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    2 लाख रुपये के चक्कर में बहन बनी 'पत्नी', फर्जी आधार से बीमा क्लेम का खुलासा- पुलिस जांच में पूरा गिरोह बेनकाब

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 06:56 PM (IST)

    दो लाख रुपये के फर्जी बीमा क्लेम के लिए भाई-बहन ने मृत चचेरी भाभी का फर्जी आधार कार्ड बनवाया और बहन को पत्नी बनाकर प्रस्तुत किया। पुलिस ने भाई, बहन और ...और पढ़ें

    बहजोई में बीमा गिरोह को लेकर पर्दाफाश करते एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई। जागरण

    बहजोई में बीमा गिरोह को लेकर पर्दाफाश करते एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई। जागरण

    HighLights

    1. भाई-बहन के साथ एक गवाह को भी पुलिस ने पकड़ा, सरगना फरार

    2. पिछले वर्ष पकड़ा गया फर्जी बीमा गिरोह का नेटवर्क फिर हुआ सक्रिय

    संवाद सहयोगी, बहजोई (संभल)। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के दो लाख रुपये का फर्जी क्लेम लेने के प्रयास का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए भाई बहन और गवाह समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि सरगना अभी फरार है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि रजपुरा पुलिस ने धनारी थाना क्षेत्र के गांव कल्हा निवासी आरोपित मोहित कुमार, उसकी सगी बहन शालू और बीमा क्लेम प्रपत्र पर गवाह के रूप में हस्ताक्षर करने वाले तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गिरोह का सरगना सत्यप्रकाश फरार है।

    हाल ही में केसरपुर की यूपी ग्रामीण बैंक के प्रबंधक राहुल अग्रवाल की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट के बाद जांच में सामने आया कि मोहित ने आठ नवंबर 2023 को अपनी मृत चचेरी भाभी राजकुमारी के नाम पर फर्जी आधार कार्ड तैयार कराकर रजपुरा थाना क्षेत्र के केसरपुर स्थित सर्व यूपी प्रथमा ग्रामीण बैंक में खाता खुलवाया।

    उसने स्वयं को मृतका के पति सुमित कुमार के रूप में दर्शाया और अपनी बहन शालू को राजकुमारी बनाकर पत्नी के रूप में प्रस्तुत किया। इसके बाद योजना के तहत दो लाख रुपये का क्लेम लेने का प्रयास किया।

    शाखा प्रबंधक ने दस्तावेजों का सत्यापन किया तो पता चला कि राजकुमारी की मृत्यु 18 दिसंबर 2021 को हो चुकी थी और 24 फरवरी 2022 को ग्राम पंचायत से मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो चुका था। इसके बावजूद दूसरा फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर क्लेम किया गया।

    पुलिस जांच में सत्यप्रकाश के ठिकाने से आधार संशोधन मशीन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रानिक उपकरण और दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस अब बैंक खातों, केवाईसी, बीमा प्रपत्रों, इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों, दस्तावेज तैयार करने वालों और बैंक कर्मियों की भूमिका की जांच कर रही है।

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    साथ ही यह भी पड़ताल की जा रही है कि गिरोह ने इसी तरीके से अन्य बीमा कंपनियों में भी फर्जी पालिसियां और क्लेम तो नहीं किए। एसपी ने बताया कि विवेचना में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    जनपद के बीमा क्लेम की होगी जांच, सभी बैंकों से मांगा जाएगा रिकार्ड

    बीमा योजना में फर्जी क्लेम के खुलासे के बाद एसपी ने सीओ गुन्नौर अंकित मिश्रा को जनपदभर में योजना के तहत भुगतान किए गए सभी क्लेम का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।

    जांच में गुन्नौर तहसील के साथ पूरे जनपद की बैंक शाखाओं में खुले खातों, भुगतान किए गए बीमा क्लेम, केवाईसी, दस्तावेजों और लाभार्थियों का मिलान किया जाएगा। साथ ही यह भी जांच होगी कि किसी बैंक शाखा प्रबंधक, बैंक कर्मी या बीमा फर्जीवाड़ा गिरोह की मिलीभगत से तो फर्जी खाते खोलकर क्लेम नहीं लिए गए।

    आधार में सिर्फ फोटो बदले, पहचान वही रखकर रचा दो लाख के बीमा का खेल

    पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने केवल मृतका राजकुमारी का आधार कार्ड ही नहीं, बल्कि उसके पति सुमित कुमार के आधार कार्ड का भी फर्जी संशोधन किया था। पुलिस के अनुसार आधार कार्ड में नाम, पता और अन्य विवरण अधिकांशतः यथावत रखे गए, लेकिन सुमित कुमार के फोटो की जगह मोहित कुमार का फोटो और राजकुमारी के फोटो की जगह उसकी सगी बहन शालू का फोटो लगा दिया गया।

    पुलिस का दावा है कि यह पूरा काम गिरोह के सरगना सत्यप्रकाश ने किया, जिसके घर से आधार संशोधन करने की मशीन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद हुए हैं। यह भी बता दें कि कि पिछले वर्ष पकड़े गए बीमा फर्जीवाड़ा गिरोह सक्रिय था। तब लोगों की आयु करीब 20 वर्ष कम दिखाकर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में पंजीकरण कराया जाता था।

    जांच में राजस्थान से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने का भी मामला सामने आया था। इस बार गिरोह ने नई तरकीब अपनाते हुए मृतका के नाम से दूसरा मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर बीमा क्लेम लेने का प्रयास किया।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में अलीगढ़ नगर निगम की भूमिका सामने नहीं आई है। यह भी जांच का विषय है कि आधार कार्ड किसी अधिकृत आधार सेवा केंद्र पर बनाए गए या फिर किसी अधिकृत आपरेटर की आइडी का दुरुपयोग कर घर पर ही संशोधन किए गए।

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