रसोई के मसालों से बदली किस्मत: 10 महिलाओं ने खड़ा किया ₹7.20 लाख का ब्रांडेड 'मसाला' बिजनेस
पवसरा की 10 महिलाओं ने आशा महिला मंडल स्वयं सहायता समूह के तहत 'सोडहम बाबा शुद्ध मसाले' ब्रांड बनाया है। यह समूह सालाना 7.20 लाख रुपये का कारोबार कर र ...और पढ़ें

ग्राम पंचायत पवसरा में मसाले तैयार करतीं आशा महिला मंडल स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। जागरण
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आशा महिला मंडल स्वयं सहायता समूह में शामिल 10 महिलाएं लिख रहीं नई इबारत
योगेंद्र यादव, रजपुरा (संभल)। गांव की रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाले हल्दी, मिर्च और धनिया जैसे मसाले अब पवसरा की महिलाओं के लिए सिर्फ स्वाद का नहीं बल्कि सम्मान, आत्मनिर्भरता और नई पहचान का प्रतीक बन गए हैं। कभी घर-परिवार तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज अपने हाथों से तैयार किए गए सोडहम बाबा शुद्ध मसाले ब्रांड के जरिए बाजार में अलग पहचान बना रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से शुरू हुआ यह छोटा प्रयास अब ग्रामीण महिला उद्यमिता का सफल माडल बन चुका है।
रजपुरा विकासखंड की ग्राम पंचायत पवसरा में पांच जुलाई 2012 को गठित आशा महिला मंडल स्वयं सहायता समूह की शुरुआत महज दस महिलाओं से हुई थी। सरकार की ओर से समूह को 2,500 रुपये स्टार्टअप फंड, 15 हजार रुपये रिवाल्विंग फंड (आरएफ) और 1.10 लाख रुपये कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआइएफ) उपलब्ध कराया गया।
इसी सहयोग ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। आज समूह की सदस्य रूपवती, नीरज, अतरकली, अखिलेश कुमारी, भूरी, ईमाला, केकई, नीलम कुमारी, शकुंतला और शांति मिलकर मसालों की खरीद से लेकर साफ-सफाई, सुखाई, पिसाई, मिश्रण, पैकिंग और बिक्री तक का पूरा काम संभालती हैं।
समूह के उत्पादों में हल्दी पाउडर, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और गरम मसाला प्रमुख हैं। गुणवत्ता और शुद्धता ने इन उत्पादों को स्थानीय बाजार में अलग पहचान दिलाई है। समूह ने अपने उत्पादों को व्यवस्थित बाजार तक पहुंचाने के लिए गुणवत्ता के मानकों पर भी विशेष ध्यान दिया।
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सोडहम बाबा शुद्ध मसाले ब्रांड को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) का लाइसेंस प्राप्त है, जबकि समूह जीएसटी के तहत पंजीकृत है। यही वजह है कि अब स्थानीय दुकानदार भी इस ब्रांड पर भरोसा जता रहे हैं। समूह द्वारा तैयार 200 ग्राम हल्दी पाउडर 60 रुपये तथा 50 ग्राम गरम मसाला 50 रुपये में बेचा जाता है।
गरम मसाला काली मिर्च, लौंग, सौंठ, जायफल, लाल इलायची, जीरा, दालचीनी, जावित्री, कबाब चीनी, पीपल, सफेद इलायची, बादियान और पोस्त जैसे मसालों के संतुलित मिश्रण से तैयार किया जाता है, जिससे स्वाद और गुणवत्ता दोनों बनी रहती हैं।
हर महीने 60 हजार की ब्रिकी, सालाना टर्नओवर 7.20 लाख तक पहुंचा
आशा महिला मंडल स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रूपवती ने बताया कि वर्तमान में हर महीने लगभग 60 हजार रुपये की बिक्री होती है। कच्चा माल, पिसाई, पैकिंग, परिवहन और अन्य खर्चों पर करीब 52 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसके बाद समूह को करीब 8 हजार रुपये का लाभ प्राप्त होता है।
इस तरह समूह का सालाना कारोबार लगभग 7.20 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। महिलाओं का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब वे अपनी कमाई से परिवार की जरूरतें पूरी करने में सहयोग कर रही हैं, बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर रही हैं और नियमित बचत भी कर रही हैं।