जौहर यूनिवर्सिटी को मिले करोड़ों रुपए के दान में कालाधन होने का शक, आयकर विभाग की जांच जारी
आयकर विभाग जौहर ट्रस्ट को मिले करोड़ों के दान में वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेनदेन की जांच कर रहा है, जिसे कालाधन माना जा रहा है। ...और पढ़ें

जौहर यूनिवर्सिटी
HighLights
आयकर विभाग जौहर ट्रस्ट के दान में कालाधन की जांच कर रहा।
ट्रस्ट का चैरिटेबल दर्जा रद्द, दस्तावेज पेश करने का नोटिस।
करोड़ों के दान में संदिग्ध लेनदेन और अनियमितताएं पाई गईं।
अनिल अवस्थी, रामपुर। जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण व उसकी जमीन खरीद के संबंध में आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट से जो पांच वर्ष का ब्यौरा मांगा है, वह देना आसान नहीं होगा। आईटीआर (इनकम टैक्स रिटर्न) न भरने वाली मेसर्स चार्टर्ड मर्केंटाइल एमबी लिमिटेड ने अपने खाते में 20 लाख की नकदी जमा कर जौहर ट्रस्ट के खाते में ट्रांसफर कर दी।
ट्रस्ट को छह करोड़ की नकदी ट्रांसफर करने वाले तत्कालीन एमएलसी पति ने मुलायम सिंह यादव के दबाव में दान देने की बात स्वीकारी। इसी तरह पांच हजार से कम नकदी की सैकड़ों इंट्री के जरिये ट्रस्ट में 1.13 करोड़ रुपये जमा किए गए। इस दान की रसीद या दानदाताओं के बारे में ट्रस्ट के पास कोई जानकारी नहीं है।
आयकर विभाग ने दान के रूप में ट्रस्ट को मिले करोड़ों के लेनदेन को बिना हिसाब-किताब वाली आय (कालाधन) मानकर जांच कर रहा है। 23 जून को आयकर विभाग, लखनऊ ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का चैरिटेबल दर्जा निरस्त किया था।
अब विभाग ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक की आय, व्यय, दान, विश्वविद्यालय निर्माण और जमीन खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज 29 जुलाई तक साक्ष्यों सहित प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया है। ट्रस्ट का पंजीकरण निरस्त किए जाने के बाद विभाग ने दोबारा जांच शुरू की है।
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विभाग के मुताबिक ट्रस्ट को मिले करोड़ों रुपये के दान में कई वित्तीय अनियमितताएं व संदिग्ध लेनदेन मिले। 2015-16 में सैयद नूरुल हसन ने मेसर्स चार्टर्ड मर्केंटाइल एमबी लिमिटेड के जरिये ट्रस्ट को 20 लाख रुपये दान मिला। यह रकम फर्म के बैंक खाते में पहले नकद जमा हुई, फिर ट्रस्ट को ट्रांसफर की गई।
विभाग के अनुसार नूरुल हसन आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करते थे। नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया। वित्तीय वर्ष 2013-14 और 2016-17 में सिटी एजूकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी तथा केएसडी चैरिटेबल ट्रस्ट से क्रमशः 5.18 करोड़ और एक करोड़ रुपये दान मिला।
इन संस्थाओं से जुड़े ओम प्रकाश ने लिखित बयान दिया कि उन्होंने तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के दबाव में आजम खां के जौहर ट्रस्ट को छह करोड़ रुपये दान दिए थे। विश्वविद्यालय के तत्कालीन सहायक वित्त अधिकारी परवेज मियां ने भी शपथपत्र में ऐसी रसीदें उपलब्ध न होने की बात स्वीकार की।