सात साल की मन्नतों के बाद पैदा हुआ था 9 महीने का मासूम... अस्पताल की लापरवाही ने छीनी सांसें, हंगामा
टांडा के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान नौ माह के बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। पुलिस ने शव को पोस्ट ...और पढ़ें

बादली में अस्पताल के सामने लगी भीड़ और मृतक अब्दुल रहमान का फाइल फोटो
HighLights
स्वजन ने किया हंगामा, कार्रवाई की मांग
संवाद सहयोगी, टांडा (रामपुर)। मुरादाबाद मार्ग पर बादली गांव के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान नौ माह के बच्चे की मौत होने पर स्वजन ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी।
क्षेत्र के गांव लांबाखेड़ा निवासी इकबाल के पुत्र अब्दुल रहमान को रविवार को उल्टी दस्त की शिकायत होने पर बादली के वेदान्ता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इकबाल व स्वजन के अनुसार सोमवार शाम बच्चे के लिए ब्लड की मांग की। स्वजन ने ब्लड की व्यवस्था कर स्टाफ को दे दिया।
ब्लड लगाने के बाद बच्चे की हालत और बिगड़ गई। लेकिन चिकित्सक व स्टाफ बच्चे के ठीक होने का भरोसा देता रहा। मंगलवार दोपहर बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत पर परिवार में कोहराम मच गया। स्वजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल संचालक व साफ के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।
उनका आरोप है कि अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण बच्चे की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल का चिकित्सक और स्टाफ मौके से फरार हो गए। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बलवान सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी कर स्वजन को काफी देर तक समझाने के बाद शांत किया।
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पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई की। स्वजन कार्रवाई तो चाह रहे थे लेकिन बच्चे के शव का पोस्ट मार्टम कराने को मना कर रहे थे। पुलिस पोस्ट मार्टम का दबाव बना रही थी। पुलिस का कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कोतवाली प्रभारी बलवान सिंह ने बताया कि शव पोस्ट मार्टम को भेज दिया है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पिता इकबाल ने बताया कि वह ट्रक ड्राइवर है। बताया कि काफी मन्नतों के सात साल बाद उसका यह बच्चा पैदा हुआ था। जिसकी स्टाफ की लापरवाही के कारण जान चली गयी।
बताया कि बच्चे की मौत से चिकित्सक ने बच्चे की मौत के बावजूद दस हजार रुपये जमा करा कर यह कह दिया कि बच्चे को कहीं और ले जाओ जबकि उसकी पहले ही मौत हो चुकी थी। इस अस्पताल में कई बच्चो व महिलाओं की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई भी की गई है। लेकिन कुछ समय बाद ही अस्पताल का संचालक व स्टाफ बदल जाता है और फिर से संचालन शुरू हो जाता है।