संभल महाघोटाला: ₹101 करोड़ की सरकारी जमीन पर बनी मेंथा और गत्ता फैक्ट्री सील, पूर्व पालिकाध्यक्ष भूमिगत
संभल में 101 करोड़ रुपये की 38 बीघा ग्राम सभा भूमि घोटाले में प्रशासन ने अवैध कब्जों पर कार्रवाई शुरू की है। राजस्व विभाग ने धर्मकांटा, मेंथा और गत्ता ...और पढ़ें

संभल मुरादाबाद रोड किनारे ग्राम सभा की भूमि पर किए अवैध निर्माण के गेट पर सील लगवाते तहसीलदार धीरेंद्र सिंह। जागरण
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रिमांड में तत्कालीन ईओ के बयान के बाद शुरू हुई कार्रवाई, तत्कालीन पालिकाध्यक्ष भूमिगत
जागरण संवाददाता, संभल। ग्राम पंचायत शहजादी सराय के गांव तश्तपुर गौसाईं में 101 करोड़ रुपये की 38 बीघाग्राम सभा भूमि घोटाले में अब प्रशासन ने अवैध कब्जों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार को राजस्व विभाग की टीम ने भूमि पर बने अवैध धर्मकांटा, मेंथा और गत्ता फैक्ट्री, गोदाम सहित पांच व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया। यह कार्रवाई ग्राम प्रधान कुंवरपाल की शिकायत पर की गई है।
सोमवार को ग्राम प्रधान कुंवर पाल ने तहसीलदार धीरेंद्र सिंह को शिकायत पत्र देकर कहा था कि भूमि ग्राम सभा में दर्ज होने के बाद भी वहां व्यवसायिक गतिविधियां चालू हैं और भूमि पर अभी भी कई लोगों का कब्जा बना हुआ है। अब यहां पर अवैध निर्माणों को हटवाकर ग्राम पंचायत का दखल कराया जाए।

मंगलवार को तहसीलदार राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के बाद सड़क के दोनों तरफ स्थित गाटा संख्या 423, 440, 378, 376, 518 और 424 में बनी गत्ता फैक्ट्री, मैंथा फैक्ट्री, धर्मकांटा, अन्य गोदाम व दुकान को सील कर दिया गया। गाटा संख्या 378 पर वर्ष 2017 में बने धर्मकांटा और मेंथा फैक्ट्री नई दिल्ली निवासी प्रदीप कुमार अग्रवाल का बताया गया है, जिनका नाम इस प्रकरण में दर्ज एफआइआर में भी शामिल है।
इतना ही नहीं, इन अवैध निर्माणों में पूर्व पालिकाध्यक्ष हाजी नुसरत इलाही के भतीजे शारिक द्वारा करीब पौने 11 बीघा पर गत्ता फैक्ट्री है। बता दें कि शासन ने 11 अगस्त 1954 को गजट जारी कर ग्राम तश्तपुर गोसाईं की लगभग 38 बीघा (5.06 एकड़) जमीन गैरआबाद घोषित करते हुए इसका प्रबंधन नगर पालिका परिषद संभल को सौंप दिया गया था।
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सन् 1967 में जमीन का पट्टा तत्कालीन चेयरमैन चिरंजीलाल ने सईदुल रहमान के नाम करा दिया था। चिरंजीलाल का देहांत हो चुका है। वर्ष 1995 में गांव चकबंदी प्रक्रिया में आया। 1997 में सईदुल ने जमीन अपनी करने का आवेदन किया।
वहीं, क्षेत्र के ही अमीरचंद्र ने भी जमीन पर दावा किया। साल दर साल विभिन्न प्रक्रिया के बीच 15 फरवरी 2008 को तत्कालीन उपसंचालक चकबंदी खेम सिंह खड़क ने सईदुल के पक्ष में आदेश किया। उनके तबादले के बाद वर्ष नगर पालिका परिषद ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।

इस समय हाजी नुसरत चेयरमैन थे। उच्च न्यायालय में प्रक्रिया विचाराधीन थी। वर्ष 2013 में तत्कालीन चेयरमैन हकीम कौसर के इशारे पर ही ईओ राजकुमार गुप्ता ने याचिका वापस ले ली थी। इसी दौरान सईदुल रहमान और उसकी मौत के बाद उत्तराधिकारियों ने भूमि का अधिकांश भाग अन्य व्यक्तियों को बेच दिया था।
तीन जून 2026 को जिला शासकीय अधिवक्ता ने पुनरीक्षण प्रार्थना पत्र उपसंचालक चकबंदी (अपर जिलाधिकारी न्यायिक) के समक्ष प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद उपसंचालक चकबंदी ओमप्रकाश अंजोर ने पाया कि तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष को इस प्रकार का पट्टा देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। उन्होंने पूर्व के आदेश निरस्त किए।

इसके बाद 27 जून को प्रशासन ने जगह पर वापस कब्जा ग्राम सभा को सौंपा था। प्रकरण में 29 जुलाई को तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता, रिटायर्ड मानचित्रक शहाबुद्दीन, पैरोकार मजीद खान, तत्कालीन चकबंदी उपसंचालक खेम सिंह खड़क, सईदुल हसन के बेटे इबादुर रहमान खान, एहसानुर रहमान खान, शाहजहां बेगम, इफ्तारा, बसपा नेता साजिद अली उनके तारिक अली, फारिक अली, शाकिर अली, शारिक अली, पूर्व चेयरमैन हाजी नुसरत इलाही का भतीजा शारिक शाबूर, मोहम्मद मुजाहिद, रफीक, शाहजहां, अख्तरी, मोहम्मद उमर, मुनाजिर, मोहम्मद अजीम, धर्मेंद्र, मधु खुराना, विजय गुप्ता, रूपाली गुप्ता, फुरकान, इमरान, आजम खान, प्रदीप कुमार अग्रवाल, मकसूद आलम वारसी, हरजीत सिंह और अज्ञात समेत 32 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है।

तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। रविवार को इस प्रकरण में पूछताछ के लिए सहायक नगर आयुक्त राजकुमार गुप्ता को सुबह आठ से शाम सात बजे तक रिमांड पर लाया गया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि यह पूरा खेल पूर्व पालिकाध्यक्ष कौसर अहमद के कहने पर किया गया था।
ग्राम प्रधान ने शिकायत की थी कि अभी भी ग्राम समाज की 38 बीघा भूमि पर लोगों का कब्जा बना हुआ है और वह भूमि खाली नहीं कर रहे हैं। जिसके बाद मौके पर पहुंचकर सभी निर्माणों पर सील की कार्रवाई की गई है।
- धीरेंद्र सिंह, तहसीलदार, संभल।
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