Invest UP: रामपुर के 1500 करोड़ के निवेश प्रोजेक्ट्स अधर में, इन बड़ी कंपनियों के MOU पर लटकी तलवार
रामपुर में इन्वेस्ट यूपी के तहत 1500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर संकट गहरा गया है। विवाद के बाद एमओयू रद्द करने की तैयारी है क्योंकि ये परियोजन ...और पढ़ें

बिलासपुर में 227 करोड़ से स्थापित प्लास्टिक से धागा बनाने की जीईएसएल फैक्ट्री। जागरण
HighLights
2024 में इन्वेस्टर्स समिट में उद्योग लगाने के लिए 700 से ज्यादा निवेशकों ने दिए थे नौ हजार करोड़ के प्रस्ताव
जागरण संवाददाता, रामपुर। पूछ एआइ से इन्वेस्ट यूपी के समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लेकर छिड़े विवाद के बाद एमओयू निरस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसकी जद में जिले के भी डेढ़ हजार करोड़ के प्रस्ताव आ गए हैं। इन प्रस्तावों के अभी तक धरातल पर नहीं उतरने के कारण एमओयू निरस्त करने की तैयारी है।
प्रदेश सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। वर्ष 2024 की शुरुआत में हुई इन्वेस्टर्स समिट में जिले में उद्योग लगाने के लिए 700 से अधिक निवेशकों ने करीब 9000 करोड़ के प्रस्ताव दिए थे। हालांकि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) में करीब 4000 करोड़ की लागत से 90 इकाइयों के ही एमओयू साइन हुए थे।
रामपुर में स्थापित हो चुकीं प्रमुख औद्योगिक इकाइयां
| क्र.सं. | इकाई का नाम | स्थान | निवेश लागत (अनुमानित) |
| 1. | जीईएसएल (GESL) | बिलासपुर | 227 करोड़ रुपये |
| 2. | सिनेपोलिस मोदी माल | बरेली रोड | 90 करोड़ रुपये |
| 3. | स्वाति कैम्फर एलाइड | बरेली रोड | 60 करोड़ रुपये |
| 4. | नीलाम्बरा एग्रो यूनिट | स्वार | 45 करोड़ रुपये |
| 5. | अडानी एग्रो लाजिस्टिक | धमोरा | 42 करोड़ रुपये |
| 6. | फ्रोजन यूनिट | बिलासपुर | 29 करोड़ रुपये |
| 7. | ग्लासेज फैक्ट्री | बिलासपुर | 10 करोड़ रुपये |
इन इकाइयों में 80 इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। ऐसे में बाकी इकाइयों पर संकट के बादल हैं। यदि निवेशकों ने अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया तो इनके एमओयू निरस्त हो सकते हैं। उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र अनुराग यादव का कहना है कि एमओयू तब निरस्त किया जाता है, जब कोई इकाई आगे प्रक्रिया के लिए मना करती है।
जिले में अभी तक किसी इकाई द्वारा मना नहीं किया गया है। जिले में 4000 करोड़ की लागत से 90 इकाइयां स्थापित होनी हैं, जिसमें 80 इकाइयों द्वारा करीब 2500 करोड़ का निवेश किया जा चुका है। चार इकाइयां स्थापित होने की प्रक्रिया में हैं।
एमओयू साइन करने वाली छह इकाइयां हैं, जिन्होंने प्रक्रिया शुरू नहीं की है। उनके द्वारा समय मांगा गया है, जिसके कारण उन्हें समय दिया गया है। इनमें तीन से चार प्रोजेक्ट मोदी ग्रुप के हैं। उनकी जमीन की उपलब्धता को लेकर कोई रुकावट है, जिसे वे दूर करा रहे हैं।