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    10 मिनट में की थी ₹5.7 लाख की डकैती, 13 साल बाद कोर्ट का फैसला; रामपुर बैंक लूट के 4 बदमाशों को 10-10 साल की जेल

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 10:18 PM (IST)

    बिलासपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा डकैती के 13 साल पुराने मामले में चार बदमाशों को 10 साल कारावास और 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। बदमाशों ने ...और पढ़ें

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    1. बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र में हुई थी घटना, पुलिस ने छह लोगों को किया था गिरफ्तार

    जागरण संवाददाता, रामपुर। बिलासपुर में बैंक आफ बड़ौदा की शाखा में डकैती डालने वाले चार बदमाशों को अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय ने 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। चारों पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना डाला है। अभियोजन के अनुसार, बैंक आफ बड़ौदा बिलासपुर शाखा के तत्कालीन प्रबंधक एसके गुप्ता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें कहा था कि 26 अप्रैल 2013 को वह रोजाना की तरह बैंक में काम कर रहे थे। अन्य कर्मचारी और कुछ ग्राहक भी बैंक में थे।

    सुबह 10.25 बजे पांच बदमाश तमंचे लेकर बैंक शाखा में घुस आए। बैंक के गार्ड गुरबाज सिंह को मारपीटकर उनकी बंदूक छीन ली। वहां मौजूद सभी लोगों से उनके मोबाइल भी छीन लिए। इसके बाद गन प्वाइंट पर लेकर सभी को स्ट्रांग रूम में ले गए। कैश काउंटर और स्ट्रांग रूम में रखे 5,72,140 रुपये लूट लिए।

    बदमाश 10 मिनट में घटना को अंजाम देकर हम सभी को स्ट्रांग रूम में बंद करके फरार हो गए थे। पुलिस ने अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। इस दौरान छह बदमाशों के नाम प्रकाश में आए। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया था।

    इनमें मुरादाबाद के थाना छजलेट के फतेपुर विश्नोई हाल निवासी मुहल्ला बंगला गांव थाना नागफनी के सूरज रस्तोगी, मुरादाबाद के थाना मूंढापांडे के शिवपुरी निवासी विपिन, मुरादाबाद के थाना मझौला के एकता कालोनी के राहुल कुमार, थाना मूंढापांड के शिवपुरी के बाबी, उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंहनगर के थाना रुद्रपुर के मुहल्ला शिवनगर के गोरख उर्फ पर्वत और रुद्रपुर थाना क्षेत्र के रविंद्रनगर के उत्तम को जेल भेज दिया था।

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    बाद में सभी जमानत पर बाहर आ गए थे। पुलिस ने विवेचना पूरी कर उनके खिलाफ 23 जुलाई 2013 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया था।

    मुकदमे की सुनवाई के दौरान सूरज रस्तोगी और उत्तम के लगातार न्यायालय में अनुपस्थित रहने के कारण उनकी पत्रावली पृथक कर दी गई। अन्य चार के खिलाफ एक साथ सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने उन्हें झूठा फंसाए जाने का तर्क दिया, जबकि अभियोजन ने पांच गवाह और कई साक्ष्य पेश किए।

    सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश राजीव सरन ने विपिन, राहुल कुमार, बाबी और गोरख उर्फ पर्वत पर 31 जुलाई 2026 को दोष सिद्ध कर दिया था। सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। मंगलवार को चारों को 10 साल के कारावास और 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

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