चालान से बचने का अनोखा जुगाड़! नंबर प्लेट पर मोबिल पोतकर पुलिस पिकेट के सामने से भाग रहे ओवरलोड वाहन
स्वार, रामपुर में अवैध खनन का कारोबार फिर तेज हो गया है, जहां ओवरलोड वाहन नंबर प्लेट पर मोबिल पोतकर सीसीटीवी से बच रहे हैं। खनन माफिया का 'फील्डर नेटव ...और पढ़ें

दौड़ रहे बिना नंबर प्लेट लगे खनन के वाहन। जागरण
संवाद सहयोगी, स्वार (रामपुर)। तहसील क्षेत्र में एक बार फिर अवैध खनन का कारोबार रफ्तार पकड़ने लगा है। स्टोन क्रेशरों का संचालन शुरू होते ही ओवरलोड खनिज से भरे वाहन स्वार-रामपुर, स्वार-बिलासपुर और स्वार-केलाखेड़ा मार्ग पर दिन-रात फर्राटा भर रहे हैं। इनमें कई वाहन बिना नंबर प्लेट के चल रहे हैं, जबकि कुछ वाहन स्वामी चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट पर मोबिल पोत रहे हैं, जिससे सीसीटीवी कैमरों में वाहन का नंबर स्पष्ट दिखाई न दे।
हैरानी की बात यह है कि नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने वाले इन वाहनों पर संबंधित विभागों की कार्रवाई बेहद सीमित नजर आती है। लोगों का कहना है कि ओवरलोड वाहनों की तेज रफ्तार से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। साथ ही भारी वाहनों के कारण सड़कों को भी नुकसान पहुंच रहा है।
बताया जाता है कि जब भी अवैध खनन की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित होती हैं, तब जिला प्रशासन सख्ती दिखाते हुए आरटीओ और खनन विभाग की संयुक्त टीम क्षेत्र में अभियान चलाती है। एक-दो दिन तक वाहनों की जांच और चालान की कार्रवाई होती है, लेकिन इसके बाद अभियान ठंडा पड़ जाता है।
नतीजतन खनन कारोबारी फिर बेखौफ होकर ओवरलोड वाहनों का संचालन शुरू कर देते हैं। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों के खिलाफ नियमित अभियान चलाया जाए। बिना नंबर प्लेट और नंबर छिपाकर चलने वाले वाहनों को तत्काल सीज किया जाए, ताकि अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
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नियमों को धता बता रहे खनन कारोबारी, ओवरलोडिंग, बिना नंबर प्लेट वाहन चलाना और नंबर प्लेट को जानबूझकर अस्पष्ट करना मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है। इसके बावजूद क्षेत्र में ऐसे वाहन खुलेआम दौड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि नियमित और निष्पक्ष कार्रवाई हो तो अवैध खनन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
अवैध खनन का 'फील्डर नेटवर्क' सक्रिय, पज-पली लेते अफसरों की लोकेशन
तहसील क्षेत्र में अवैध खनन के कारोबार को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि खनन कारोबारियों ने अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कथित तौर पर अपना एक 'फील्डर नेटवर्क' तैयार कर रखा है।
दावा किया जाता है कि जैसे ही जिला मुख्यालय या तहसील स्तर के किसी अधिकारी के कार्यालय अथवा आवास से निकलने की सूचना मिलती है, यह जानकारी तत्काल संबंधित कारोबारियों तक पहुंचा दी जाती है।
चर्चाओं के अनुसार, सूचना मिलते ही ओवरलोड खनिज से भरे वाहनों को मुख्य मार्गों से हटाकर सुनसान स्थानों अथवा स्टोन क्रेशरों के परिसर में खड़ा कर दिया जाता है। जब यह संदेश मिलता है कि जांच टीम वापस लौट गई है या रास्ता साफ है, तब वाहन दोबारा सड़कों पर दौड़ने लगते हैं।
लोगों का कहना है कि नगर के कई प्रमुख चौराहों और चाय की दुकानों के आसपास कुछ लोग घंटों तक वाहनों और अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखते दिखाई देते हैं। इन स्थानों से मोबाइल फोन और मैसेज के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान होने की बातें भी सामने आती रहती हैं।
देर रात तक खुलने वाली कुछ चाय की दुकानें भी इन लोगों के जमावड़े का केंद्र बनी रहती हैं। रात्रि में कई कई घंटे काली काली गाड़ियों में तहसील मुख्यालय या अधिकारियों के आवास के आसपास इन वाहनों को देखा जा सकता है।
कुछ माह पूर्व तहसील टांडा क्षेत्र में अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए अवैध खनन की गतिविधियों की सूचना देने वाले कुछ फील्डरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद वहां कुछ समय तक अवैध खनन पर अंकुश देखने को मिला था।