्दुल्ला चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो चुके हैं। उनके जेल में रहने के कारण पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनके कहने पर किसी अन्य को टिकट देगा या नहीं, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
विरोध के बावजूद सपा ने दिया था नदवी को टिकट
लोकसभा चुनाव में पार्टी ने आजम खान के विरोध के बावजूद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को टिकट दिया था। एक समय था, जब जिले में होने वाले प्रत्येक चुनाव में आजम खान की चलती थी। वही टिकट बांटते थे और प्रत्याशी तय करते थे। आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी कितनी चलेगी, यह भी समीकरण प्रत्याशी की हार-जीत तय करेंगे।
उम्मीद के साथ तैयारी कर रहे हैं कार्यकर्ता
लोकसभा चुनाव में आजम के विरोध के बाद स्थानीय सपाइयों ने भी पार्टी प्रत्याशी को चुनाव नहीं लड़ाया था। फिलहाल स्थानीय सपाई यही मान रहे हैं कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में आजम खान की ही चलेगी। इसी सोच और जोश के साथ वे चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। सभी तहसीलों में विधानसभा क्षेत्र अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है और सभी विधानसभा क्षेत्रों में कार्यालय खोले जा रहे हैं।
आजम खान ही तय करेंगे टिकट
इस संबंध में सपा के जिलाध्यक्ष अजय सागर ने बताया कि जिले में विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां चल रही हैं। सभी विधानसभा क्षेत्रों में अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी है। प्रत्येक बूथ पर बूथ लेवल एजेंट बना दिए गए हैं। पीडीए की बैठकों के जरिए पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों को साधा जा रहा है। रामपुर जिले की प्रत्येक विधानसभा सीट पर पार्टी चुनाव लड़ेगी। प्रत्येक सीट के लिए प्रत्याशी हमारे नेता आजम खान ही तय करेंगे।