फिंगरप्रिंट ही नहीं, अब पुलिस की 'नजर' आपकी आंखों की पुतलियों पर भी; रामपुर पुलिस का नया डिजिटल वार
रामपुर पुलिस अब अपराधियों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट के साथ-साथ आंखों की पुतलियों का भी रिकॉर्ड रख रही है। जिले में 9047 फिंगरप्रिंट और 405 पुतलियों ...और पढ़ें

एसपी कार्यालय में एमसीयू में अभियुक्त के रेटिना की फोटो लेता पुलसिकर्मी। जागरण
HighLights
पुलिस के कंप्यूटर में 9047 अभियुक्तों के फिंगर प्रिंट व 405 की पुतलियां कैद
मिलक में मिले अज्ञात शव की फिंगर प्रिंट से हुई शिनाख्त, दिल्ली में दर्ज था मुकदमा
अनिल अवस्थी, रामपुर। पुलिस कंप्यूटर में कैद अपराधियों की अंगुलियों के निशान उनका भेद खोल रहे हैं। इससे एक कदम आगे बढ़कर अब पुलिस अपराधियों की आंखों की पुतलियां भी कैद करने लगी है। रामपुर में जहां अब तक 9047 अभियुक्तों के फिंगर प्रिंट लिए गए हैं वहीं 405 लोगों की पुतलियों को भी कैद कर लिया है। इसके जरिये पुलिस मिलक में मिले एक अज्ञात शव की शिनाख्त कर दिल्ली के कश्मीरी गेट थाने में उसकी गिरफ्तारी का राज भी खोल चुकी है।
पुलिस की गिरफ्त में आए अब हर अभियुक्त का ब्योरा कंप्यूटर में दर्ज किया जा रहा है। इसके लिए विशेषज्ञ पुलिसकर्मियों की टीम लगाई गई है। किसी अभियुक्त को न्यायालय में पेश करने से पूर्व एसपी कार्यालय में स्थित कंप्यूटर सेल में उसकी अंगुलियों की छाप व पुतलियों को स्कैन किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।
अंगुलियों की छाप जहां नफीस (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) पोर्टल में संरक्षित हो रही है वहीं आंखों की पुतलियों का संकलन सीआरपीआइ एक्ट के तहत एमसीयू (मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट) में किया जा रहा है। रामपुर में नफीस पोर्टल एक जुलाई 2022 से काम कर रहा है वहीं एमसीयू पिछली 27 नवंबर से शुरू हुई है।
गिरफ्तार अभियुक्तों का सारा डाटा यहां से नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पास एकत्र हो रहा है। इसके चलते देश भर में कहीं भी अपराध होने पर घटनास्थल से लिए गए फिंगर प्रिंट का मिलान एनसीआरबी अपने पोर्टल पर करता है। अगर संबंधित अपराधी की अंगुलियों की छाप पहले किसी अपराध के दौरान नफीस पोर्टल में दर्ज हो चुकी है तो आसानी से उसकी पहचान उजागर हो जाती है।
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एएसपी अनुराग सिंह ने बताया कि पिछले नवंबर में मिलक में एक अज्ञात शव मिला था। पुलिस टीम ने उसकी अंगुलियों के निशान लेकर नफीस पोर्टल से मिलान कराया तो पता चला कि मृतक सूरज है जिसकी दिल्ली के कश्मीरी गेट थाने में वर्ष 2021 में चोरी के आरोप में गिरफ्तारी हुई थी।
इसके बाद गहराई से जांच कराई तो पता चला कि वह मूलत: मिलक का ही रहने वाला था। दिल्ली में गिरफ्तारी के दौरान उसने अपना मूल पता छिपा लिया था। इस तरह अब कोई भी अपराध होने पर घटनास्थल से पुलिस टीम फिंगर प्रिंट एकत्र कर उनका मिलान नफीस पोर्टल पर अवश्य कराती है। इससे वारदात के राजफाश की संभावना बढ़ जाती है।
नफीस की रैंकिंग में रामपुर टाप-थ्री जिलों में शामिल
नफीस पोर्टल के लिए घटनास्थल से फिंगरप्रिंट लेने के लिए लखनऊ में 16 मार्च को तकनीकी विभाग की ओर से प्रतियोगिता कराई गई थी। इसमें सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शीर्ष तीन जिलों में मथुरा, रामपुर और बुलंदशहर का नाम सामने आया। इसको लेकर पुलिस तकनीकी सेवाएं विभाग के एडीजी नवीन अरोड़ा ने रामपुर में तैनात मुख्य आरक्षी लवलेश कुमार को एक हजार की धनराशि से पुरस्कृत किया है।
नफीस पोर्टल व एमसीयू में लगातार अभियुक्तों के फिंगर प्रिंट व आंखों की पुतलियां संरक्षित की जा रही हैं। आपराधिक घटना के राजफाश में ये पुलिस की मददगार बन रही हैं। इसमें कुशल पुलिसकर्मियों की टीम लगाई गई है जोकि प्रदेश स्तर पर सम्मानित हुई है।
- विद्या सागर मिश्र, पुलिस अधीक्षक
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