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    रामपुर सीएचसी में बड़ा फर्जीवाड़ा: भर्ती हुई छोटी बहन, डिस्चार्ज में बड़ी बहन का नाम; नवजात के लिए भिड़ीं दो सगी बहनें

    Updated: Wed, 11 Mar 2026 11:49 PM (IST)

    रामपुर में एक छोटी बहन ने अपना नवजात बच्चा बड़ी बहन को दे दिया, लेकिन डेढ़ महीने बाद वापस मांगा। विवाद पुलिस तक पहुंचा, जिसने बच्चे को असली मां को लौट ...और पढ़ें

    स्वार थाने में बच्चा वापस मिलने के बाद पति के साथ खड़ी जूबी जागरण

    स्वार थाने में बच्चा वापस मिलने के बाद पति के साथ खड़ी जूबी जागरण

    HighLights

    1. सीएचसी के रिकार्ड में भी घपलेबाजी का खेल उजागर

    संवाद सहयोगी, स्वार (रामपुर)। पहले तो छोटी बहन ने नि:संतान बड़ी बहन को अपना नवजात बच्चा सौंप दिया। डेढ़ महीने बाद उसकी ममता जागी तो बच्चा वापस करने के लिए दबाव बनाया। बड़ी बहन ने बच्चा वापस करने से इंकार किया तो विवाद थाने पहुंच गया। छह घंटे की पंचायत के बाद पुलिस ने छोटी बहन को बच्चा वापस करा दिया। वहीं बड़ी बहन रोती-बिलखती वापस लौट गई। इस प्रकरण में सीएचसी के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किए जाने का भी राजफाश हो गया।

    मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा स्थित मुहल्ला फतेहगंजउल्ला निवासी जूबी पत्नी मोनिस रजा ने बुधवार दोपहर डेढ़ बजे स्वार थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि जब वह साढ़े आठ माह की गर्भवती थी, तभी गांव चाऊपुरा मसवासी निवासी उसकी मां शाहजहां और बहन अंजुम व उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर के बाजपुर थाना क्षेत्र के गांव कनौरा निवासी बहनोई शाहनवाज उसके घर आए।

    ये लोग उसे सुरक्षित प्रसव कराने के बहाने अपने साथ गांव चाऊपुरा ले गए। 30 जनवरी की रात आठ बजे स्वार के सरकारी अस्पताल में उसे उसकी बड़ी बहन अंजुम ने भर्ती कराया। 31 जनवरी की दोपहर 3:30 बजे उसने पुत्र को जन्म दिया। आरोप लगाया कि जब उसने अपने बेटे को देखने की इच्छा जताई तो मां और बहन ने बताया कि बच्चा मशीन में रखा है।

    उसी दिन अस्पताल से छुट्टी कराकर उसे घर ले गए। विरोध करने पर मां और बहन ने उसे मारा पीटा। अंजुम ने धमकी दी कि यदि उसने बच्चा वापस लेने की कोशिश की तो उसे और उसके बेटे को जान से मार दिया जाएगा। पुलिस ने अंजुम से संपर्क कर उसे थाने बुला लिया। उसने पुलिस को बताया कि जूबी के पहले से तीन बच्चे थे जबकि, वह नि:संतान थी।

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    जूबी ने उससे कहा कि वह उसकी देखभाल कर प्रसव का खर्च उठा ले तो वह बच्चा उसको दे देगी। इसके चलते उसने चार महीने जूबी का सारा खर्च उठाया। सुरक्षित प्रसव भी कराया। जूबी ने उसे बच्चा सौंप दिया। डेढ़ महीने के बाद उसकी नीयत बदल गई।

    पुलिस ने कानून का हवाला देकर अंजुम से बच्चा जूबी को वापस दिला दिया। इस पर अंजुम थाने में ही फूट-फूटकर रोई। उसका हाल देख पुलिसकर्मियों की भी आंखें छलक उठीं। थाना प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि असल मां जूबी को उसका बच्चा वापस दिला दिया गया है।

    सीएचसी में फर्जीवाड़े का राजफाश

    छोटी बहन जूबी द्वारा बड़ी बहन को नवजात देने के मामले में सीएचसी के दस्तावेजों में भी फर्जीवाड़ा करने के खेल का राजफाश हुआ है। सीएचसी के प्रसव रजिस्टर में 30 जनवरी 2026 को अस्पताल में भर्ती हुई महिला का नाम जूबी पत्नी शाहनवाज दर्ज किया गया। जबकि प्रसव होने के बाद 31 जनवरी को उसी महिला की जगह रिकार्ड में अंजुम पत्नी शाहनवाज दर्ज कर दिया गया।

    मतलब साफ है कि भर्ती जूबी हुई और डिस्चार्ज अंजुम को दिखाया गया। इसके जरिये बच्चे पर अंजुम की दावेदारी मजबूत करने का खेल खेला गया। चिकित्सा प्रभारी राजीव चंदेल ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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