संभल विवाद: '1976 तक होता था भजन-कीर्तन...' आयोग की रिपोर्ट में ASI की गवाही से सामने आए हरिहर मंदिर के साक्ष्य
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में एएसआई ने संभल में हरिहर मंदिर के साक्ष्य मिलने की बात कही है। 76 वर्षीय सतीश मदान ने 1973-74 तक मंदिर परिसर में भजन-क ...और पढ़ें

संभल में स्थित जामा मस्जिद। जागरण आर्काइव
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76 वर्षीय सतीश मदान ने आयोग को दिए हलफनामे में किया 1973-74 तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का दावा
सौरव प्रजापति, संभल। न्यायिक जांच आयोग ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की रिपोर्ट का भी हवाला अपनी कुल 854 पेज की रिपोर्ट में दिया है। इसमें एएसआइ की ओर से हरिहर मंदिर होने का दावा और साक्ष्य मिलने की बात है। इतना ही नहीं, शहर के रहने वाले 76 वर्षीय सतीश मदान ने आयोग को दिए हलफनामे में 1973-74 तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन करने का दावा किया है।
रिपोर्ट में सहायक अधीक्षक पुरातत्वविद् नीति अनिल कुमार ने बताया कि विवादित जामा मस्जिद के निर्माण के दौरान मूल संरचना छिपाई गई है। जामा मस्जिद और संभल का इतिहास (पूर्व में मुरादाबाद) मुरादाबाद जिले के गजेटियर में है।
इसके मुताबिक ग्यारहवीं शताब्दी में यहां हिंदू राजाओं का शासन था। पंद्रहवीं शताब्दी से मुगल शासन शुरू हुआ। वर्ष 1526 में बाबर के आदेश पर विवादित जामा मस्जिद को बनाया गया।
संभल निवासी सतीश मदान ने अपने बयान में बताया कि वह अपनी कीर्तन मंडली के सदस्य राधा रमण उपाध्याय, राजकुमार संखधर, गोपी संखधर, महावीर प्रसाद खत्री उर्फ पहलवान, हाई गुरु, शिव कुमार शुक्ला, बाबू राम शुक्ला, नन्नूमल हलवाई, जय जय ढोलकवाले, राम रंग भजनानंदी और कुलजस राय सहित कई अन्य के साथ वर्ष 1973-74 तक हर सोमवार को हरि हर मंदिर में भजन और कीर्तन में नियमित रूप से भाग लेते थे।
यह भी कहा गया है कि वर्ष 1976 तक हिंदू भक्त नियमित रूप से हरि हर मंदिर में हवन कुंड के पास भजन-कीर्तन में भाग लेते थे। इस बयान को अन्य गवाहों के साक्ष्य द्वारा भी पुष्टि की गई है। इसलिए यह प्रतीत होता है कि वर्ष 1976 तक हिंदू समुदाय के लोगों को विवादित स्थान तक पहुंच थी, जो वास्तव में एएसआई के नियंत्रण में है।
मस्जिद को किसने बनाया, यह कहां बनाई गई थी और क्या यह हरिहर मंदिर के खंडहरों पर बनाई गई थी, यह मुकदमा संख्या 182/2024 का विषय है, जो सिविल जज सीनियर डिवीजन चंदौसी की अदालत में लंबित है। इसलिए, आयोग इस विषय पर कोई निष्कर्ष नहीं दे सकता।
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मंजर शफी ने मरा समझकर छोड़ा था, पीएसी की निगरानी में करते थे कीर्तन : मदान
न्यायिक जांच आयोग के समक्ष बयान देकर श्री हरिहर मंदिर में कीर्तन मंडली के साथ रहने वाले सतीश मदान ने दैनिक जागरण प्रतिनिधि से बताया कि आयोग को दिए गए बयान में जो लिखा है, वही सत्य है। क्योंकि सच को बताना मेरा धर्म भी है।
उन्होंने बताया कि 1978 का दंगा भड़काने वाला मुख्य आरोपित मंजर शफी ने उनके साथ मारपीट की थी और मरा समझकर छोड़ गया था। अब जहां मंडी है। वहां पर हमारा फार्म होता था। उस घटना के बाद संभल छोड़कर मुरादाबाद में बस गए।
1973-74 तक कीर्तन मंडली के लोग पीएसी की निगरानी में मंदिर परिसर में स्थित यज्ञशाला के चारों तरफ बैठकर भजन-कीर्तन करते थे। उस वक्त मुस्लिम समाज भी पीएसी की नजर में नमाज पढ़ता था। दोनों संप्रदायों के लोग आ-जा सकते थे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके अलावा कीर्तन मंडली के सभी लोगों का निधन हो गया है।