17 मई से होगी मलमास की शुरुआत: मांगलिक कार्यों पर लगेगा 30 दिन का ब्रेक, इस दिन से शुरू होंगे शुभ मुहूर्त
17 मई से मलमास शुरू हो रहा है, जिसके कारण अगले 30 दिनों तक विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। 17 मई से मलमास शुरू हो रहा है। अब अगले 30 दिन तक शहनाई नहीं गूंजेगी। जून माह में शादी के पांच मुहूर्त है। वहीं जुलाई माह में दो मुहूर्त है। मलमास को धर्म-कर्म के लिए श्रेष्ठ माना जाता है लेकिन विवाह सहित मांगलिक कार्य इसमें वर्जित माने गए हैं। इस बार ज्येष्ठ मास 29 जून को समाप्त होगा। वहीं 16 जुलाई से 8 अगस्त तक गुरु का तारा अस्त रहने से विवाह मुहूर्त नहीं होंगे।
हिंदू धर्म में शादियों के लिए सबसे शुभ माने जाने वाले ज्येष्ठ महीने में इस बार शहनाइयां नहीं गूंजेंगी। 17 मई से 15 जून तक अधिकमास (मलमास) लगने के कारण सभी मांगलिक कार्यों पर पूर्ण विराम लग गया है। ज्योतिषाचार्य व पंडित सुदीप जोशी के अनुसार ज्येष्ठ कृष्णपक्ष की द्वादशी से अमावस्या तक मासांत दोष लग रहा है।
इसके साथ ही 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या पर गुरु और शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह आदि कार्य वर्जित हो गए हैं। 17 मई से शुरू हुआ यह अधिकमास 15 जून तक चलेगा, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
अधिकमास जुड़ने से इस बार हिंदू वर्ष विक्रम संवत 2083 कुल 13 महीनों का होगा। इस अतिरिक्त महीने के कारण साल के उत्तरार्ध में आने वाले प्रमुख त्योहारों का पूरा कैलेंडर खिसक गया है। अब रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, पितृपक्ष, नवरात्र, दीपावली और छठ महापर्व पिछले वर्षों की तुलना में 15 से 20 दिन देरी से आएंगे।
खबरें और भी
इस बार ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून को समाप्त होगा। ज्येष्ठ मास के मध्य में पुरुषोत्तम मास आएगा, जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा। 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिकमास होने के कारण विवाह मुहूर्त नहीं रहेंगे। ज्योतिषाचार्य व पंडित सुदीप जोशी ने बताया कि 16 जुलाई से आठ अगस्त तक गुरु का तारा अस्त रहने से विवाह मुहूर्त नहीं होंगे।
25 जुलाई से 20 नवंबर तक हरि शयन काल होने से भी विवाह नहीं होंगे। इस प्रकार जून से दिसंबर तक कुल 13 दिन विवाह के मुहूर्त रहेंगे। बताया कि हिंदू पंचांग में 12 महीने होते हैं, जिनका आधार चंद्रमा की गति होती है।
सौर कैलेंडर में एक वर्ष 365 दिन और लगभग 6 घंटे का होता है, जबकि हिंदू पंचांग में चंद्र वर्ष 354 दिन का माना जाता है। दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो तीन वर्षों में मिलकर लगभग एक माह बन जाता है।
इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीन वर्ष में एक अतिरिक्त चंद्र मास आता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। उन्होंने बताया कि अधिकमास में विष्णु सहस्रनाम जप और भगवद् गीता का पाठ करना श्रेष्ठ माना गया है। इस अवधि में अनुष्ठान, उपवास और पूजा-पाठ से ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है, जबकि वैदिक परंपरा में इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
विवाह के मुहूर्त
- जून- 19, 22, 27, 28, 29
- जुलाई- 7, 8
- नवंबर- 24, 25, 29
- दिसंबर- 2, 3, 9
यह भी पढ़ें- सावधान! भीषण गर्मी में ये खराब आदत महिलाओं के लिए बन रही 'साइलेंट किलर', डॉक्टरों ने दी चेतावनी