Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    करोड़ों का बीमा घोटाला: नोएडा से वाराणसी तक 'कुर्की' पर ब्रेक, जानें क्यों रुक गई पुलिस की कार्रवाई!

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 11:15 PM (GMT+05:30)

    बीमा गिरोह के सदस्यों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई मकर संक्रांति अवकाश और पुलिस बल की कमी के कारण चौथे दिन भी पूरी नहीं हो सकी। वाराणसी में राजस् ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    HighLights

    1. मकर संक्रांति के अवकाश होने के चलते नहीं पहुंची राजस्व की टीमें

    संवाद सहयोगी, जागरण, बहजोई (संभल)। बीमा गिरोह के सदस्यों के खिलाफ प्रस्तावित कुर्की की कार्रवाई चौथे दिन भी पूरी नहीं हो सकी। क्योंकि गुरुवार को मकर संक्रांति का अवकाश होने के चलते वाराणसी में राजस्व विभाग की टीम मौके पर नहीं जा सकी। जिससे वहां कुर्की की औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई।

    उधर, नोएडा में भी कुर्की की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। यहां अब संभल डीएम की ओर से नोएडा डीएम को पत्र भेजते हुए संबंधित संपत्तियों का रिसीवर सदर तहसील के तहसीलदार को नामित किया गया है। वाराणसी जिले के कैंट थाना क्षेत्र के गांव फुलवरिया में बहजोई के उपनिरीक्षक महेश कुमार मौजूद हैं। जहां ओंकारेश्वर मिश्रा की 1.26 करोड़ रुपये की संपत्ति पर कुर्की की प्रक्रिया प्रस्तावित है।

    दो मकानों में रहते हैं 20 लोग

    उधर, गौतम बुद्ध नगर जिले में बीमा गिरोह से जुड़े गौरव शर्मा और सचिन शर्मा की संपत्तियों पर भी कुर्की की कार्रवाई नहीं हो पाई। जहां ग्रेटर नोएडा के ब्लाक डी सेक्टर गामा-1 में एक आवासीय मकान और ब्लाक सी सेक्टर अल्फा-1 में भी एक मकान कुर्क किया जाना है। इन दोनों मकानों में 20 से अधिक लोग रहते हैं और परिवार में महिलाएं भी शामिल हैं। जिसके चलते भारी पुलिस बल की आवश्यकता है।

    लेकिन, मौके के लिए आवश्यक संख्या में फोर्स उपलब्ध नहीं हो सका। बता दें कि गिरोह का सुराग 18 जनवरी 2025 की रात लगा। उस रात एएसपी दक्षिणी अनुकृति शर्मा और रजपुरा पुलिस फोर्स ने तेजी से भाग रही एक काली स्कार्पियो रुकवाई थी। तलाशी में कार से 11.44 लाख रुपये बरामद हुए। वाहन में वाराणसी के ओंकारेश्वर मिश्रा उर्फ करन और बबराला निवासी अमित कुमार थे।

    खबरें और भी

    ग‍ि रोह पर दर्ज हैं 25 मुकदमें

    दोनों के पास से चार मोबाइल फोन और कई क्रेडिट-डेबिट कार्ड, पैन व आधार कार्ड समेत 19 दस्तावेज मिले थे। इनके मोबाइल फोनों में 30 हजार से अधिक फर्जी बीमा पालिसी, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य कागज मिले थे। जांच में पता चला कि ओंकारेश्वर मिश्रा एक निजी कंपनी में थर्ड पार्टी इन्वेस्टिगेटिंग आफिसर है और पद का दुरुपयोग कर उसने बीमा क्लेम गिरोह खड़ा किया।

    इस गिरोह पर 25 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 70 से अधिक लोग जेल गए। इनमें असम, दिल्ली, यूपी, बिहार और झारखंड के लोग भी शामिल हैं। संभल प्रशासन ने गैंग्स्टर एक्ट के तहत गिरोह के सरगना ओंकारेश्वर मिश्रा, सचिन शर्मा उर्फ मोनू और सचिन के भाई गौरव शर्मा की कुल 11.89 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किए हैं।

    इसमें सोमवार को सचिन शर्मा उर्फ मोनू की 9.19 करोड़ रुपये की संपत्ति संभल के बबराला, शिवपुरी स्थित दो मकान, एक ट्रैक्टर एजेंसी और एक प्लाट पर मुनादी करते हुए कुर्की की गई थी। प्रभारी निरीक्षक बहजोई संत कुमार ने बताया कि मकर संक्रांति का अवकाश होने के चलते कुर्की की कार्रवाई में देरी हुई है।


    यह भी पढ़ें- पुलिस के पास नहीं होती 32 बोर की पिस्टल, फिर आलम को गोली किसने मारी? संभल हिंसा का अनसुलझा सच