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    'बिल संभल में, बिजली बदायूं से...' अधिकारियों के फुटबॉल बने इन 53 गांवों के ग्रामीण, महीनों से अंधेरा

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 05:28 AM (GMT+05:30)

    गुन्नौर तहसील के 53 गांवों में बिजली आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट है, जहां बिल संभल में जमा होते हैं लेकिन बिजली बदायूं से मिलती है। ग्रामीणों को भीषण ग ...और पढ़ें

    गंगुरा गांव में खराब पड़ा ट्रांसफार्मर। जागरण

    गंगुरा गांव में खराब पड़ा ट्रांसफार्मर। जागरण

    HighLights

    1. गांव गंगुरा में कई महीने से फुंके हैं दो ट्रांसफार्मर, एक ट्रांसफार्मर से कुछ उपभोक्ता ले रहे बिजली

    जागरण संवाददाता, जुनावई (संभल)। बदायूं का हिस्सा रही तहसील गुन्नौर संभल जिले का हिस्सा बनी तो ग्रामीणों को उम्मीद जागी कि अब बिजली व्यवस्था में सुधार होगा लेकिन, सिस्टम की उदासीनता के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका। करीब 15 वर्ष बीतने को हैं और गुन्नौर के 53 गांवों की बिजली व्यवस्था बदायूं के भरोसे है। मुश्किल से चार घंटे बिजली मिल रही है और भीषण गर्मी में हाहाकार मचा है।

    बिजली व्यवस्था गड़बड़ाने पर ग्रामीणों को बदायूं जिले की दौड़ लगानी पड़ रही है तो अधिकारी एक-दूसरे पर टाल रहे हैं। आलम यह है कि ट्रांसफार्मर फुंकने पर कई महीनों में भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

    संभल जिले का सृजन 28 सितंबर 2011 को हुआ था। जिसमें बदायूं जिले की तहसील गुन्नौर को शामिल किया गया। तब लोगों को उम्मीद जागी थी कि बिजली व्यवस्था बेहतर हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

    गुन्नौर क्षेत्र के गांव रघुपुर पुख्ता, मिठनपुर, समसपुर गंग, भावरू, बरखेड़ा, गनेशपुर, जलालपुर, कलेटा, सिंघौला पुख्ता, गंगुरा, वीर बहादुर, घोसली वाहन, घोसली राम सहाय, कादराबाद, हसियावली, बहट नसीरपुर, गनुपुरा,मल्लाह घेर, जलालपुर, सहित 53 गांव बदायूं के जरीफनगर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े हैं और करीब 5000 उपभोक्ता हैं।

    तकरीबन 75 प्रतिशत उपभोक्ता बबराला डिवीजन में बिजली बिल जमा करते हैं। वैसे ग्रामीण क्षेत्र में बिजली करीब 18 घंटे मिलनी चाहिए लेकिन दो से चार घंटे ही बिजली मिल पा रही है। जिससे ग्रामीण परेशान हैं तो किसानों के खेतों में खड़ी धान सहित अन्य फसलें सूख रही हैं। इसके अलावा गांव गंगुरा में तीन में दो ट्रांसफार्मर कई महीने से फुंके पड़े हैं।

    एक ही ट्रांसफार्मर से कुछ ग्रामीणों को बिजली मिल रही है जबकि अधिकतर घरों में अंधेरा है। प्रधान भावना देवी द्वारा संभल और बदायूं के अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। बहरहाल, दो जिलों के फेर में बिजली व्यवस्था फंसी हुई है, जिससे ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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    ग्रामीण बदायूं के अधिकारियों से कहते हैं तो संभल जाने की कह दी जाती है। जिसे लेकर ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटने के कगार पर है। जलालपुर के गौरव गुप्ता का कहना है कि जलालपुर बिजली नहीं आने के कारण फसलें सूख रही हैं। रात के वक्त अंधेरा रहता है।

    ग्रामीणों के मोबाइल फोन भी चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। दिन में गर्मी और लू और रात में मच्छरों के प्रकोप से नींद नहीं आती। गनेशपुर के सर्वेश कुमार बताते हैं कि सुबह तीन बजे बिजली आती है और पांच बजे चली जाती है। वहीं समय ठंडा होता है और नींद का समय होता है।

    बिजली नहीं आने के कारण इनवर्टर भी चार्ज नहीं हो पाते। शिकायत करने पर कोई लाभ नहीं मिलता। मल्लाह घेर की क्रांति देवी का तर्क है कि गांव कदराबाद के मल्लाघेर में बिजली कब आई कब चली गई पता ही नहीं चलता। पुरानी जिंदगी जी रहे हैं। हाथ के पंखों से ही हवा करनी पड़ती है।

    या दिन में पेड़ों के नीचे बैठकर समय गुजार देते हैं। प्रधान गगुरा भावना देवी का कहना है कि गांव में दो ट्रांसफार्मर फुंके पड़े हैं। इस संबंध में संभल और बदायूं के अधिकारियों से शिकायत की लेकिन समाधान नहीं हुआ है और न ही शिकायत का संज्ञान लिया गया है।

     

    गंगुरा में फुंके पड़े ट्रांसफार्मर संभल से ही बदले जाएंगे। विद्युत उपकेंद्र पर अधिक लोड है जबकि उपकरण की क्षमता पूर्व की तरह है। जिस वजह से बार-बार ट्रिपिंग होती है। ओवरलोड भी अधिक हो जाता है।

    - वीरेंद्र प्रताप सिंह, अवर अभियंता विद्युत उपकेंद्र जरीफ नगर

     

    गंगुरा गांव के खराब पड़े ट्रांसफार्मरों के बारे में जानकारी नहीं है। 53 गांवों की बिजली व्यवस्था बदायूं के विद्युत उपकेंद्र जरीफ नगर से है। उपभोक्ता 4089 हैं। 962 का बिल विद्युत उपकेंद्र जरीफ नगर में जमा होता है। बाकी का हमारे डिविजन बबराला में जमा किए जाने की व्यवस्था है।

    - अजय कुमार शुक्ला, अधिशासी अभियंता, बबराला


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