100 साल बाद अंग्रेजों के ऐतिहासिक पुल पर चला 'हथौड़ा', नीलाम होगा भाखड़ा डैम का यह लोहे का ढांचा
भाखड़ा बांध पर अंग्रेजों के जमाने का 100 साल पुराना लोहे का पुल अब नीलाम किया जाएगा। जर्जर हालत और सुरक्षा कारणों से सिंचाई विभाग इसकी नीलामी कर नया आ ...और पढ़ें

जर्जर अवस्था में मौजूद भाखड़ा डैम का पुल। जागरण
HighLights
1926 में अंग्रेजों के शासनकाल में बनवाया गया था लोहे का पुल
संवाद सहयोगी, बिलासपुर (रामपुर)। 100 साल के बाद भाखड़ा डैम पर अंग्रेजों के जमाने में बने ऐतिहासिक लोहे के पुल को अब नीलाम करने की तैयारी तेज हो गई है। इस पुल की जर्जर हालत को देखते हुए सिंचाई विभाग ने इसकी नीलामी के लिए आधिकारिक मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मूल्यांकन कार्य पूरा होते ही विभाग द्वारा कबाड़ (स्क्रैप) की बिक्री के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
वर्ष 1926 में अंग्रेजों के शासनकाल में निर्मित यह पुल अपनी मियाद पूरी कर लेने के कारण ढांचागत रूप से यह बेहद कमजोर हो गया था। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई विभाग ने काफी समय पहले ही इस पुल पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था।
इस पुराने और असुरक्षित पुल को हटाने के बाद इसके स्थान पर एक नए, चौड़े और आधुनिक पुल का निर्माण किया जाएगा। अवर अभियंता वीर सिंह के अनुसार पुराने पुल के मलबे और लोहे को पूरी तरह हटाने के बाद नए सिरे से यहां पुल का निर्माण कार्य किया जाएगा। नया पुल बनने से जनता को जाम और जर्जर मार्ग से काफी राहत मिलेगी।
उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग की तकनीकी और मूल्यांकन टीम वर्तमान में मौके पर जाकर पुल में इस्तेमाल हुए लोहे की कुल मात्रा, वजन और उसकी वर्तमान गुणवत्ता का बारीकी से आकलन कर रही है। इस आकलन के आधार पर पुल का एक न्यूनतम सरकारी मूल्य तय किया जाएगा।
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इसके बाद पारदर्शी तरीके से टेंडर आमंत्रित कर सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को इस पुल को हटाने और कबाड़ ले जाने का ठेका दिया जाएगा। वहीं, अंग्रेजों के जमाने में तैयार भाखड़ा डैम और यह पुल आज भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां शाम के समय लोग टहलने आते हैं। इतिहास में दर्ज इस डैम पर ठंडी हवाओं का लुत्फ उठाते हैं।