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    मयूर पर सवार होकर पृथ्वी मापने निकले कार्तिकेय, पर गणेश जी ने ऐसे बुद्धि से जीता शिव-पार्वती का दिल; जानें रोचक प्रसंग

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 10:57 PM (IST)

    रामपुर में श्री शिवमहापुराण कथा के छठे दिन पंडित देवव्रत शुक्ल ने गणेश विवाह और कार्तिकेय के पराक्रम का प्रसंग सुनाया। उन्होंने माता-पिता की सेवा को स ...और पढ़ें

    श्री शिव महापुराण कथा में प्रवचन करते कथा वाचक देवव्रत शुक्ल। जागरण

    श्री शिव महापुराण कथा में प्रवचन करते कथा वाचक देवव्रत शुक्ल। जागरण

    संवाद सहयोगी, रामपुर। श्री शिवमहापुराण कथा के छठे दिन कथा व्यास पंडित देवव्रत शुक्ल ने श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के विवाह तथा भगवान कार्तिकेय की वीरता का प्रसंग सुनाते हुए धर्म, ज्ञान और पराक्रम का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है।

    कृष्णा विहार कालोनी में आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ पूर्व मंत्री शिवबहादुर सक्सेना ने पूजन कर किया। इसके बाद कथा व्यास देवव्रत शुक्ल भगवान शिव और माता पार्वती के दोनों पुत्र भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के विवाह को लेकर रोचक प्रसंग सुनाया।

    कहा कि जब दोनों के विवाह की बात चली तो यह तय किया गया कि जो पहले संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा कर लौट आएगा, उसी का विवाह पहले होगा। भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े, जबकि भगवान गणेश ने अपने माता-पिता शिव और पार्वती की सात बार परिक्रमा की।

    उन्होंने कहा कि माता-पिता ही संपूर्ण संसार के समान हैं। भगवान गणेश की इस बुद्धिमत्ता और माता-पिता के प्रति श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव और माता पार्वती ने उनका विवाह रिद्धि और सिद्धि के साथ संपन्न कराया।

    कथा व्यास ने कहा कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है तथा इससे सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसके बाद उन्होंने भगवान कार्तिकेय द्वारा नरकासुर के वध का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि नरकासुर अत्यंत अत्याचारी और अहंकारी असुर था, जिसने देवताओं, ऋषियों और आम जनता को अपने अत्याचारों से त्रस्त कर रखा था।

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    उसके बढ़ते अत्याचारों से संपूर्ण सृष्टि भयभीत हो गई थी। तब भगवान कार्तिकेय ने देवताओं की प्रार्थना स्वीकार करते हुए युद्ध किया और अपने अद्भुत पराक्रम से नरकासुर का संहार कर धर्म की पुनः स्थापना की। कथा व्यास ने कहा कि जब-जब अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में उसका अंत कर धर्म की रक्षा करते हैं।

    उन्होंने कहा कि जीवन में ज्ञान, विवेक, माता-पिता का सम्मान, धर्म के प्रति आस्था तथा अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस होना चाहिए। यही भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के जीवन से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख है।

    कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का पूजन-अर्चन किया तथा भजन-कीर्तन के साथ वातावरण शिवमय हो गया। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष पंडित रामदत्त शर्मा, अमर सक्सेना, सत्यप्रकाश सक्सेना, नरेश चन्द्र शर्मा, भगवत सरन राठौर, महीलाल, संध्या अग्रवाल, हरपाल सिंह, वीके जौहरी आदि उपस्थित रहे।

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